गुजरात: बाढ़ के बाद बीमारी का खतरा

राहत-बचाव , बनासकांंठा/अहमदाबाद, बुधवार , 02-08-2017


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कलीम सिद्दीकी

नासकांठा/अहमदाबाद। गुजरात और राजस्थान में आई बाढ़ ने उत्तर गुजरात में भारी तबाही मचा दी है। बारिश रुकने के बाद पानी तो उतर गया लेकिन कीचड़ बड़ी समस्या बना हुआ है। जो उत्तर गुजरात पानी-पानी था अब वहां पीने, नहाने और धोने के पानी की समस्या खड़ी हो गई है। हालांकि हिंदू-मुस्लिम संगठन मिलकर राहत के काम में जुट गए हैं।

राहत के काम में जुटे संगठन।

राहत कार्य में जमीअत के लोग

राहत कार्य में लगे जमीअत उलेमा हिन्द के लोग सबसे पहले गांव के स्कूल, मंदिर या मस्जिद को साफ़ कर उसे रिलीफ कैंप में परिवर्तित कर दे रहे हैं। उसके बाद गांव वालों के साथ मिलकर पूरे गांव से कीचड़ निकाल कर घर मोहल्ले को रहने जैसा बनाते हैं। जमीअत पीड़ितों को किट दे रही है जिसमें गैस सिगड़ी, कुकर, पतेली,प्लेट 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, तीन प्रकार की दाल,शक्कर,कपड़े इत्यादि हैं। इससे एक परिवार अगले 15 दिनों तक अपना जीवन गुजार सकता है।

जमीअत उलेमा हिन्द (अरशद) के मुफ़्ती अब्दुल कय्यूम मंसूरी ने जनचौक को बताया कि हमें इस प्रकार की खिदमत का तजुर्बा है हम लोगों ने 2001 में 6 महीने लगातार कच्छ, भुज में भूकंप के समय काम किया था। 2002 के दंगे के समय भी काम किया था। हम लोग अभी धनेरा में काम कर रहे हैं हमारी एक टीम राधनपुर और थराड़ के इलाकों में नुकसान का सर्वे कर रही है। कल या परसों हम लोग राधनपुर और थराडट के लिए निकल जाएंगे वहां से जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक उन इलाकों की हालत ज्यादा खराब है। ये दूर दराज़ के इलाके हैं जहां सोशल मीडिया और मीडिया की नज़र नहीं पहुंच पा रहा है लिहाजा ये मदद से भी महरूम रह जा रहे हैं।

राहत के काम में जुटे संगठन।

लोगों ने भी काम की तारीफ

धनेरा के लाला भाई ठाकोर ने बताया कि दाढ़ी वालों का काम अच्छा है इन लोगों ने अपने हाथ से मंदिरों की भी सफाई कर रहे हैं। किट को भी नात जाति जाने बिना दे रहे हैं। आल इंडिया मिल्ली काउंसिल के गुजरात अध्यक्ष मुफ़्ती रिजवान तारापुरी ने फोन पर बताया कि इस समय हम लोग डीबी पारीख हाई स्कूल में हैं। हमारे साथ 40 से 50 लोग हैं जो सफाई का काम कर रहे हैं। मिल्ली काउंसिल की तरफ से लगभग 2000 लोगों की किट भेजी गयी है। जिसमें 10 दिनों का राशन भी है। तीन दिन पहले भी हम लोग 600 परिवारों के लिए किट लेकर आये थे जो बंट गई

जमाते इस्लामी हिन्द के इकबाल मिर्ज़ा ने बताया कि हमारी मेडिकल टीम गई हुई है सबसे अधिक हमारा फोकस स्वास्थ्य पर ही है। क्योंकि वर्तमान परिस्थिति से लग रहा है कि आने वाले दिनों में बीमारियां फ़ैल सकती हैं। इसलिए उससे लड़ने के लिए तैयार रहना होगा इसके अलावा एक टीम अधिकारियों से मिलकर लोगों की ज़मीनों, वाहनों, मकानों के साथ-साथ ज़रूरी डाक्यूमेंट्स जो बर्बाद हो गए हैं उन पर काम कर रही है

