गेम ऑफ चुनाव और मुस्लिम आर्मी ऑफ द डैड

आड़ा-तिरछा , , सोमवार , 16-07-2018


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वीना

अंग्रेजी चैनल HBO पर एक सीरियल आता है जिसका नाम है ‘‘गेम ऑफ थ्रोन्स’’ यानि सिंहासनों का खेल। ये सेवेन किंग्डम पर कब्ज़ा जमाने के पैंतरों की काल्पनिक  कहानी है। एक मज़ेदार बात इसमें ये है कि सेवेन किंग्डम के ज़िन्दा दावेदारों के साथ-साथ मरे हुए भी इस सत्ता के खेल में शामिल हैं।  पूरे सीरीयल में ‘‘विंटर इज़ कमिंग’’ का ख़ौफ़ छाया रहता है। क्योंकि सर्दियों में ही ‘‘आर्मी ऑफ द डैड’’ (मरे हुओं की आर्मी) हमला करती है। और जिसका अकेले सामना करना किसी भी ज़िन्दा साम्राज्य के लिए संभव नहीं है। तो सब ज़िन्दा चालबाज़ एक-दूसरे की गर्दन उड़ाने की तमन्ना रखते हुए भी मजबूर हैं साथ आने के लिए ताकि पहले मरे हुओं को मारा जा जा सके। ‘‘गेम ऑफ थ्रोन्स’’ ब्रिटेन की धरती पर बुनी गई एक काल्पनिक कहानी है। पर भारत के एक महान ख़बरिया चैनल के महान एडिटर सुधीर चौधरी को आजकल लग रहा है कि भारत में ये काल्पनिक कहानी सच होती नज़र आ रही है। ‘‘मुस्लिम आर्मी ऑफ द डैड’’ के रूप में।अब आप ये कल्पना करके रोमांचित होइए कि आपको मरे हुए लोगों की आर्मी देखने का मौक़ा मिलने वाला है, आश्चर्यचकित होइए या रोइए। सुधीर चौधरी ने तो थूक निगल-निगल कर ‘‘आर्मी ऑफ द डैड’’ को आमंत्रित कर ही लिया है। जबसे मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के हवाले से ख़बर आई है कि सभी राज्यों में दारुल कज़ा की स्थापना होनी चाहिये। सुधीर को चैन नहीं। 

हिंदुस्तान को इस्लामिक स्टेट बनाने की साजिश क्यों?

क्या शरियत गै़र मुस्लिमों के लिए "काले पानी" वाला कानून है?

देश संविधान से चलेगा या फिर शरिया से?

शरिया आएगा...जज़िया लाएगा...

हिंदुस्तान को इस्लामिक स्टेट बनाने की साज़िश क्यों?

क्या शरीयत का कानून ग़ैर मुस्लिमों के लिए घातक है?

जैसे सवाल सुधीर ने जनता के सामने पटक दिए।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सिर्फ़ एक एनजीओ है जिसकी कोई क़ानूनी हैसियत नहीं है। सुधीर को लगता है कि बोर्ड का ये फै़सला इतनी ताक़त रखता है कि ये धर्मरिनपेक्ष संविधान वाले भारत को मुस्लिम राज्य में तब्दील कर देगा। क्या वाकई?

जानकारों का कहना है कि देश के उत्तर प्रदेश राज्य में पहले से ही 40 दारुल कज़ा मौजूद हैं। जो मुस्लिम समाज के सिविल मामलों को अपने धर्म के अनुसार सुलझाने की कोशिश करते हैं। जिसे मानना न मानना दोनों पक्षों पर निर्भर करता है। लोग कोर्ट के धक्के खाने से बच जाते हैं। और देश की संवैधानिक अदालतों को भी इससे राहत मिलती है। 

दारुल कज़ा से किसी हिंदू या अन्य धर्म के अनुयाइयों का कोई लेना-देना नहीं है। मुस्लिम धर्म को मानने वालों का ये एक तरह से निजी मामला है। जिसे भारत के संविधान की इजाज़त हासिल है।

