अर्जुन, शक्ति, सिद्धार्थ और तुषार होंगे कांग्रेस मार्गदर्शक मंडल में शामिल!

आड़ा-तिरछा , अहमदाबाद , बृहस्पतिवार , 28-12-2017


congress-margdarshak-mandal-arjun-tushar-sidhartha

बसंत रावत

इसे नरेंद्र मोदी की विलक्षण प्रतिभा का असर कहें या उनके मॉडल की फूहड़ नक़ल, गुजरात कांग्रेस  ने भी प्रधानसेवक की राह पर चलते हुए चार  दिग्गज नेताओं  को उनकी मर्ज़ी  के खिलाफ मार्गदर्शक मंडल में धकेलेने का  फ़ैसला किया है।

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक़ मोदी जी ने जिस तरह अपनी पार्टी  के तमाम  सीनियर नेताओं को रास्ते का कांटा समझ कर  भाजपा के  बहुचर्चित मार्गदर्शक मंडल की लाचार शोभा मंडली  में स्थान ग्रहण करने के लिए मजबूर किया। अब गुजरात में कांग्रेस ने भी हाल में संपन्न विधान सभा चुनाव में धूल चाटने वाले अर्जुन मोडवाडिया, शक्तिसिंह गोहिल, सिद्धार्थ पटेल और तुषार चौधरी समेत चारों बड़े  नेताओं को कांग्रेस के  मार्ग दर्शक मंडल में शामिल करने का फ़ैसला किया है।

इस क्रान्तिकारी  फ़ैसले  को जहां एक ओर पार्टी  ने पार्टी के हित में ज़रूरी नवसृजनात्मक क़दम बताया, वहीं इन नेताओं के अनाथ समर्थकों ने  इस फ़ैसले की घोर निंदा की है। उन लोगों  इसे  नेताओं के विरुद्ध  षड्यन्त्र करार दिया है । अपनी नाराज़गी को ये छिपा भी नहीं पा रहे हैं। यहां तक कि इन नेताओं के समर्थकों ने जल्द ही एक अलग 'हताश पार्टी' का गठन करने की धमकी दे डाली है ।

क्योंकि इनका साफ़ तौर पर मानना है कि मोदी के  कुटिल राजनैतिक मॉडल  का अनुकरण करना  132 साल पुरानी कांग्रेस को  शोभा नहीं देता। चुनाव में  हारने की इतनी अपमानजनक  सज़ा किसी को  नहीं दी जानी चाहिए। उनका कहना है कि जनता कभी माफ़ नहीं करेगी।

वहीं दूसरी ओर पार्टी  ने इस क़दम के  अनगिनत फ़ायदे गिनाये हैं। पहला फ़ायदा, इससे कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलों के बीच असंतुष्ट नेताओं की आवाजाही और सुगम  होगी।  इससे दोनों  खेमों  के नेताओं को दोनों दल अपने लगने लगेंगे। इधर-उधर जाना घर वापसी जैसा एहसास दिलाएगा।  भाईचारा बढ़ेगा, खटास कम होगी। प्रधान सेवक नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए समरसता के मंत्र का इन दोनों दलो में  संचार होगा।

फ़िलहाल ये चारों दुःखी नेता, जिन पर जनता की कृपा नहीं बरसी, कांग्रेस के संभावित मुख्यमंत्री थे। अभी ये चारों नेता  गहरे सदमे में बताए जाते हैं।  यहां तक कि शक्तिसिंह गोहिल  ने श्मशान वैराग्य से ग्रसित  होकर  ऐलान तक कर  डाला  कि वो अब फिलहाल कोई चुनाव नहीं लड़ने वाले हैं। हालांकि उन्होंने ये साफ़ नहीं किया कि आगामी राज्यसभा की दो सीट जो खाली हो रही हैं उनके लिए उमीदवार  होंगे कि नहीं।

