भगत सिंह से पंगा लेने वाले भगवाधारी सावधान!

आड़ा-तिरछा , , रविवार , 25-03-2018


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वीना

भगत सिंह की फांसी के बाद अख़बारों-रिसालों में उनकी शहादत को श्रद्धांजली देने वाले चित्र छपे थे। उन्हीं में से एक पोस्टर में दिखाया गया है कि भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु तीनों शहीदों को फ़रिश्ते फांसी के बाद स्वर्ग ले जा रहे हैं। पोस्टर में कई अन्य भारतीय क्रांतिकारी पहले से स्वर्ग में उनका इंतज़ार करते हुए दिखाई देते हैं। 

लंदन में ब्रिटिश लाइब्रेरी में भारत के स्वतंत्रता संग्राम के बारे में रिसर्च करने वाली बीबीसी संवाददाता इशलीन कौर ने ये जानकारी साझा की।

हालांकि अपनी शहादत से कुछ दिन पहले भगत सिंह ‘‘मैं नास्तिक क्यों हूं’’ पर्चा लिख चुके थे। जो शहादत के बाद उनके पिता ने जून 1931 में साप्ताहिक अख़बार ‘द पीपुल’ में प्रकाशित करवाया था। शायद उससे पहले उन्हें स्वर्ग ले जाते पोस्टर आए होंगे।

फांसी से कुछ ही मिनट पहले ईश्वर-अल्लाह, वाहेगुरु-यीशू से विनती करने की बजाय भगत सिंह रूस के नास्तिक क्रांतिकारी लेनिन को पढ़ रहे थे। 

भगत सिंह के वकील रहे प्राण नाथ मेहता ने बताया था कि उनकी फांसी से पहले जब वो भगत सिंह से मिलने पहुंचे तो भगत सिंह अपनी छोटी सी कोठरी में शेर की तरह चक्कर लगा रहे थे।

अब ऐसे भगत सिंह से टक्कर लेने का माद्दा अख़लाक-जुनैद-अफराजुल, को मारने वाले और मरवाने वाले भगवाधरी कहां से लाएंगे?

ऊना में दलित युवकों की पिटाई करने वाले नौजवान गाय की पूछ पकड़ कर बिना खर्च-मेहनत स्वर्ग की राह पकड़ना चाहते थे। जैसा उन्हें बताया गया होगा कि उन्होंने गाय का भला किया, गाय उनका करेगी।

राजस्थान में मज़दूर अफ़राज़ु़ल को बेरहमी से मारते हुए वीडियो बनाकर हिंदू बहादुरी का तमाशा दिखाने वाले वीर हिंदू शंभू नाथ रैगर की पैंट, भीतर से नरक के डर से गीली रही होगी शायद। तभी उसने अफराज़ुल कांड का सहारा लेकर स्वर्ग की सीट पक्की करने की ठानी होगी। 

तो इन रैगरों और राम के जाये-जाइयों की जब स्वर्ग में एंट्री होगी (अगर स्वर्ग कहीं है तो) और अगर भगत सिंह भी वहीं मौजूद हैं तो... तो स्वर्गाधिकारी भगवा ब्रिगेड का क्या हश्र होगा..! किसे पता, “वीर” सावरकर और गुरु गोलवलकर की ऊपर क्या दशा हो?

भगत सिंह मोक्ष पाने की पात्रता पर ख़रे उतरते हैं। वैसे भी देवता ख़ुद नहीं चाहेंगे कि वो पृथ्वी पर जाकर उनका बिज़नेस खराब करें। मान लीजिये भगत सिंह स्वर्ग में हैं।

यक़ीनन अगर भगवा आतंकियों को पता चल जाए कि नास्तिकों के लिए भी स्वर्ग होता है तो भगतसिंह की सफे़द पगड़ी जिसे आजकल पीले रंग में रंगा जा रहा है। फिर से सफेद कर दी जाएगी। और बाकायदा घोषणा की जाएगी - ‘‘भगतसिंह बैक टू एथीस्ट पवेलियन।’’ हमारा भगत सिंह से कोई लेना-देना नहीं।

हो सकता है ये भी घोषणा हो जाए कि जिन्होंने पगड़ी रंग कर और कड़ा पहनाकर भगत सिंह को सरदार बनाने का पंगा लिया है अंजाम भी वही भुगते। उनके लिए अलग स्वर्ग का इंतजाम कर दिया जाए। सुना है भारत के केंद्रीय मंत्री रहे एमएस गिल ने बड़े ही गर्व के साथ कहा था कि उन्होंने ही भगत सिंह की प्रतिमा में पगड़ी और कड़ा जोड़ा था। 

जिन्हें ये यक़ीन हो कि स्वर्ग तो है पर भगत सिंह वहां नहीं होंगे, तो होश की दवा करें। धरती पर जो नहीं होता है वो होता है। तो स्वर्ग में क्यों नहीं होगा? 

