रामायण का उत्तरकांड : पूरे अवध में नहीं मिले योगी को राम!

धर्म-सियासत , , बृहस्पतिवार , 26-10-2017


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मुकुल सरल

ये तो मालूम था कि अयोध्या में दीपावली के सरकारी उत्सव में शामिल राम, लक्ष्मण, सीता कलाकार हैं, लेकिन यह नहीं मालूम था कि ये दिल्ली के मॉडल्स होंगे। हमें तो यही उम्मीद थी कि ये स्थानीय कलाकार होंगे। अयोध्या या आसपास की रामलीला के कलाकार। आख़िर उन्हीं का हक़ बनता था इस भव्य उत्सव में शामिल होने का, लेकिन यहां भी अयोध्या वालों का हक़ मार लिया गया। 

अयोध्या की त्रासदी!

जिस तरह राम मंदिर के लिए आज तक अयोध्या वालों की राय न ली गई और बाहर के लोगों ने ही जबरन बाबरी मस्जिद ढहा कर पूरे देश को दंगों की आग में झोंक दिया, उसी तरह दिवाली पर राम की अयोध्या वापसी के प्रतीकात्मक आयोजन में भी अयोध्या वालों को नहीं पूछा गया। यही अयोध्या की विडंबना है, यही त्रासदी है! 

अयोध्या में हुए दिवाली उत्सव का दृश्य। फोटो साभार

स्थानीय कलाकारों की उपेक्षा

हमें किसी के दिल्ली वाला होने या मॉडल होने में आपत्ति नहीं। और होनी भी क्यों चाहिए? लेकिन ऐसा भी नहीं है कि अयोध्या या आसपास रामलीला नहीं खेली जाती है। पूरे अवध में हर साल रामलीला का शानदार आयोजन होता है। तो बरसों से रामलीला में भाग ले रहे स्थानीय कलाकारों को इस दीपोत्सव में क्यों नहीं जगह दी गई। उन्हें भी मौका मिलता नाम का, काम का, कुछ पैसे भी जुड़ते। वे भी “आधुनिक युग के पुष्पक विमान” हेलीकॉप्टर में बैठने का आनंद उठाते। उनके ऊपर भी पुष्प वर्षा होती। उनकी भी मुख्यमंत्री और राज्यपाल आरती उतारते। लेकिन ऐसा नहीं हुआ...

पीआर एजेंसी को ठेका

इसमें भी बाहर के खाये-कमाये लोग बाज़ी मार गए। स्थानीय रामलीला कमेटी की जगह पीआर एजेंसी को ठेका मिल गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन किरदारों के सेलेक्शन के लिए परसेप्ट लिमिटेड एजेंसी से कॉन्ट्रैक्ट हुआ था। परसेप्ट ने ही तीनों को सेलेक्ट किया और फीस तय की। 

ख़ालिस सियासत, शुद्ध व्यापार

...तो इस सबसे क्या जाहिर होता है? यही कि इस उत्सव में आस्था और श्रद्धा से ज़्यादा दिखावा और बिजनेस ही था। दीयों की खरीदारी से लेकर तेल-बाती के इंतज़ाम तक। किरदारों के चयन से लेकर हेलीकॉप्टर की उड़ान तक और उनकी पूजा और महिमागान तक ख़ालिस सियासत और शुद्ध व्यापार।  

हमने सुना था कि बहुत जगह रामलीला से सालभर पहले राम-सीता और लक्ष्मण का चयन हो जाता है और वे पूरे बरस कठिन जीवन जीते हुए रिहर्सल करते हैं, तब जाकर वे रामलीला में पाठ कर पाते हैं। हालांकि अब यह सब कम ही दिखता है, लेकिन अयोध्या के इस सरकारी ऐतिहासिक उत्सव में तो ऐसा कुछ होना ही चाहिए था। आखिर राम की धरती है वह, सबकुछ राम के नाम पर हो रहा था, जिस नाम के बूते आज योगी और मोदी जी की बीजेपी सत्ता में बैठी है। और एक बार फिर उसी का आसरा है।

इस तरह हुआ रीक्रीएशन!

दावा किया गया था कि रामचरित मानस की कथा के अनुरूप राम के अयोध्या लौटने के दृश्य को रीक्रीएट किया जा रहा है। यानी उस दृश्य को एक बार फिर से दोहराने की कोशिश की जा रही है। तो इस तरह हुई ये कोशिश...

