कहानी इंग्लैंड के पवित्र एनआरआई सांड़ शंभू की

आड़ा-तिरछा , , रविवार , 12-08-2018


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वीना

बीबीसी हिंदी में एक ख़बर छपी है। क्या होगा जब साहेब को पता चलेगा कि गाय माताओं के पिता-पति-बेटे-भाई एनआरआई शंभू सांड़ को इंग्लैंड में 2007 में क़त्ल कर दिया गया!

नीली आंखों वाला, चमकदार काले रंग का तंदुरुस्त शंभू सांड़ भारत से पार्सल हुआ एनआरआई सांड़ था? भारतीय बीज से वहीं पैदा हुआ जनम से अंग्रेज़ सांड़? या कि अंग्रेज़ी बीज से ही पैदा हुआ शुद्ध अंग्रेज़ी सांड था और  उसका सिर्फ़ नाम ‘‘शंभू’’ था क्योंकि वो स्वामी सुरैयानंद की निगरानी में पाला-पोसा जा रहा था इसका ख़ुलासा ख़बर में नहीं किया गया है।

बात 2007 की है। ब्रिटेन के स्कंद वेल आश्रम में स्वामी सुरैयानंद की छत्रछाया में पल रहे गाय-बैल जानवरों में से एक था शंभू सांड़। जाने किसकी नज़र लगी कि शंभू उन दिनों छूत से फैलने वाली टीबी का शिकार हो गया। ब्रिटेन की हुकूमत का आदेश था कि जिस भी जानवर को टीबी हो जाए उसके प्राण न बख्शे जाएं। बहुत से जानवर अब तक टीबी के चलते कसाई खाने पहुंचाए जा चुके थे।

लेकिन जब शंभू की बारी आई तो हिंदू भड़क उठे। स्वामी सुरैयानंद ने उन्हें बताया कि हिंदू मान्यताओं के मुताबिक जानवरों में भी भगवान बसते हैं। तभी उनके नाम भगवान के नाम पर रखे जाते हैं। शंभू शिव का नाम है। इसका मतलब है पवित्र हंस।

यहां मेरे जे़हन में एक ख़्याल आया है। क्या नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (एनआरसी) में उनका नाम बिना शर्त शामिल कर लिया जाएगा जिनका नाम शंभू होगा या रख लिया जाएगा? क्या शिव का नाम होने पर विशेष सुविधाओं के हक़दार केवल जानवर ही हैं या मनुष्य भी इसका लाभ उठा सकते हैं? भले ही वो किसी भी जाति-धर्म, देश के हों। ब्रिटेन के शंभू सांड़ की तरह।

बहरहाल, आगे चलते हैं। शंभू का कत्ल हिंदू आस्था का कत्ल बन गया। शंभू सांड़ रातों-रात सबका चहेता ‘‘हीरो’’ बना दिया गया। शंभू के हक़ में लड़ने वाले पूछ रहे थे कि जब हमारे किसी परिजन या रिश्तेदार को टीबी हो जाती है तो क्या हम उन्हें मार देते हैं? स्वामी सुरैयानंद ने बताया कि शंभू को बचाना हमारी नैतिक ज़िम्मेदारी है।

बस फिर क्या था, हिंदू टूट पड़े शंभू को बचाने। हस्ताक्षर अभियान चला, चंदा इकट्ठा कर केस लड़ा गया। शंभू के ठाट-बाट बढ़ा दिए गए। हिंदू आस्था से प्रभावित हो सेशन कोर्ट ने शंभू के प्राण बख्श दिए। पर हाईकोर्ट ने बाकी स्थानीय जानवरों की रक्षा का हवाला देते हुए आखि़र शंभू को मौत की सज़ा सुना ही दी।

अब... स्वामी ने मंदिर के बाहर बोर्ड लगा दिया-“पवित्र सांड़ शंभू का मंदिर” और स्कंद वेल ने शंभू की पूजा-अर्चना का लाइव वेबकास्ट करना शुरू कर दिया। लाखों लोगों को शंभू से महोब्बत हो गई। और “पवित्र” सांड़ शंभू की शोहरत दसों दिशाओं में फैल गई।

तब क्या शंभू की जान बख्श दी गई?  शंभू की जान बचाने को नैतिक ज़िम्मेदारी बताने वाले स्वामी सुरैयानंद ने जाने क्यों उस वक़्त अपने को पुलिस के हवाले कर दिया जब अंग्रेज़ पुलिस ने स्वामी से कहा कि रास्ते से हट जाओ हम शंभू को लेने आए हैं। जो भक्तगण शंभू को बचाने के लिए डटे खड़े थे स्वामी जी के पीछे हटते ही सब शांत हो गए और पवित्र शंभू सांड़ बेचारा चुपचाप किसी संत की तरह फूलमालाएं पहने हुए कत़्लखाने को जाने वाले ट्रक में चढ़ गया।

आखि़र स्वामी जी फिरंगी पुलिस के एक बार कहने पर पीछे क्यों हट गए? और स्वामी जी के हटते ही सभी उग्र भक्तों की भक्ति सुप्त अवस्था मं  क्यों चली गई? क्या स्वामी जी को अंदाज़ा था कि फिरंगी पुलिस भारतीय पुलिस की तरह हिंदू-मुसलमान, शूद्र-आदिवासी देखकर कार्रवाई का पैमाना तय नहीं करती?

