युवा कवि अच्युतानंद को 2017 का भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार

सम्मान-पुरस्कार , नई दिल्ली, बुधवार , 02-08-2017


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जनचौक स्टाफ

इस वर्ष का भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार युवा कवि अच्युतानंद मिश्र की कविता बच्चे धर्मयुद्ध लड़ रहे हैं को दिए जाने की घोषणा की गई है। यह कविता हंस के जनवरी, 2016 के अंक में प्रकाशित हुई थी।

11 अगस्त, 1982 को झारखंड के बोकारो में जन्मे अच्युतानंद का एक कविता संग्रह आँख में तिनकाप्रकाशित हो चुका है। वह एक कवि के अलावा युवा आलोचक के रूप में भी जाने जाते हैं। इन दिनों वह दिल्ली के अम्बेडकर विश्विद्यालय से पीएचडी कर रहे हैं।

कवि-लेखक भारत भूषण अग्रवाल। (फाइल फोटो) साभार

1979 से दिया जा रहा है पुरस्कार

कवि, लेखक और आलोचक भारत भूषण अग्रवाल के नाम से यह पुरस्कार हर वर्ष 35 वर्ष से कम आयु के किसी कवि/कवयित्री की श्रेष्ठ कविता को दिया जाता है। भारत भूषण जी को मरणोपरांत मिले साहित्य अकादमी पुरस्कार की राशि से उनकी पत्नी बिन्दु जी ने 1979 में यह पुरस्कार आरंभ किया था। बिन्दु जी के देहांत के बाद उनकी पुत्री अनिवता अब्बी और बेटे अनुपम भारत इस पुरस्कार को जारी रखे हैं। पुरस्कार के तहत 25 हज़ार रुपये नगद और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है। पुरस्कार वितरण समारोह हर पांच वर्ष में आयोजित किया जाता है।

निर्णायक मंडल में दिग्गज साहित्यकार

पुरस्कार के निर्णायक मंडल में वर्तमान में अशोक वाजपेयी, अरुण कमल, उदय प्रकाश, अनामिका और पुरुषोत्तम अग्रवाल शामिल हैं। बारी-बारी से हर वर्ष एक निर्णायक पुरस्कार के लिए कविता का चुनाव करता है। इस बार की निर्णायक प्रसिद्ध कवयित्री अनामिका थीं।

कई प्रतिष्ठित कवियों को मिला सम्मान

इससे पहले यह पुरस्कार अरुण कमल, अनामिका, देवी प्रसाद मिश्र से लेकर कुमार अंबुज और पंकज चतुर्वेदी तक कई अन्य प्रतिष्ठित कवियों को मिल चुका है। हाल के वर्षों में आर. चेतनक्रांति, गीत चतुर्वेदी, व्योमेश शुक्ल, अनुज लुगुन और कुमार अनुपम को यह पुरस्कार दिया गया।

पिछले साल 2016 में इस पुरस्कार को लेकर काफी विवाद भी हुआ। 2016 में यह पुरस्कार युवा कवयित्री शुभम श्री को कविता पोएट्री मैनेजमेंट को मिला था, जिसके शिल्प और कथ्य को लेकर काफी वाद-विवाद चला था। इस कविता का चुनाव उदय प्रकाश ने किया था। 

आइए पढ़ते हैं इस बरस पुरस्कार के लिए चुनी गई अच्युतानंद मिश्र की कविता

बच्चे धर्मयुद्ध लड़ रहे हैं 

(अमेरिकी युद्धों में मारे गये, यतीम और जिहादी बना दिए गये उन असंख्य बच्चों के नाम) 

 

सच के छूने से पहले 

झूठ ने निगल लिया उन्हें

 

नन्हे हाथ 
जिन्हें खिलौनों से उलझना था 
खेतों में बम के टुकड़े चुन रहे हैं

 

वे हँसतें हैं 
और एक सुलगता हुआ 
बम फूट जाता है

 

कितनी सहज है मृत्यु यहाँ 
एक खिलौने की चाभी 
टूटने से भी अधिक सहज 
और जीवन, वह घूम रहा है 
एक पहाड़ से रेतीले विस्तार की तरफ

 

धूल उड़ रही है

 

वे टेंट से बाहर निकलते हैं 
युद्ध का अठ्ठासिवां दिन 
और युद्ध की रफ़्तार 
इतनी धीमी इतनी सुस्त 
कि एक युग बीत गया

 

अब थोड़े से बच्चे 
बचे रह गये हैं

 

फिर भी युद्ध लड़ा जायेगा 
यह धर्म युद्ध है

 

बच्चे धर्म की तरफ हैं 
और वे युद्ध की तरफ

 

सब एक दूसरे को मार देंगे 
धर्म के खिलाफ खड़ा होगा युद्ध 
और सिर्फ युद्ध जीतेगा

 

लेकिन तब तक 
सिर्फ रात है यहाँ 
कभी-कभी चमक उठता है आकाश 
कभी-कभी रौशनी की एक फुहार 
उनके बगल से गुजर जाती है
लेकिन रात और 
पृथ्वी की सबसे भीषण रात 
बारूद बर्फ और कीचड़ से लिथड़ी रात 
और मृत्यु की असंख्य चीखों से भरी रात 
पीप, खून और मांस के लोथड़ो वाली रात 
अब आकार लेती है

 

वे दर्द और अंधकार से लौटते हैं 
भूख की तरफ

 

भूख और सिर्फ भूख 
बच्चे रोटी के टुकड़ों को नोच रहे हैं 
और वे इंसानी जिस्मों को

 

कटे टांगो वाली भूख 
खून और पीप से लिथड़ी भूख

 

एक मरियल सुबह का दरवाजा खुलता है 
न कोई नींद में था 
न कोई जागने की कोशिश कर रहा है 

 

टेंट के दरवाजे 

युद्ध के पताकों की तरह लहराते हैं 

हवा में, बच्चे दौड़ रहें हैं

खेतों की तरफ 
रात की बमबारी ने 
कुछ नये बीज बोयें हैं।










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