फिर आखि़र सुधीर इतनी हाय-हाय क्यों कर रहे हैं? क्या जैसे ही हर राज्य में दारुल कज़ा खुलेंगे हिंदुस्तान पाकिस्तान बन जाएगा? सभी हिंदुओं को मुस्लिम कानून के मुताबिक चलना पड़ेगा? हिंदुओं की धार्मिक यात्राओं पर जज़िया कर लग जाएगा? जो दारुल कज़ा अब तक काम कर रहे हैं उनके रहते तो ऐसा कुछ न हुआ। देश की अधिकतर जनता को पता भी नहीं कि दारुल कज़ा असल में है क्या बला। 

वैसे ग़ौर करने वाली बात ये भी है कि मुल्सिम पर्सनल लॉ बोर्ड को हर राज्य में दारुल कज़ा खोलने का ये ख़्याल अभी क्यों आया?  कुछ साल पहले भी आ सकता था। या 2019 के इलेक्शन के बाद भी आ सकता था। खै़र,उन्हें ये ख़्याल ख़ुद आया या उन्होंने कहीं से आयात किया जो भी हो, ये ख़्याल ज़ी न्यूज़ के सुधीर चौधरी और अरनव गोस्वामी के हिंदी अनुवाद यानी न्यूज़ 18 इंडिया के अमीश देवगन की रातों की नींद हराम हो गई है। शायद ये दोनों ही गेम ऑफ थ्रोन्स के मैड वाले फैन हैं।  

अचानक पूरे देश के लिए  दारुल कज़ा ख़तरा कैसे बन गया?  कुछ तो माजरा है। हो सकता है संघ की अफवाह फैक्ट्री से 2019 के चुनाव के लिए तैयार किया गया आईडिया हवा खाने निकला हो और भटक कर सुधीर की ख़्वाबगाह में घुस गया हो। और सुबह जब सुधीर उठे तो उनके होश फ़ाक़्ता! उन्होंने तुरंत चैनल पहुंच कर देश के हिंदुओं को चेताया कि अगर और दारुल कज़ा खुले तो हिंदुओं की, उनके ‘‘हिंदुस्थान’’ की ख़ैर नहीं। सुधीर साहब कहते हैं -

“दार का मतलब घर और कज़ा मतलब फै़सला। पूरा अर्थ हुआ ‘फैसला देने का घर’। इसके मतलब से ऐसा लगता है कि अदालत और दारुल कज़ा एक ही है। क्योंकि अदालत भी तो फैसला देने का घर ही होती है।’’  

फिर इनसाइक्लोपीडिया का हवाला देते हुए फरमाते हैं कि ‘‘इस्लामिक कानून मुस्लिम समाज के लिए अल्लाह के आदेश की अभिव्यक्ति है।’’

आप समझ सकते हैं इस वक़्त सुधीर की मानसिक हालत कैसी है।  मान लीजिये दारुल कज़ा अगर भारत को इस्लामिक स्टेट बनाने का इरादा कर भी लें तो क्या ये संभव है,भारत की 125 करोड़ की आबादी में मुसलमानों की संख्या सिर्फ 15 करोड़ है।

तो फिर? तो फिर सुधीर ने अपनी अक़्ल के घोड़े दौड़ाए। और उनके दिमाग़ में गेम ऑफ थ्रोन्स की डैड मैन आर्मी की घंटी बजी - ‘‘हो न हो मुस्लिम पर्सनल लॅा बोर्ड ने ‘‘मुस्लिम आर्मी ऑफ द डैड” को बुला भेजा है। और सुधीर इस ख़्याल को इस हद तक सच समझ कर इतने ख़ौफ़ज़दा नज़र आ रहे थे कि प्रोग्राम करते-करते शायद उनकी पैंट गीली हो गई हो।  

