मुख्यमंत्री की पत्नी गाएंगी तो पुलिस को टिकट तो बेचना ही पड़ेगा!

विवाद , मुंबई, बुधवार , 16-08-2017


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लोकमित्र गौतम

मुंबई। जब आप ये पंक्तियाँ पढ़ रहे होंगे उसके कुछ ही घंटों बाद महाराष्ट्र के औरंगाबाद शहर में 'पुलिस रजनी' कार्यक्रम की शुरुआत होगी। यह एक म्यूजिकल कार्यक्रम है, जिसमें देर रात तक सुर लहरी बिखरेगी। आप सोच रहे होंगे इसमें लिखे जाने की क्या बात है? वह बात है यह कि इस कार्यक्रम में सुर लहरी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस की पत्नी अमृता फडनवीस बिखेरेंगी।

51 हज़ार का एक टिकट

वैसे अमृता प्रशिक्षित क्लासिकल सिंगर हैं और प्रोफेशनली भी गाती हैं। बॉलीवुड में प्रकाश झा की फिल्म जय गंगाजल सहित वह कुछ मराठी फिल्मों के लिए भी गा चुकी हैं और उनका एक एल्बम ‘फिर तुम’ भी आ चुका है, जिसमें उनके साथ बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन डांस करते दिखते हैं। कहने का मतलब अमृता गाने की काबिलियत रखती हैं। फिर भी अगर इन पंक्तियों के लिखे जाने के समय यह कार्यक्रम महाराष्ट्र के सियासी गलियारे में गर्म मुद्दा बना हुआ है तो इसलिए क्योंकि इस कंसर्ट की एक टिकट 51,000 रुपये की है और कार्यक्रम की 400 टिकटें बिकनी हैं, जिन्हें बेचने का जिम्मा पुलिसवालों पर डाल दिया गया है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस और उनकी पत्नी अमृता फडनवीस। फाइल फोटो : साभार

पुलिस पर टिकट बेचने की ज़िम्मेदारी

वास्तव में इसी बात को लेकर यह सियासी गर्मागर्मी है। यह बात शायद आम जनता तक न पहुँचती लेकिन औरंगाबाद के जिन 15 पुलिस थानों के पुलिसवालों पर इन टिकटों के बेचने की जिम्मेदारी डाली गयी, उनमें से कुछ कांस्टेबल स्तर के भी पुलिसवाले हैं। हो सकता है हेड बॉस ने सिर्फ थाना इन्चार्जों और सीनियर इंस्पेक्टरों तक ही यह जिम्मेदारी सौंपी हो लेकिन इंस्पेक्टरों ने आगे अपने मातहत हवलदारों और कांस्टेबलों तक इस जिम्मेदारी को विस्तारित कर दिया हो।

ऐसी ही जिम्मेदारी से लदे एक कांस्टेबल ने अपना यह दुखड़ा घर में रोया और उसके भतीजे ने इसे फेसबुक पर शेयर कर दिया। फिर क्या था देखते ही देखते मुद्दा गरमा गया। इस कार्यक्रम का आयोजन भी जिन पूर्व मंत्री कमल किशोर कदम की संस्था महात्मा गांधी मिशन और औरंगाबाद शहर पुलिस मिलकर कर रही है, उसका भी राजनीतिक रसूख हंगामे की बुनियाद तैयार करता है।

दरसल इस पूरे हंगामे का एक सामाजिक संकट ये है कि महात्मा गांधी के नाम वाली इस संस्था का इतना महंगा टिकट गांधीवादी तो नहीं ही खरीदेंगे बल्कि वही खरीदेंगे जो गांधीवाद से घृणा करते हैं। अजंता और एलोरा की गुफाओं व उच्च शिक्षा के बाजार के रूप में मशहूर यह शहर बदनाम होटलों का भी शहर है। यहाँ होटल मालिकों की लॉबी बहुत मजबूत है।

कौन खरीदेगा इतने महंगे टिकट?

दरअसल शैक्षिक बाजार और मशहूर पर्यटन स्थल होने के नाते यहाँ हर दिन बहुत बड़ी तादाद में पर्यटक, छात्र और उनके माँ-बाप आते हैं। अंडरवर्ल्ड का भी इस शहर में ख़ासा दबदबा रहा है। खासकर डी. कंपनी का यहाँ बड़े पैमाने पर छिपा कारोबार रहा है और आज भी है। एक समय में पूरा महाराष्ट्र कई किस्म के जुए का घर बन गया था उसमें मटका सबसे ख़ास था और पूरे महाराष्ट्र का मटका माफिया औरंगाबाद से इस खेल को कंट्रोल करता था। हवाला का भी यहाँ गढ़ रहा है और बताने वाले बताते हैं कि आज भी है। औरंगाबाद का यह विस्तृत विवरण इसलिए कि समझा जा सके कि 51,000 रूपये वाली टिकटें कौन खरीदेगा या पुलिस वाले बेचेंगे तो भला किसको बेचेंगे?