राहत का काम जारी।

जमाते इस्लामी हिन्द के अब्दुल कादर मेमन जो बनासकांठा में टीम के साथ हैं, ने बताया कि धनेरा को मीडिया ने अधिक दिखाया जिस कारण ज्यादातर संगठन इसी इलाके में गए जबकि म्याना, सातनपुर, माडिया, राधनपुर आदिल इलाकों में मदद नहीं पहुंच पा रही है। इसीलिए धनेरा में सिर्फ मेडिकल कैंप लगा कर उनकी एक टीम माडिया, मेयाना और एक टीम राधनपुर, सातनपुर रवाना कर दी गयी है। उनके मुताबिक जितनी तेज़ी से सरकार को काम करना चाहिए था वो नहीं कर पा रही है। मुस्लिम संगठनों के अलावा विश्व हिन्दू परिषद् के कार्यकर्ता भी राहत के काम में लगे हुए हैं।

हिंदू संगठन भी पीछे नहीं 

इसके अलावा हिंदू संगठनों ने भी बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुंचाने में अपनी पूरी ताकत लगा दी है। विश्व हिन्दू परिषद् के सुरेन्द्र सिंह राजपूत ने जनचौक को बताया कि परिषद् ने राहत कार्य के लिए पालनपुर को अपना केन्द्र बनाया है। अब तक उनका संगठन 170 गांवों तक राहत पहुंचा चुका है। राहत के तौर पर सूखे नाश्ते का पैकेट और 20 किलो राशन की किट भी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा 3600 फ़ूड पैकेट और किट बांटे जा चुके हैं। जबकि 20 हजार किट बंटने के लिए तैयार है। उसे भी जल्द ही बांट दिया जाएगा। इन सब के अलावा एक मेडिकल वैन जिसमें तीन डॉक्टरों की टीम है गांव-गांव घूम कर बीमार लोगों की जांच कर दवाएं बांट रही है।

जिग्नेश ने संभाली कमान

दलित नेता और राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के संयोजक जिग्नेश मेवानी ने जनचौक से बात-चीत में बताया कि राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच की टीम रिलीफ के काम में लगी हुई है। उनका कहना था कि वो लोग यहां राशन बर्तन और कपड़े लेकर आये हुए हैं। मेवानी भी यहां आ गए हैं। अगले एक महीने तक यहां रह कर टीम के साथ सर्वे करेंगे ताकि पते चले कि हानि कितने की हुई है। केंद्र ने 500 करोड़ का पैकेज दिया है जो बहुत ही कम है। नुकसान का अंदाज़ा हो जाने पर उनका संगठन सरकार पर दबाव बनाएगा। ताकि समय पर लोगों को कुछ राहत पहुंचाई जा सके। इसके अलावा उनकी कई डॉक्टरों से बात हुई है जो रविवार को बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों में मेडिकल कैंप लगाने के लिए राज़ी हैं।

धनेरा नगर पालिका के उपाध्यक्ष जगदीश ठक्कर ने बताया कि जिस प्रकार से प्राकृतिक आपदा धर्म देख कर नहीं आई थी उसी प्रकार से हिन्दू-मुस्लिम भी बिना धर्म जाति देखे सेवा का काम कर रहे हैं। धनेरा में 22 मंदिरों को मुस्लिम भाइयों ने साफ़ किया जिसमें 115 वर्ष पुराना गणेश मंदिर भी शामिल है। 3 मस्जिद भी हिन्दू भाइयों ने मुसलमानों के साथ मिलकर साफ़ किया है धनेरा की जनता इन सभी संगठनों की आभारी है।

राहत के काम में जुटे ठोकोर सेना के लोग।

अल्पेश का संगठन भी सक्रिय

अल्पेश ठाकोर की ठाकोर सेना की टीम भी बनासकांठा में बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों में काम कर रही है ठाकोर सेना के चाकाजी ठाकोर ने जनचौक को बताया कि प्राकृतिक आपदा के दूसरे ही दिन अल्पेश ठाकोर और मुकेश भरवाड़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर प्रभावित तहसील धनेरा, वाव,थराद, सुई गाम और राधनपुर में कंट्रोल रूम बनाकर ज़रूरी वस्तुएं को पीड़ितों तक जल्द से जल्द पहुंचाने का काम किया।

 

 

 










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