पता चला कि इस उत्सव से कुछ रोज़ पहले ही पीआर एजेंसी ने इन कलाकारों का चयन किया था।

अयोध्या में हुए दिवाली उत्सव में राम बने हेमंत कालरा। फोटो साभार

 

'चार दिन पहले मिला राम का रोल' 

राम बने दिल्ली के हेमंत कालरा कहते हैं कि दिवाली से चार दिन पहले उन्हें यह रोल ऑफर हुआ था। उन्होंने बताया- 'बचपन में देखे रामायण सीरियल से बड़ी मदद मिली। राम के कैरेक्टर के लिए छाती चौड़ीकर चलना और चेहरे पर कोई शिकन न हो उसकी प्रैक्टिस करना भी सीखा। जूलरी पहनकर और धनुष उठाकर चलना थोड़ा मुश्किल था।'

 'हेलीकॉप्टर से उतरा तो योगीजी ने कहा- 'आपका स्वागत है अयोध्या महाराज।' वह वैसे ही आदर कर रहे थे जैसे सच में उनके सामने भगवान राम हों।'

हेमंत बीकॉम कर चुके हैं और अभी 4 महीने पहले ही मॉडलिंग शुरू की है। इसी बीच उन्हें ये रोल मिल गया। उनका सोचना है कि इससे उनके करियर में उछाल आएगा। 

अयोध्या में हुए दिवाली उत्सव में सीता बनीं आंचल घई। फोटो साभार

दिल्ली की ब्यूटी क्वीन हैं आंचल

सीता का रोल दिल्ली की मॉडल और ब्यूटी क्वीन आंचल घई ने किया। 22 साल की आंचल कई नामी मोबाइल कंपनियों के लिए विज्ञापन भी कर चुकी हैं, लेकिन सीता का रोल उनके लिए ख़ास था।

आंचल बताती हैं- 'दो साल से मॉडलिंग कर रही हूं। हफ्तेभर पहले ही सीताजी का रोल ऑफर किया गया। फिर तो मैंने दिन-रात मेहनत की। यूट्यूब पर रोज 8 से 10 घंटे सीता का रोल देखती, फिर शीशे के सामने उसकी प्रैक्टिस करती रही।' 

आंचल ने बताया कि - 'अयोध्या में जब मैं पुष्पक विमान से उतरी तो सामने सीएम योगीजी, राज्यपाल राम नाईक और कई मंत्री थे। सीएम सामने आए कहा- 'आपका स्वागत है सीता मां।' जब मुख्यमंत्री और राज्यपाल पूजा कर रहे थे तो मैं बहुत एक्साइटेड हो गई थी। तब मैं सीताजी का रोल कैसे कर पा रही थी ये तो भगवान ही जानते हैं।'

दो दिन पहले लक्ष्मण का चुनाव

अब आपको मिलवाते हैं लक्ष्मण से। इस दिवाली उत्सव में मुजफ्फरनगर के रहने वाले विक्रांत ठाकुर ने लक्ष्मण का किरदार नि‍भाया। विक्रांत इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके हैं। वे बताते हैं- 'मैं डेढ़ साल से मॉडलिंग कर रहा हूं। कुछ मराठी मूवी भी की है। मुझे तो इवेंट से सिर्फ दो दिन पहले बताया गया कि लक्ष्मण का रोल करना है।' 

विक्रांत को भी यूट्यूब का सहारा था। उनके मुताबिक 'यूट्यूब पर गया और करीब 16 घंटे का रामायण का वीडियो देख डाला। हमें कोई डायलॉग नहीं बोलना था। सिर्फ बॉडी लैंग्वेंज परफेक्ट करनी थी।' 

उत्तरकांड संपन्न

तो कुल मिलाकर अभिनय अच्छा रहा। सुना है योगी जी खुद विश्वामित्र की भूमिका में थे। इस तरह कलियुग की रामायण का उत्तरकांड संपन्न हुआ। करोड़ों का खर्च करके सरयू किनारे लाखों दीप जले और बुझ गए और अयोध्या फिर अपने अंधेरों में घिर गई।

अयोध्या में हुए दिवाली उत्सव से अगले दिन सरयू घाट का दृश्य। फोटो साभार

(ये लेखक के निजी विचार हैं।)  










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