इतिहास को नकारने वाले भी जानते हैं कि उनके मानने न मानने से इतिहास बदल नहीं जाता। और इतिहास ये है कि तुर्कों,  मुगलों, अफ़गानों ने तथाकथित हिंदू (बामणों,  क्षत्रियों) राजाओं के  छक्के छुड़ाकर उन्हें अपनी चाकरी में लगाया था। ज़्यादातर बिक गए। जिन्होंने मुक़ाबला करने की ठानी बर्बाद हुए या मारे गए। 

सुधीर ने सपने में देखा होगा कि वो अपनी नोटों की पोशाक पहने बचाओ-बचाओ चिल्लाते दौड़े जा रहे हैं संघ की लाठीधारी सेना की तरफ। और ‘‘मुस्लिम आर्मी ऑफ द डैड’’ में महमूद गजनवी, गौरी, बाबर आदि-आदि खुंखार लड़ाके अपनी-अपनी डैड आर्मी के साथ इनकी तरफ दौड़े आ रहे हैं। 

ये नज़ारा देखकर संघ सेना की पैंट खिसक गई, लाठी छूट गई। फिर संघ के सामने ‘‘वीर’’ सावरकर की तर्ज़ पर जान बचाने के लिए माफ़ीनामें के सिवा कुछ न रहा। सो संघ लमलेट। अब सुधीर क्या करे?  

चौधरी साहब बदहवास भागे जाते हैं...भागे जाते हैं... और डैड आर्मी के सिपाही ठहाका लगाते हुए उनके नोट वस्त्र हरण करते जाते हैं। और… एक वक़्त ऐसा आया जब शरीर पर कुछ न रहा… आखि़र डैड आर्मी में शामिल होने की नौबत आ गई..! और...ठीक यहीं, सुधीर की नींद टूट गई...

गेम ऑफ थ्रोन में ‘‘आर्मी ऑफ द डैड’’ के ख़ात्मे का इलाज ड्रैगन ग्लास और आग है। हमारे यहां इसका तोड़ हिंदू रक्षक ‘‘मोदी ग्लास’’ है। जिसे  2019 के “गेम ऑफ चुनाव” यज्ञ में वोट की आहुति देकर ही हासिल किया जा सकता है। फिर मोदी ग्लास दारुल कज़ा के इलाज के रूप में ‘‘यूनिफार्म सिविल कोड’’ का रक्षा कवच प्रदान करेंगे। और कम से कम अगले 4 सालों के लिए ‘‘मुल्सिम आर्मी ऑफ द डैड’’ को बोतल में बंद कर देंगे।

तो 2019 के चुनाव में मोदी ग्लास लाइये! सुधीर को “आर्मी ऑफ द डैड’’ के ख़्वाबों से बचाईये! सुधीर,  मोदी-संघ सुरक्षित, उनके नोट लिबास सुरक्षित… तो भारत सुरक्षित।


 








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Vyankatesh :: - 07-18-2018
You are ignorant about Islamic history. Read about how whole of mid East countries were force converted to Islam within 15 to 17 yrs. Islam is only religion that shows venomous attitude towards all other religions. Kuran uses KAFIR 150 times. It means INFIDELS. There is clear dictat for infidels. Kill, rape, hatred, convert or expell. Rape infidel women. In Pakistan 22 % Hindus were treated in same way now they are less than 1 %. In Bangladesh they have been reduced from 30 to 7 % in the same way. Whenever hindu Muslim riots happened in India Hindus were massacred raped abducted n hundred of temples destroyed. But coward Hindus never reacted to atrocities on Hindus in Pakistan or Banladesh. Our tolerance n non unity is greatest enemy. We all ready down from 92 to 75 %. Muslims have grown from 6 to 18%. Once they become 30% there will be mayhem all over. All ready some districts of Bengal , UP, Assam n Kerala where Muslims are dominant Hindus are second grade citizens. Support hindutwa or your grand children will suffer immensely. Gajawa a Hind is their dream n they are on right tract unless we unite. We need aggressive tolerant Hinduism. That is need of hour.