उधार की विरासत के सहारे बीजेपी

बेबाक , , मंगलवार , 27-03-2018


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मदन कोथुनियां

यह कार्टून 1945 में मराठी पत्रिका "अग्रणी" में छपा था जिसका संपादक नाथूराम गोडसे था और संरक्षक सावरकर थे। जिसमें सावरकर व श्यामा प्रसाद मुखर्जी को राम-लक्ष्मण की तरह व गांधीजी को रावण की तरह दिखाया गया था। आज बीजेपी पटेल को कांग्रेस का पीड़ित बताकर लपकने की फिराक में है तो बाकी लोगों को सोचना चाहिए कि बीजेपी के पुरखों की सोच पटेल, बोस, अम्बेडकर सहित कांग्रेस नेताओं के खिलाफ कैसी थी जो इस कार्टून के माध्यम से प्रदर्शित हुई थी?

गांधीजी की हत्या का प्लान शायद 1945 में ही बन गया था! वर्तमान बीजेपी के साथ दिक्कत यह है कि उनके पास इतिहास से बताने के लिए कुछ है नहीं। इतिहास में अंग्रेजों की मुखबिरी के अलावा इनके नेताओं ने कुछ काम नहीं किया! इसलिए ये लोग दूसरी पार्टियों में से एक-एक नेता को संबंधित पार्टियों से पीड़ित बताकर उनकी प्रशंसा में लगे हैं।

नागपुर में हेडगेवार ने जो काम अपने घर से शुरू किया था उसमें बीएचयू में कार्यालय देकर मदन मोहन मालवीय ने आधार दिया व गोवलकर, सावरकर जैसे लोगों ने गति दी। पटेल प्रधानमंत्री बनने वाले थे लेकिन गांधीजी ने पंडित नेहरू पर सहमति जताई अर्थात समर्थन दिया। वर्ण के पिरामिड में सबसे ऊपर खड़े पंडित नेहरू की मदद तीसरे स्तर के वैश्य ने मदद की! तीसरे स्तर का वैश्य लोकप्रियता के माध्यम से पहले दर्जे पर पहुंच रहा था तो ब्राह्मणों ने उनको गोली मार दी थी!

गांधीजी की हत्या के षड्यंत्र रचने व पहले भी दो बार हमले की फ़ाइल जब सरदार पटेल की टेबल पर पहुंची तो उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। मजिस्ट्रेट ने जब जांच के दौरान सरदार पटेल से पूछा तो उन्होंने उसका कोई जवाब नहीं दिया था! शायद सरदार पटेल प्रधानमंत्री पद पर रोड़ा अटकाने के कारण तटस्थ हो गए थे और ब्राह्मण बनियों को आपस में निपटने के लिए छोड़ दिया! बाद में जब गांधीजी की हत्या एक ब्राह्मण द्वारा कर दी गई तो फिर सरदार पटेल ने ब्राह्मणवादी संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया था लेकिन आगे चलकर पंडित नेहरू ने प्रतिबंध हटवा दिया था!

पटेल ब्राह्मण-बनियों के अलावे बहुसंख्यक व तीसरी ताकत की नुमाइंदगी कर रहे थे उसी को भुनाने के लिए बीजेपी के नेता व खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनको बीजेपी की तरफ मोड़ रहे है लेकिन खुद को पिछड़ा बताने वाले मोदीजी खुद वैश्य समुदाय से हैं चाहे उन्होंने गुजरात में मोदी समुदाय को पिछड़े वर्ग में शामिल ही क्यों न कर लिया हो!

आज भारत में ब्राह्मणवादी ताकतों ने एक वैश्य की लोकप्रियता को आगे करके सत्ता पर कब्जा कर लिया है लेकिन वर्ण व्यवस्था के तीसरे दर्जे पर बैठे वैश्य अर्थात मोदीजी को देर-सवेर किनारे जरूर लगाएंगे! प्रथम श्रेणी के लोग अपने वर्चस्व को जारी रखने का प्रयास करते रहते हैं। जब कमजोर होते हैं तो वैश्यों को आगे कर देते हैं क्योंकि चौथे दर्जे को साथ जोड़ने के लिए तीसरे दर्जे के आदमी को आगे करना जरूरी होता है।

आज मोदीजी रावण व इनके साथ जो भी  दलित-पिछड़े जुड़े हुए हैं वो पटेल-अम्बेडकर की तरह रावण के अन्य सिर और सावरकर-मुखर्जी की जगह भागवत व मनुवादी मीडिया ने ले ली है!

(मदन कोथुनियां स्वतंत्र पत्रकार हैं और आजकल जयपुर में रहते हैं।)










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