अगर साहब कहते हैं कि मैं अंबानी-अडानियों का कर्ज माफ़ करके किसानों को फसल की दुगनी क़ीमत दे देता हूं। मेहुल चौकसी, नीरव मोदी आदि-आदि के कर्ज़ लेकर विदेश भागने से मज़दूर-दलित, आदिवासियों का विकास होने लगता है। तो भगत सिंह स्वर्ग में उपस्थित होकर इनकी धुनाई भी कर सकते हैं। इनके लिए स्वर्ग को नरक बना सकते हैं।

फिर भी मेरे महबूब भगत सिंह, कभी-कभी तुम पर बहुत नाराज़ होने को जी चाहता है। तुम क्यों चले गए, मुल्क़ को सिक्कों की चाकरी करने वालों के भरोसे छोड़कर?

देखो, आज पत्थरों को इंसानों की बली दी जा रही है। मेहनतकश औज़ार गला कर सोने-चांदी के सिक्के विदेशी तिजोरियों में भरे जा रहे हैं। झूमती-गाती फसलें किसानों की किस्मत को रो रही हैं। 

समानता और एकता अब तेल लेने भी नहीं जा सकतीं। क्योंकि मोदी ने सारा तेल अपने कब्ज़े में कर लिया है। बनिये धन-जल-जंगल-ज़मीन हथिया रहे हैं। ब्राहमणों ने फिर शिक्षा-सम्मान, ओहदे-रुतबा सब लूट लिया है। बाक़ी बचों में बदहवासी और भगदड़ का आलम है। खोज रहे हैं, क्या बचा है, जो कब्ज़ाया जाए। 

हां...हां...पता है, बहुत से महोतरम और मोहतरमाओं का ध्यान यहीं अटका होगा कि बड़ी आई, भगत सिंह को महबूब बनाने वाली। तो जलने वाले ज़रा जलने से पहले ग़ौर करें -

शहीद-ए-आज़म भगत सिंह की शहादत में बतौर औरत मेरे बेख़ौफ़, बेधड़क जीने-कहने की भी एक शर्त शामिल थी। तो फिर क्यों न मैं अपनी विरासत की हक़दार बनूं?

वैसे भगत सिंह की वसीयत पूरी दुनिया के नाम है...इस पर भगवाधारी कहेंगे, नहीं... पाकिस्तान भगत सिंह का उत्तराधिकारी नहीं... 

भगत सिंह का आखि़री संदेश था - ‘‘इंकलाब जिंदाबाद! साम्राज्यवाद मुर्दाबाद।’’ तो भगवा त्रिशूल धारियों ज़रा त्रिशूल पर बैठकर एक थप्पड़ भगत सिंह की तरफ से ट्रंप को भी जड़ आइये़...आप सत्ता में हैं। इतना तो बनता है, भगत सिंह की विरासत पर हक़ जमाने के लिए। 

भगत सिंह से पंगा लेने वाले भगवाधारी कल्पना करें... अंबानी-अडानी के हेलीकॉप्टर में बैठकर उड़ने वालों को भगत सिंह का दरवाज़ा खटखटाने पर क्या मज़ा मिलता?

वैसे भगवा बेशर्मी का कोई अंत नहीं है। हैरानी नहीं होगी हर कोई संघ विचारक दावा कर दे कि भगत सिंह ने कहा था - ‘‘ देश और समाज को आगे बढ़ाने के लिए धर्म का रास्ता त्याग, विज्ञान का रास्ता अपनाना पड़ेगा।’’ तो भगत सिंह की इन दो महत्वपूर्ण सलाहों पर भगवा ब्रिगेड ने काम करना शुरु कर ही दिया है। गौमूत्र से बीमारी हरण, गौपाद से वातावरण शुद्ध करने जैसी वैज्ञानिक पहल करके।

“भगत सिंह तेरे अरमानों को हम मंज़िल तक पहुंचाएंगे” -चिल्लाने वाले झोला छाप कम्युनिष्टों ने क्या किया है बताएं ज़रा? इसलिए भगत सिंह के असली उत्तराधिकारी बस भगवाधारी हैं।

(वीना पत्रकार और फिल्मकार हैं।)










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