उधर पार्टी के पूर्व अध्यक्ष अर्जुन  मोडवाडिया पार्टी के फ़ैसले के ख़िलाफ़ जाकर ऐलान कर दिया है कि फ़िलहाल उनका  सन्यास लेने का कोई इरादा नहीं है। उनके  बयान से बग़ावत की बू आती है। उनका कहना है कि वो राजनीति में   लंबी पारी खेलने वाले हैं।  यह पूछे जाने पर कि अगर  कोई नेता मार्गदर्शक मंडल में शामिल नही होना चाहता हो तो पार्टी क्या ऐक्शन लेगी, पार्टी के प्रवक्ता फेंकूमल ने  बताया कि ऐसा कुछ नहीं होगा। जो होना है वही होगा। राजनीति कहीं  भी  रह कर की जा सकती है। मार्गदर्शक मंडल असल  में राजनीति का अखाड़ा बनेगा। हारे हुए नेताओं का अखाड़ा। वहां वे सक्रिय  राजनीति कर  सकते हैं। 

पूर्व मुख्यमंत्री चिमन भाई पटेल के सुपुत्र सिद्धार्थ पटेल और पूर्व मुख्यमंत्री अमर सिंह चौधरी के क़ाबिल पुत्र और पूर्व केंद्रीय मंत्री तुषार चौधरी ने हारने के बाद अभी तक मुंह नहीं खोला है।  इससे ये अनुमान लगा पाना मुश्किल है कि ये महारथी कितने सदमे में हैं। इनके क़रीबी चेलों ने फेंकू न्यूज़ संवादाता को बताया कि ये दोनों नेता अमेरिका और होनूलूलू की  धार्मिक यात्रा पर निकालने वाले  हैं। 

सूत्रों का कहना है कि ये चारों परास्त महायोद्धा  फ़िलहाल इस बात से ख़ुश हैं कि इनके प्रबल प्रतिद्वंद्वियों को भी इन्हीं के जैसा हार का मुंह देखना पड़ा है। ये अपने आप में बड़े संतोष की बात है। अब ये न चाह कर भी मार्गदर्शक मंडल में साथ होंगे  और अब ये अपने ज्ञान की कृपा बिखेरेंगे। कांग्रेस के  नव निर्वाचित विधायकों पर। उनका मार्ग दर्शन करेंगे। चुनाव के   मैदान में धूल चाटने के बाद ये नेतागण  राजनीति के  आसान में उभरे नए  नेताओं को अपने अनुभव का  लाभ देंगे। ये बताएंगे कि हार को कैसे जश्न में बदला जा सकता है। बताएंगे कि कोई भी  हार  मुकम्मिल  तौर पर   हार नहीं होती। हारने पर भी जीतने  जैसा फील  कर सकते  हैं। 

दरअसल पिछले 22 सालों से कांग्रेसी यही फील करते रहे हैं। बिल्कुल स्थितिप्रज्ञ होकर। और वैसे भी, इनका मानना है कि हार  का अपना  आध्यातमिक सुख होता  है। सोलह कलाओं में ये भी एक कला समझो।  जो हारा उसी ने फील किया, जिया और जाना।

मार्गदर्शक मंडल में जान डालने की खातिर बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल के साथ भी टाई-अप  की संभावना पर  विचार किया जा रहा है। सूत्रों  के अनुसार, एक  साझा मसौदा तैयार करने की कोशिश हो रही है। अनंत सम्भावनाएं हैं। सभी लोग मार्गदर्शक मंडल के  इन चार धुरंधरों की ओर टकटकी लगा  कर देखने वाले  है -मार्ग दर्शन के लिए। अकेली कोंग्रेस ही नहीं। 

(बसंत रावत‘दि टेलीग्राफ’के अहमदाबाद ब्यूरो चीफ रहे हैं।) (नोट- ये हास्य-व्यंग्य है इसका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है।)


 










Leave your comment