मोदी-मोदी कहना होगा, अमितशाह से डरना होगा!

आड़ा-तिरछा , , रविवार , 18-03-2018


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वीना

मोदी का जयकारा  लगाने से इंकार करने पर लालू प्रसाद यादव की तरह जेल हो सकती है। और...अमित शाह के गुनाह को गुनाह मानने की जुर्रत करने पर जज लोया की तरह जान भी जा सकती है। अधिकारों को चाशनी समझकर चाटने वाले किसी ग़लतफ़मी में न रहें। लोग कहते हैं, आजकल सिंहासन के ऊपर-नीचे, पीछे से ये आवाजे़ं आती हैं!

सुना है जज लोया बहुत ईमानदार थे। करोड़ों का लालच दिया, पर बिकने को राज़ी ही न हुए! जज लोया की ज़िन्दगी का अंत जानकर मैं तो सपने में भी किसी को जज बनने की सलाह न दूं। माफ़ कीजियेगा जज नहीं, ईमानदार जज बनने की। नहीं...नहीं...सिर्फ जज बनने की। ओ... हो... बक रही हूं जुनूं में न जाने क्या-क्या, कुछ न समझे ख़ुदा करे कोई। शुक्रिया जनाब ग़ालिब! 

जहां-जहां भी मैं साहब और शाह जी के खि़लाफ़ जाती लगूं भक्तजन कृपया ग़ालिब की सफाई मेरी तरफ से पढ़ कर मुझे माफ़ करें। धन्यवाद। क्या है ना कि मुझे मरने से बहुत डर लगता है। और सुना है आम लोगों के लिए हिंदुस्तान की जेलें भी नरक से कम नहीं होतीं। जहां तक ईमानदारी का सवाल है तो ईमानदारी किसी की जान नहीं लेती।

ईमानदार तो सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा भी हैं। वैसे भी जज लोया की जान जाने का उनकी ईमानदारी से कुछ लेना-देना है कि नहीं ये अभी विवादित है। 

अब भले ही कारवां पत्रिका ऐसे सारे सबूत जुटा कर ला दे जो ढीठपने से जज लोया की मौत को हत्या साबित करते हों। और हत्या का कारण ईमानदारी बताते हों। 

भले ही लोया के पिता-बहन के शक़ उन सबूतों की पैरवी करते हों। भले ही जज लोया की मौत के बाद “सोहराबुद्दीन फ़ेक एनकाउन्टर” मामले में अमितशाह बाइज़्ज़त बरी कर दिए गए हों। इसका मतलब ये थोड़े ही है कि जज लोया ने ईमानदारी की क़ीमत अपनी जान देकर चुकाई है। जब तक ईमानदार जस्टिस दीपक मिश्रा को ऐसा नहीं लगता ऐसा नहीं हो सकता। 

सबूतों का क्या है? सबूत तो कुछ भी कहते हैं। सबूत तो ये भी हैं कि जस्टिस दीपक मिश्रा ने ग़रीब भूमिहीन ब्राह्मण बनकर दो एकड़ ज़मीन अपने नाम करवा ली थी। जिसे बाद में उन्हें वापिस करना पड़ा। क्योंकि वो ग़रीब भूमिहीन होने की शर्तें पूरी नहीं करते थे। क्योंकि वो उस समय सुविधा-सम्पन्न जजों-मंत्रियों के घर-खानदान के वकील बेटे थे।

इससे भी क्या होता है अगर अरुणाचल प्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री कलिखो पुल ने फांसी लगाने से पहले अपने 60 पन्नों के सुसाइड नोट में दीपक मिश्रा के भाई जज आदित्य मिश्रा पर इल्ज़ाम लगाया था कि 37 करोड़ देने पर वो सुप्रीम कोर्ट में चल रहा कलिखो का एक मामला उनके हक़ में करवा देंगे।

जस्टिस दीपक मिश्रा ईमानदार हैं। सरकारी ठप्पे सहित। तभी तो वो देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की कुर्सी पर विराजमान हैं। जज लोया की मौत विवादित है कि नहीं वो इसका फैसला पूरी ईमानदारी से करेंगे। 

अदालत के बाहर जिन सबूतों के आधार पर बच्चा भी ये समझ सकता है कि जज लोया को उनकी ईमानदारी के बदले मौत मिली है। अदालत के भीतर उन्हीं सबूतों से जस्टिस दीपक मिश्रा अगर ये समझ पाते हैं कि जज लोया की हत्या हुई है स्वभाविक मौत नहीं, तो जज लोया के हत्यारों को ज़रूर खोजने का आदेश सुना देंगे। भले ही उनका ये आदेश बीजेपी अध्यक्ष अमितशाह को कटघरे में खड़ा करता हो। वो इसकी तनिक परवाह नहीं करेंगे।

तो जो ये फैलाते फिरते हैं कि अमितशाह से डरना होगा, वरना लोया बनना होगा। उनसे हमारा कहना है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना न दे, यूं किसी पर इल्ज़ाम लगाना अच्छी बात नहीं। 

एक कहावत है - ग़रीब की जोरू सबकी जोरू। लोग कहते हैं आजकल सत्तापक्ष के खि़लाफ जाने वाली विपक्षी पार्टियों और नेताओं की औक़ात ग़रीब की जोरू से तनिक भी ज़्यादा नहीं है। हां कम ज़रूर हो सकती है। 

बिहार में आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने सत्ता की जोरू बनने से इंकार कर दिया है। नतीजा आपके सामने है। सीधे जेल। लालू यादव ने भले ही खु़द चारा न खाया हो पर जोरूपन की जी हज़ूरी में नीतिश बाबू ने मुंह में ठुसवा ज़रूर दिया।

अब जेल पहुंचकर भी जोरू बनने से इंकार... बताओ, अररिया लोकसभा और जहानाबाद  विधानसभा का उपचुनाव जीत लिया! 

क्या समझते हो लालू जी, सरफराज़ आलम को सांसद बना दोगे और ऑडियो- वीडियो की फोरेंसिक जांच किये बगै़र अररिया का थानाध्यक्ष दीपांकर श्रीज्ञान एफआईआर भी दर्ज नहीं करेगा। 

पता है... पता है... बच्चा भी देखकर बता देगा कि वीडियो वाला लड़का ‘‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’’नहीं बोल रहा है। पर अररिया के थानाध्यक्ष श्रीज्ञान को नज़र नहीं आएगा तो क्या कर लोगे? उसने एफआईआर भी दर्ज कर ली और दो बेकसूरों को पकड़ भी लिया। अब करवाते रहो जांच-फांच। क्या ज़रूरत थी ये गाने-बजाने की लालू जी, कि मोदी-मोदी कहना होगा वरना लालू बनना होगा!

                              (वीना पत्रकार एवं फिल्मकार हैं।)


 










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shaikh Azhar :: - 03-18-2018
vena je aap ka javab nahi very good