राखी बांधने वाली लड़कियों से ही जवानों ने की छेड़छाड़

कहां आ गए हम... , , बुधवार , 09-08-2017


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हिमांशु कुमार

छत्तीसगढ़ में एक ज़िला है दंतेवाड़ा,

वहां एक गाँव है पालनार,

पालनार में लड़कियों का एक स्कूल है,

इस स्कूल में हास्टल भी है,

करीब पांच सौ आदिवासी लडकियां वहां पढ़ती हैं,

पिछले सोमवार की बात है,

दंतेवाड़ा जिले के अपर कलेक्टर और कई अधिकारी इस स्कूल में गये,

इन लोगों ने यहां एक कार्यक्रम करने का प्लान बनाया था,

कार्यक्रम यह था कि इस स्कूल की लडकियां सीआरपीएफ के सिपाहियों को राखी बांधेंगी,

इन अधिकारियों द्वारा सोमवार इकत्तीस जुलाई को दिन में सीआरपीएफ के करीब सौ सिपाहियों को लड़कियों के स्कूल में भीतर ले जाया गया,

लड़कियों से कहा गया कि सीआरपीएफ के सिपाहियों को राखी बांधो,

पांच सौ लड़कियां सीआरपीएफ के सिपाहियों को राखी बांधनें लगीं,

अधिकारियों के आदेश पर इस कार्यक्रम की वीडियो बनाई जाने लगी,

सरकार यह दिखाना चाहती थी कि आदिवासी लड़कियां सीआरपीएफ वालों को अपना रक्षक समझती हैं,

यह कार्यक्रम रक्षा बंधन के दिन छत्तीसगढ़ के टीवी चैनलों पर दिखाया जाना था,

स्कूल में वीडियो बनाने का यह यह कार्यक्रम काफी देर तक चलता रहा,

कार्यक्रम के बीच में कुछ लड़कियां लघुशंका के लिहाज से शौचालय की तरफ गयीं,

पांच छह सीआरपीएफ के सिपाही भी चुपचाप लड़कियों के पीछे चले गए,

लड़कियों ने शौचालय के बाहर खड़े सीआरपीएफ के सिपाहियों का विरोध किया,

उन सीआरपीएफ के सिपाहियों ने लड़कियों को धमकाते हुए कहा कि हम तुम्हारी तलाशी लेने आये हैं,

तलाशी के नाम पर सीआरपीएफ  के सिपाहियों ने तीन लड़कियों के स्तन बुरी तरह मसले,

एक लड़की शौचालय के भीतर ही थी, तीन सिपाही भी शौचालय में घुस गए,

पन्द्रह मिनट तक तीनों सिपाही उस आदिवासी लड़की के साथ शौचालय के भीतर रहे,

बाहर खड़ी लड़कियों को दूसरे सिपाही डरा कर चुप करवा कर पकड़े रहे,

इसके बाद लड़कियां अपने कमरे में चली गयीं और सीआरपीएफ वाले अपने दल में शामिल हो गए,

कार्यक्रम पूरा होने के बाद सभी सिपाही और अधिकारी  स्कूल से बाहर चले गए,

लड़कियों ने अपने साथ हुए दुर्व्यवहार के बारे में रात को अपनी वार्डन द्रौपदी सिन्हा को बताया,

वार्डेन ने यह खबर एसपी और कलेक्टर तक पहुंचा दी,

अगले दिन कलेक्टर और एसपी पालनार पहुंचे,

लेकिन कलेक्टर और एसपी लड़कियों से मिलने स्कूल में नहीं आये,

बल्कि दोनों अधिकारियों ने सीआरपीएफ कैम्प में पीड़ित लड़कियों को बुलवाया,

हास्टल की वार्डन दो लड़कियों को लेकर सीआरपीएफ के कैम्प में गयी,

वहां कलेक्टर और एसपी ने दोनों पीड़ित लड़कियों को बुरी तरह धमकाया और किसी को इस घटना के बारे में बताने से मना कर दिया,

लेकिन पूरे पालनार गांव में यह खबर फ़ैल गयी,

सोनी सोरी को गांव वालों ने मदद के लिए बुलाया,

सोनी सोरी जब हास्टल में लड़कियों से मिलने गयीं तो उन्होंने एक आश्चर्यजनक दृश्य देखा,

हास्टल की वार्डन चौकीदार की तरह स्कूल के गेट पर ताला डाल कर बैठी हुई थीं,

गेट पर साथ में एक महिला पुलिस की सिपाही को भी नियुक्त किया गया था,

पुलिस और वार्डेन किसी भी सामाजिक कार्यकर्ता या पत्रकार को अंदर आने से रोकने के लिए गेट पर पहरा दे रहे थे,

छुट्टी होने के बाद जब गांव की लड़कियां अपने घर आयीं तो सोनी सोरी ने उनसे घटना के बारे में पूछा,

लड़कियों ने पूरी बात बता दी,

इस मामले में सरकार ने कई गलतियां की है,

लड़कियों के हास्टल के भीतर सीआरपीएफ के सिपाहियों का जाना गलत था,

लड़कियों ने जब अपने साथ हुए दुर्व्यवहार की शिकायत की तो कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को उस शिकायत की जांच करनी चाहिए थी,

लेकिन कलेक्टर और एसपी ने मामले की जांच करवाने के बजाय मामले को दबाया और पीड़ितों को धमकाया,

इस तरह तो एसपी और कलेक्टर भी इस यौन अपराध के सह आरोपी बन गए हैं,

बालकों के साथ यौन अपराध की यह घटना पोक्सो एक्ट में आती है,

इस एक्ट के तहत रिपोर्ट ना लिखने वाले अधिकारी को जेल में डालने का प्रावधान है,

मैं इस रिपोर्ट के द्वारा न्यायालय को इस अपराध की सूचना दे रहा हूं,

न्यायालय इसका संज्ञान ले और इस मामले की जांच का आदेश दे,

यदि सरकार चाहे तो मेरी इस रिपोर्ट की सत्यता को चुनौती दे,

और छत्तीसगढ़ सरकार मुझे गिरफ्तार कर अदालत में पेश करे,

मैं अदालत में सभी सबूत और गवाह पेश कर दूंगा,

(हिमांशु कुमार प्रसिद्ध गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता हैं और आजकल हिमाचल प्रदेश में रह रहे हैं।)










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