नया विज्ञानः आकाश में उछाला गया पत्थर नीचे आ रहा है!

क़लमकार , नई दिल्ली , बुधवार , 20-09-2017


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असगर वजाहत

(हुकूमत बदलती है। हुक्मरान भी बदलते हैं। उसके साथ ही रियासत और सियासत के वसूल भी बदलतें है। तीन वर्ष पहले हिंदोस्तान में भी सत्ता बदलीं। सियासत बदली। लेकिन अब सियासत सब कुछ बदलने का दावा कर रही है। क्योंकि पहले की हुकूमतों ने बहुत गड़बड़ झाला किया था। इसी संदर्भ को ध्यान में रखते हुए लिखी गयी वरिष्ठ साहित्यकार असगर वजाहत की कहानी नया विज्ञानआपके सामने है। जो आज की परिस्थितियों में बिल्कुल मौजूं है।) - संपादक

इतिहास और भूगोल बदल दिया

लोग उसे घेरे खड़े थे। वह बड़ा उत्तेजित लग रहा था। शब्द उसके मुंह से गोलियों की तरह निकल रहे थे। उसके समर्थक उसके कुछ बोलने से पहले ही तालियां बजाकर दिल बढ़ा रहे थे वह लगातार बोल रहा था। किसी को सोचने या कुछ पूछने तक का मौका नहीं दे रहा था। उसके शब्द लोगों पर असर कर रहे थे और लोग उसके प्रशंसकों और समर्थकों में शामिल हो रहे थे। वह कह रहा था कि देखो हमने इतिहास बदल डाला। हमने शासकों के नाम, घटनाओं का घटनाक्रम बदल दिया। हार को जीत बना दिया, अच्छे को बुरा बना दिया और बुरे को अच्छा कर दिया। काले को सफेद कर दिया और स्त्री को पुरुष बना दिया और पुरुष को स्त्री बना दिया ।

देखो हमने क्या कर दिया। हमने 1000 साल के इतिहास को बदल दिया। हमने किताबें बदल दी। किताबों के लिखने वालों को बदल दिया है। हमने एक दिन में सैकड़ों इतिहासकार पैदा कर दिए हैं जो सच्चा और पक्का इतिहास लिख रहे हैं। किताबों में जो पहले लिखा था वह गलत था। अब जो हमने लिखा है वह सही है। अब वही पढ़ाया जाएगा। हमने इतिहास बदल दिया।

तालियों की गड़गड़ाहट के बाद उसकी जय जयकार होने लगी लोग खुशी से पागल हो गए उसने कहा कि हमारा इतिहास वास्तव में बड़ा गंदा इतिहास था। अच्छा किया जो उसे बदल दिया। इससे बड़ी देश की सेवा क्या हो सकती है।

फिर उसने कहा इतिहास को ही नहीं हमने भूगोल को भी बदल दिया है। हमने देश की सीमाओं को बदल दिया है। तुम जहां तक समझते हो वहां तक देश नहीं है। देश की सीमाएं दूर-दूर तक फैल गई है। वह सब जो पहले विदेश कहा जाता था वह विदेश नहीं, अब देश का भाग हैं। भूगोल बदल दिया है। नदियों को पवित्र कर दिया है। पर्वत और जंगल जो कट गए थे उनको लगा दिया गया है। इतिहास और भूगोल बदल दिया है ।

विज्ञान भी बदलेंगे

अब विज्ञान भी बदलेंगे

फिर उसने कहा अब हम विज्ञान बदलने जा रहे हैं। वैज्ञानिक अब तक बड़ा झूठ बोलते रहे हैं। पश्चिम के वैज्ञानिकों ने हमारे विज्ञान को ठीक से नहीं समझा है। और अब हम सिद्ध करने जा रहे हैं कि पश्चिम का विज्ञान गलत है। हमारे देश में आज से 10,000 साल पहले सुपरसोनिक जेट से अधिक तेज चलने वाले वायुयान थे। यूरोप आज प्लास्टिक सर्जरी पर गर्व करता है पर हमारे देश में यह सर्जरी 10,000 साल पहले हुआ करती थी। हमारे देश में 10,000 साल पहले वह सब कुछ था जो आज भी आधुनिक से आधुनिक देश के पास नहीं है। हमारे महापुरुषों का एक-एक वाण सौ- सौ एटम बम के बराबर हुआ करता था। हम यह बात सिद्ध करने जा रहे हैं। सबसे पहले हम यह सिद्ध करेंगे की पश्चिम के वैज्ञानिक बड़े झूठे और बेईमान थे। हमारे ही देश से हमारे वैज्ञानिक आचार्यों के फार्मूले चुराकर अपने देश ले गए और वहां उसको प्रचारित कर दिया। हम लोग प्रचार नहीं कर सके इसलिए हमारी बात पहुंच नहीं सकी।

