डेरा है या पंच सितारा रिजॉर्ट?

विवाद , नई दिल्ली , सोमवार , 04-09-2017


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प्रदीप सिंह

नई दिल्ली/चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा के अधिकांश डेरों को यदि फाइव स्टार होटल कहा जाय तो गलत नहीं होगा। डेरों में उपलब्ध सुख-सुविधाओं को देखने पर तो ऐसा ही आभास होता है। डेरों में प्रवेश करने के बाद आध्यात्मिक भाव कम जगता है,भौतिकता ज्यादा प्रखर होती है। आधुनिक सुख-सुविधाओं के प्रति आकर्षित होना कोई बुरा नहीं है। लेकिन सब कुछ छोड़ कर धर्म की राह के यात्री बनने वालों का  सुख-सुविधाओं के प्रति समर्पित होना कितना सही है़? पंजाब के डेरों को देखकर अमेरिका की एक शोधार्थी ने कहा कि ये डेरे तो पंच सितारा होटलों को टक्कर दे रहे हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या डेरे धर्म की राह और समाज के प्रति अपने दायित्व छोड़ कर धन उपार्जन में लगे हैं। हर धर्म में गृहस्थ लोगों को संयमित और सन्यासी की तरह रहने का उपदेश दिया जाता है। जरूरत भर का धन कमाना हर धर्म में उचित माना गया है। लेकिन अब तो घर-परिवार वाले कम डेरे,मठ और मंदिरों के पुजारियों के पास ज्यादा संपत्ति देखी जा रही है। 

डेरा प्रोडक्ट का ही करते हैं उपयोग अनुयायी

पंजाब एवं हरियाणा के डेरों के पास केवल भव्य एवं आलीशान भवन ही नहीं हैं बल्कि कई डेरों की संपत्तियां हजारों करोड़ रुपये में है। कई डेरे तो अप्रत्यक्ष रूप से अपने भक्तों से व्यापार भी कर रहे हैं। ऐसे भक्त डेरों में बनने वाले प्रोडक्ट का ही उपयोग करते हैं। डेरों के पास सैकड़ों-हजारों एकड़ में कृषि जमीन और गौशाला भी है। जिस पर भक्त बिना मजदूरी के काम करते हैं। ऐसे भक्त ही डेरों की ताकत और दौलत हैं। फिलहाल पंजाब और हरियाणा के अधिकांश डेरों में स्वीमिंग पूल और घुड़सवारी से लेकर देशी-विदेशी नस्ल के कुत्ते, कारें और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। एक अध्ययन के मुताबिक सिर्फ बठिंडा जिले में डेरों के पास आठ हजार एकड़ से अधिक जमीन है।

राधा स्वामी सतसंग व्यास द्वारा संचालित छात्रावास

डेरा सच्चा सौदा के विभिन्न प्रोडक्ट 

पंजाब और हरियाण की राजनीति को गहरे प्रभावित करने वाला 'डेरा सच्चा सौदा' का मुख्यालय हालांकि हरियाणा के सिरसा जिले में है। लेकिन इसे किसी भी कीमत पर पंजाब के डेरों से अलग करके नहीं देखा जा सकता। इसका एक बड़ा केन्द्र पंजाब के बठिंडा जिले के सलाबतपुरा में है। बठिंडा ही नहीं पंजाब के संगरूर, मानसा, फिरोजपुर, पटियाला और फरीदकोट में डेरा भक्तों की संख्या लाखों में है। इस इलाके में डेरा सच्चा सौदा का कितना और कैसा प्रभाव है इसकी बानगी सिरसा के आसपास के किसी भी कस्बे या शहर में देखी जा सकती है। सच हेयर ड्रेसर, सच पेट्रोल पंप, सच डिपार्टमेन्टल स्टोर, सच पेड़-पौध नर्सरी आदि-आदि। आज डेरे की कई सौ एकड़ जमीन है। इसमें अत्यंत आधुनिक तरीकों से देशी-विदेशी सब्जियां, फलों और अनाजों की खेती की जाती है। डेरे की एक वातानुकूलित मार्केट भी है। डेरा 'सच कहूं' नाम का एक  दैनिक अखबार भी निकालता है। हमदर्द के शीतल पेय रूहअफ्जा की तर्ज पर रूहानी आफ्जा बनाता है। डेरे के भक्तों को इसका जाम भी पिलाया जाता है। इसे जाम-ए-इन्सां भी कहते हैं। यह हर डेरा भक्त को पीना पड़ता है। डेरे के लोग बाजार से रूहआफ्जा की बजाए रूहानी आफ्जा खरीदते हैं। 