इस शहर में आयोजित ऐसे ही कार्यक्रम में अमृता गायेंगी। वह इस कार्यक्रम की 'गुडविल ऐंबैसडर’ भी हैं। हो सकता है यह मजाक हो लेकिन एक पुलिसवाले ने इस लेखक को नाम ना छपने की शर्त पर बताया कि औरंगाबाद में दर्जनों ऐसे बुकी हैं जिनमें एक ही ये सब टिकट खरीद सकता है, लेकिन शायद नौसिखिये हवलदारों को यह काम सौंप दिया गया हो जिन्होंने इसका भंडाफोड़ कर दिया।

विपक्ष हमलावर

कांग्रेस औरंगाबाद के पुलिस आयुक्त से इस मामले पर स्पष्टीकरण मांग रही है तो कई भाजपाई यह कहते नहीं थक रहे कि कांग्रेसी संस्कृति विरोधी हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव सचिन सावंत कहते हैं, ‘‘पुलिस आयुक्त को स्पष्ट करना चाहिए कि किसके आदेश पर पुलिस से टिकट बेचने के लिए कहा गया है। उनको स्पष्ट करना चाहिए कि क्या टिकट असामाजिक तत्वों को बेचा गया? अगर ऐसा हुआ है तो फिर इसके लिए कौन जिम्मेदार है? ’’

औरंगाबाद पुलिस मान रही है कि इस लाइव कंसर्ट का टिकट बेचने के लिए 15 थानों के अधिकारियों को कहा गया है, लेकिन वह यह मानने को तैयार नहीं है कि यह टिकट किसी असमाजिक तत्व के हाथ भी पंहुच सकता है। लेकिन सवाल है कि क्या आम लोग 51,000 की टिकट खरीदकर अमृता को सुनने आयेंगे?

एक तांत्रिक द्वारा 'हवा में से निकाले गए हार’ को पहनने को लेकर भी विवाद रहा। फोटो : साभार

'चमत्कार का हार' भी बना विवाद

आम लोगों के दुख-दर्द से अमृता कितना वास्ता रखती हैं इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब अंधविश्वास निर्मूलन समिति प्रदेश भर में अंधविश्वास का खात्मा करने के लिए तमाम कार्यक्रम कर रही है उसी बीच में पिछले दिनों अमृता ने एक तांत्रिक द्वारा 'हवा में से निकाले गए हार’ को पुणे में सार्वजनिक रूप से पहना। यह सब एक शिक्षण संस्थान द्वारा आयोजित पुरस्कार समारोह में हुआ, जबकि जिस तांत्रिक गुरवानंद स्वामी ने अमृता को हवा से बनाकर गले का हार पहनाया उस पर महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष अविनाश पाटिल ने कहा कि ‘अगर तांत्रिक वैज्ञानिक रूप से हमारे द्वारा तय नियंत्रित स्थितियों में अपना चमत्कार करके दिखा दें तो हम उन्हें इनाम के तौर पर 21 लाख रुपये देने को तैयार हैं। खुद पेशे से बैंकर अमृता कहती हैं कि वह चमत्कारों में विश्वास नहीं रखतीं। 

उनके मुताबिक़ मैंने एक बुजुर्ग व्यक्ति के तौरपर उन्हें सम्मान देने के लिए अभिवादन किया। मैं इन्हीं संस्कारों के साथ पली-बढ़ी हूं और मैं इन्हें अमल में लाती रहूंगी।अमृता ने कहा, ‘गुरवानंद स्वामी ने मुझे आशीर्वाद के तौर पर हार दिया। मैं किसी तरह के चमत्कार में विश्वास नहीं करती। लेकिन उनके इस प्रसादी ग्रहण करने से अंधविश्वास तथा काला जादू पर नये सिरे से बहस शुरू हो गयी है। गौरतलब है कि अंधविश्वास विरोधी कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के बाद महाराष्ट्र में कानून के माध्यम से अंधविश्वास पर प्रतिबंध लगाया गया था। शायद अब इसी तरह मददकारी कार्यक्रम भी नए सिरे से विश्लेषित हों।










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