उसने कहा, सिद्ध कर दूंगा कि न्यूटन ने जो कुछ लिखा है सब झूठ है। वैसे न्यूटन पक्का चरित्रहीन था। एक वेश्या के साथ उसके अनैतिक संबंध थे और अपनी पत्नी को लेकर भाग गया था। उसको मोहल्ले के लोगों ने पकड़ कर पीटा भी था। लड़कियों को छेड़ने में उसका कोई जवाब न था। गैलेलियो अपने एक टेलिस्कोप पर गर्व करता था और हमारे यहां बिना टेलिस्कोप के दूर-दूर तक देखने वाले पैदा हुए हैं। आइंस्टाइन की थ्योरी ऑफ रिलेटिविटीफ्राड है। वह बड़ा अज्ञानी था। असली खोजों से पता चला है कि वह तो भारत में झुमरी तलैया के एक छोटे से कॉलेज में होम साइंस पढ़ाया करता था और यूरोप जाकर उसने थ्योरी ऑफ रिलेटिविटीकी घोषणा कर डाली। डार्विन तो बिल्कुल मूर्ख था। स्कूल में हमेशा फेल हो जाता था। उसके अध्यापक उससे बहुत दुखी रहा करते थे। किसी को आशा तक न थी कि वह हाईस्कूल पास कर सकेगा। उसके पिताजी की परचून की दुकान थी और माता धोबिन का काम करती थी। उसके दादा कसाई थे और परदादा गाड़ीवान थे। यह सब नयी खोजों से पता चला है।

उछाला गया पत्थर

तो मितरों आइए हम न्यूटन को, जिसकी थ्योरी ऑफ रिलेटिविटीपर पूरा यूरोप गर्व करता है,को गलत सिद्ध करते हैं। न्यूटन कहते हैं कि पृथ्वी में गुरुत्वाकर्षण है। मतलब यह कि पृथ्वी में शक्ति है। हम कहते हैं कि आकाश में शक्ति है। न्यूटन कहते हैं किसी चीज को ऊपर फेंको तो वह पृथ्वी की ओर आएगी, नीचे गिर जाएगी। हम कहते हैं कि किसी चीज को ऊपर फेकों तो आकाश में चली जाएगी। देवलोक में चली जाएगी। देवलोक में बड़ी शक्ति है। हम आज यही सिद्ध करेंगे। हम अपने शिष्यों से कहते हैं कि वह एक भारी पत्थर ले आए। भारी पत्थर को हम ऊपर फेकेंगे और वह आकाश में चला जाएगा।

उनके सौ शिष्य एक बड़ा भारी पत्थर लाए। उसने अकेले पत्थर को उठा लिया। तालियां बजने लगीं। लोग उसकी जय जयकार करने लगे। उसने पत्थर को दोनों हाथों से उठाकर आकाश की ओर फेंका और पत्थर ऊपर जाने लगा। तालियों की गड़गड़ाहट और बढ़ गई। जय जय कार के नारे लगने लगे। हर्षोल्लास छा गया। जरा देर में बहुत भव्य मंच लग गया। फूलों से सज गया। बैनर पोस्टर से लग गए। लाउडस्पीकर आ गए। अपार जनता आ गई और भाषण शुरू हो गए। देश प्रेम के भाषण। देश की उपलब्धियां। देश का गौरवशाली अतीत। देश का विज्ञान। देश का बदला हुआ इतिहास। देश का बदला हुआ भूगोल। आगे और आगे और आगे बढ़ता हुआ देश।

आकाश में उछाला गया पत्थर नीचे आया

अचानक देखा गया की आकाश में उछाला गया पत्थर बहुत तेजी से नीचे आ रहा है। उसका आकार भी बहुत बढ़ गया है। जैसे-जैसे वह नीचे आ रहा है वैसे वैसे उसका आकार बढ़ता जाता है। लोगों ने इधर-उधर भागने की कोशिश की। मंच से नेता कूदे। भागो,बचाओ-बचाओ की बहुत सी आवाजें आने लगीं है लेकिन ऊपर से गिरने वाला पत्थर इतना बड़ा और इतना भारी हो गया था कि पूरा मंच और जय जयकार करने वाले सभी लोग और दर्शक उसके नीचे आ गए हैं।

 

 

 










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