बेटियों से युद्ध नहीं संवाद करे सरकार

विवाद , , शनिवार , 23-9-2017


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अंबरीश कुमार

लखनऊ।बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की एक फोटो आई है। छात्राओं के आंदोलन से निपटने के लिए पुलिस के साथ सुरक्षा बल का वह दस्ता लगाया गया है जो दंगो से निपटता है। ये छात्राएं भी तो वही बेटियां हैं जिनके बचाने का नारा सरकार के शीर्ष पर बैठे नेता दे रहे हैं। बनारस तो देश के सबसे बड़े चैकीदार का राजनैतिक घर है। अब चैकीदार के घर में भी बेटियां सुरक्षित नहीं रहेंगी तो कहां रहेंगी। कल एक बेटी के साथ छेड़खानी हुई और एक बड़बोले और बौड़म कुलपति के चलते छात्राओं को ही छात्रावास में कैद कर दिया गया। छात्राओं ने विरोध शुरू किया तो दबाने के लिए दंगा निपटाने वाले जवानों को आगे कर दिया गया। आप सोच कर देखे कि आपकी बहन-बेटी घर से दूर छात्रावास में रह रही हो और कोई लंपट उसके साथ छेड़खानी करे तो किससे कार्रवाई की अपेक्षा रखेंगे। साफ है विश्विद्यालय प्रशासन से और जब प्रशासन ही इन बेटियों की आवाज दबाने में जुट जाए तो कौन खड़ा होगा?

बीएचयू में प्रदर्शन करती छात्राएं

पहले एंटी रोमियो स्क्वायड से किया परेशान

प्रदेश की यह सरकार जब सत्ता में आई थी तो एक एंटी रोमियो स्क्वायड बना कर पुलिस वालों को एक साथ जा रहे लड़की और लड़के को प्रताड़ित करने का हथियार दे दिया गया था। भाई बहन तक थाने में बैठाए गए तो पति-पत्नी तक को नहीं छोड़ा। जब एकाध अफसर नेता के परिजन भी फंसे तो यह कवायद बंद हो गई। किसी भी जिले में चले जाएं अगर किसी लड़की महिला से छेड़खानी या बलात्कार का कोई मामला आएगा तो पहला प्रयास यह होगा कि लड़की वाले को थाने से ही बिना शिकायत लिखे भगा दिया जाए। और बलात्कारी बड़े घर का हुआ तो पैसे लेकर मामला रफा-दफा कर दिया जाए। यह पुलिसिया चरित्र है। यह कोई योगी सरकार में नहीं बना सभी सरकार में रहा। पर यह तो संस्कार वाली सरकार है, कुछ तो नई पहल करे कि लड़की सुरक्षित रहे। और जब कोई घटना घटे तो जल्द से जल्द और प्रभावी कार्यवाई हो। क्या यह बेहतर नहीं होता कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कम से कम अपने निर्वाचन क्षेत्र में हुई इस घटना की जानकारी लेकर खुद कोई पहल करते। इससे उनका कद ही बढ़ता। विश्वविद्यालय से लेकर जिला प्रशासन तक तो जिस लीपापोती में लगा हुआ है उससे लोगों का आक्रोश बढ़ रहा है।

प्रदेश के सारे विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक तानाशाही

यह सिर्फ बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का मामला नहीं है। लखनऊ विश्वविद्यालय से लेकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय तक में छात्राओं को किस तरह दबाया जा रहा है। लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रा पूजा शुक्ल को जेल भेज दिया गया और बडबोला प्राक्टर इस बहाने दूसरों को धमकाने में जुट गया। इलाहाबाद में ऋचा सिंह को किस तरह प्रताड़ित किया गया यह सभी ने देखा है। क्या इस सबसे यह छात्राएं दब जाएंगी। यह संभव नहीं है। हम लोग आंदोलन में रहे हैं, देखा है छात्रों को दबाकर कोई प्रशासन जीत नहीं पाता। लाठी गोली के बाद जेल भी छात्र जाते रहे और लड़ते रहे। इसलिए सरकार इन बेटियों से युद्ध न करे, संवाद करे। एक परिसर में माहौल खराब हुआ तो दूसरा भी नहीं बचेगा ।










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