भारत में उत्तर प्रदेश, सहारनपुर के चंद्रशेखर आज़ाद रावण को सिर्फ इसलिए देशद्रोही बनाकर जेल में सड़ाया जा सकता है कि उसे अपने चमार होने पर गर्व क्यों है? क्यों वो बाक़ी शूद्र बालकों को पढ़ा-लिखाकर अपनी तरह बनाना चाहता है?

और किसी राजपूत को तब भी थाने में बिठाकर हलवा-पूरी खिलाई जा सकती है जबकि वो संविधान-कानून की ऐसी-तेसी कर दलित-अल्पसंख्यकों के घर-बार बर्बाद कर उनकी बहन-बेटियों का बलात्कार कर आया हो।

स्वामी जी को एहसास था कि वो भारत में नहीं इंग्लैंड में हैं। ज़रा सी ग़लती और उम्र भर जेल की चारदीवारी। स्वामी जी के समझते ही बाक़ी आस्था भक्त भी औक़ात में आ गए।

‘शंभू बचाओ’ मंथन से निकला संपत्ति-ख्याति का अमृत कमंडल में सुरक्षित रहे बाक़ी स्वामी जी को और क्या चाहिये!

शंभू जो पहले स्वामी जी के काम आया अब साहेब की नैया पार लगा सकता है। आखि़र पवित्र सांड़ शंभू को कांग्रेस ने क़त्ल कैसे हो जाने दिया! 2019 के चुनाव प्रचार में साहेब पवित्र शंभू सांड़ (परम हंस) की शहादत को ज़ाया नहीं होने देंगे।

मोदी जी पूछेंगे कांग्रेस से कि आखि़र क्यों कांग्रेस सरकार ने आदरणीय पवित्र शंभू सांड़ जी को प्राइवेट जेट भेजकर हिंदुस्तान नहीं मंगवा लिया। अगर कांग्रेस ये काम कर देती तो आज संत शंभू सांड़ जी हमारे बीच मौजूद होते।

भाईयों और बहनों, ये बेरोज़गारी, जीएसटी, नोटबंदी का फ़ेल हो जाना, हमारी सरकार में नित नए घोटाले निकल आना, महिलाओं-बच्चियों से बलात्कार, दलित-आदिवासी, अल्पसंख्यकों की हत्याएं, किसानों की बदहाली-फांसी का कारण कांग्रेस का विधर्मी आचरण है। ये आदरणीय शंभू सांड़ का ही श्राप है कि विजय माल्या, नीरव मोदी और भाई मेहुल चौकसी देश के हज़ारों करोड़ लेकर हमारी नाक के नीचे से भाग गए।

हालांकि हमारी गौ माताएं हमारे साथ हैं। पर आप क्या समझते हैं, गौ माताओं को नहीं पता कि उनके वंश के पवित्र शंभू सांड जी को असमय प्राण त्यागने पड़े! केवल और केवल कांग्रेस सरकार की लापरवाही की वजह से। मैं ताल ठोक कर कह सकता हूं अगर  कांग्रेस शंभू जी की उपेक्षा न करती तो आज शंभू जी के आर्शिवाद से हमारी सारी योजनाएं सफल होती। हमारे नेता- अफ़सर-उद्योगपति मित्र जितना चाहे सरकारी धन हड़प जाते, पर ख़जाना खाली न होता। शंभू जी शिव भगवान को सिफ़ारिश कर धन वर्षा करवाते रहते। पैसा पानी की तरह बहता, मित्रों पानी की तरह। पर अफ़सोस! शंभू जी वीरगति को प्राप्त हुए। और हम कंगले रह गए!

फिरंगी हमारे शंभू जी को जिस ट्रक में चढ़ा कर बलि के लिए ले गए  उसमें कम से कम कालीन ही बिछवा देते। शंभू जी कि अस्थियों को भारत ले आते। पर नहीं, इस निकम्मी सरकार ने कुछ नहीं किया। नतीजा आपके सामने है।

मित्रों, 27 जुलाई 2007 को शंभू जी ने विदेशी धरती पर अपने प्राणों की आहुति दी। आप भूल-चूक लेनी-देनी माफ़ करके 2019 में फिर हमें छप्पर फाड़ वोट दीजिये। मैं आपको यक़ीन दिलाता हूं कि 27 जुलाई को मैं, “अंतर्राष्ट्रीय पवित्र शंभू सांड़ दिवस” घोषित करवाऊंगा। और...शंभू जी की आस्थियों को आदर सहित अपने साथ विमान में बिठा कर भारत लाऊंगा। यहां इस धरती पर शंभू जी की समाधि बनवाऊंगा मित्रों, यहां इस धरती पर... ताकि कांग्रेस के दोष को भूलकर शंभू जी हमें अपने श्राप से मुक्त कर दें। शंभू जी की समाधि बननी चाहिये की नहीं...बननी चाहिये की नहीं....बोलो जय शंभू सांड़ की...।

(वीना फिल्मकार, पत्रकार और व्यंग्यकार हैं।)

 

 










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