सच बिस्कुट और सच नाम के दर्जनों दिन-प्रतिदिन उपयोग में आने वाले उत्पाद यहां डेरा प्रेमियों के लिए सर्वाधिक प्रिय हैं।  

 राधा स्वामी सतसंग व्यास द्वारा संचालित स्कूल

नूर महल का दिव्य ज्योति संस्थान 

बिहार से आए आशुतोष महराज ने पंजाब के नूरमहल में 'दिव्य ज्योति संस्थान' के नाम से डेरा स्थापित किया। आज इस डेरे के पास अथाह संपत्ति और लाखों भक्त हैं। दिव्य ज्योति संस्थान के एक कारिंदे राजेश कहते हैं, हमारे पास बड़ी संख्या में विदेशी भक्त और मेहमान आते हैं। ऐसे में उन्हें अच्छा रहन-सहन उनलब्ध कराना हमारा धर्म है।  यह डेरा लगभग पांच सौ एकड़ में स्थित है। हरियाणा के सिरसा का सच्चा सौदा डेरा लगभग सात सौ एकड़ में फैला है। डेरे के अंदर एक वातानुकूलित मार्केट है। 

देश -विदेश के नेता,पूंजीपति और आम भक्त इन्हें चंदा देते हैं। सरकार से भी इनके शिविरों और परियोजनाओं के नाम पर मोटा अनुदान मिलता है। अनुदान की इसी प्रक्रिया में डेरा और राजनेताओं के बीच करीबी पनपती है। राजनेताओं द्वारा दिए गए चंदा के एवज में डेरे उनको चुनाव के समय वोट दिलवाने में मदद करते हैं।

प्रत्यक्ष तौर पर राजनीति से अपना संबंध नकारने वाले ऐसे डेरे स्थापित पुरानी परंपराओं से भी दूर हो रहे हैं। डेरों के कृषि फॉर्म में अब भक्तों से मुफ्त में काम तो लिया जाता है। दरअसल, राजनीति के बदले स्वरूप में  गरीबों और कमजोरों के लिए जगह नहीं बची है। गरीबों,अशिक्षितों और रोगियों की सेवा करने और मदद करने की कौन कहे शासन-सत्ता से उन्हें उपेक्षा ही मिलती है। ऐसे में गरीब डेरा, मिशनरी और धर्म की तरफ आशा भरी निगाहों से देखते हैं। अब कई संगठन गरीबों और कमजोरों का भयादोहन करके उनसे लाभ लेने में लगे हैं। कुछ डेरे  गरीबी का लाभ उठा रहे हैं तो कुछ उनका नशा छुड़ाने के नाम पर अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहे हैं। 

डेरों में भक्त मोटा दान करते हैं। कई डेरे काला धन को सफेद करने का काम भी करते हैं। दान में मिली राशि से दोगुना और कई बार चार गुना रसीद देना इनके लिए मामूली बात है। अधिकांश डेरों के पास विदेशों से खूब धन आता है। इन डेरों के पास भारी संख्या में लाइसेंसी और अवैध हथियार भी हैं। डेरों के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई में इन हथियारों का खुला इस्तेमाल होता है।

 

 










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