लाल रंग का रहस्य!

आड़ा-तिरछा , , मंगलवार , 30-01-2018


hanuman-india-bharat-indiathatisbharat

जुगनू शारदेय

 

 

…यहां पर एक शुद्ध जानकारी जो हनुमान चालीसा में नहीं है –पर हमारा भारत बहुत बचपन से जानता था। यह है झूठ की कसम। हर परीक्षा के पहले हमारा भारत हनुमान जी की लालरंगीय मूर्ति के सामने सौगंध लेता था कि सवा रुपए का लड्डू परीक्षा में पास होने के बाद हनुमान जी को अर्पित करेगा।

परीक्षा में पास होने के बाद हमारा भारत सोचता था कि इसमें हनुमान जी ने क्या किया ! कुंजी की रटाई उसने की, नकल उसने की –श्रेय तो उसी का है । फिर भी वचन निभाने के लिए पांच आने का लड्डू चढ़ाता था और खुद ही खाता था।

तब उसने लड्डू खाने के बाद जिसे आजकल मूंगफली कहा जाता है, तब चिनिया बादाम कहा जाता था। मसाले वाली नमक के साथ हरी मिर्ची हो तो इसका मज़ा कुछ और ही होता है। यह चिनिया बादाम किसी छपे कागज़ पर होता था। ऐसे ही किसी क़ागज़ के टुकड़े पर लिखा था कि कल तक ज़मीन का जो टुकड़ा गोचर था,आज वह पंचमुखी हनुमान का भव्य मंदिर था। हनुमान जी अच्छे खासे जमीन कब्जाऊ भी हो चुके थे। लाल रंग के हनुमान वहां भी स्थापित थे। पुजारी जी हनुमान कथा का वाचन करते रहते थे। उसी वाचन का एक अंश हमारे भारत ने भी सुना ।

तो सूत जी ने कहा कि श्री राम अयोध्या वापसी का कार्यक्रम बना रहे थे।

पर समस्या यह थी कि अयोध्या से जो समाचार आ रहे थे,वह उत्साहवर्धक नहीं

थे। भरत वास्तव में चरण पादुका ही थे। प्रशासन का कार्य उन्होंने

विश्वासपात्र अनेक लोगों पर छोड़ रखा था। कर वसूली में अनेक बड़े चतुर

थे। अयोध्याअंश अयोध्या के राजकोश में कम उनके निजी कोश में ज्यादा जाता

था ।

नतीजतन विकास का बुनियादी कार्य सड़क –बिजली –पानी का घोर अभाव था ।

एक नारा खूब चल रहा था कि राम नाम जपना,पराया माल अपना।

ऐसी स्थिति में राम नहीं चाहते थे कि मर्यादा पुरुषोत्तम के अयोध्या प्रवेश 

के साथ कोई बवाल खड़ा हो जाए । तब उन्होंने हनुमान जी को अपना राजदूत भर

ही नहीं,बल्कि आज के सीबीआई और प्रर्वतन जैसा अधिकार भी दे दिया। उनका

काम था अयोध्या की समस्याओं को समझना, हो सके तो समाधान करना भी शामिल था। पर उन्हें सख्त मनाही थी कि लंका के समान अयोध्या को तहस नहस नहीं करना

था । सब काम प्यार से हो । सो हनुमान जी अयोध्या को ठीक ठाक करने चले ।

यह तो बहुत बाद में उनके वशंजों ले बजरंग हो कर अयोध्या को ठीक ठाक किया था ।

जिस प्रकार हनुमान श्री राम के गुप्तचर थे,उसी प्रकार अयोध्या के

धनपशुओं के भी गुप्तचर थे। उन्हें हनुमान के बारे में पता चल चुका था ।

धनपशुओं की गुप्त गोष्ठी में हनुमान के बारे में विचार कम विमर्श अधिक

हुआ। विमर्श का परिणाम यह निकला कि हनुमान को स्त्री के बल पर पटाया

नहीं जा सकता। केवल कुंवारे ही नहीं थे, असली वाले ब्रह्मचारी भी थे ।

भोजन के मामले में शुद्ध शाकाहारी तो थे ही बल्कि फलाहारी भी थे। शयन के

लिए भी कहीं भी सो जाते थे। ऐसे गुप्तचर को कैसे पटाया जाए ? 

धनपति लोगों के गुप्तचर भी हनुमान पटाओ अभियान में जुट गए । हनुमान जी भी

तीव्र ही नहीं त्वरित गति से अयोध्या की ओर चल पड़े ।

हनुमान जी का जब अयोध्या प्रवेश हुआ तो संपूर्ण नगर दीपमाला से जगमगा रहा

था । वृक्ष पर भी दीप जल रहे थे । दीपक प्रकाश में पलास्टिक वाले नहीं

असली वाले फल लटक रहे थे । उन्हें देख कर हनुमान जी से रहा नहीं गया ।

यात्रा की भी थकान सी थी । कुछ फल वल का उन्होने भक्षण कर लिया । भक्षण

पश्चात सोचा तनिक विश्राम कर लें । निकटस्थ घर में घुस स गए । यह क्या!  घर की दीवारें राममय थीं । एक मनुष्य एक पोथी के समक्ष गा रहा था

वैष्णव जो तेने कहिए जो पीर पराई जाने रे !  पोथी का रंग लाल था । कुछ

शंका सी हुई हनुमान जी को ,अपनी पूंछ से पोथी को लपेटा ।

प्रत्येक पृष्ठ पर लिखा था ,पहल स्वस्तिक चिन्ह था ,उसके नीचे उकेरित था जय श्री राम

राम भक्त हनुमान अब भला क्या राम भक्त भ्रष्ट हो सकता था । सहज बुद्धि वाले हनुमान ने

सोचा ,कुछ पूछताछ कर ही ली जाए । सो पूछताछ आरंभ भई । पहला प्रश्न कड़क

था ।

हनुमानीय प्रश्न: आपकी दीवारों पर जय श्री राम क्यों लिखा है ?

धनपति उत्तर:लिखना ही चाहिए ,राम हमारे राजा हैं,हम उनके नाम का बजाते हैं  बाजा

हनुमानीय प्रश्न: राजा तो भरत हैं  ?

धनपति उत्तर:वह तो चरण पादुका राजा हैं ,राजपाट का संचालन तो वह करते हैं

जो पादुका चमकाते रहते हैं

हनुमानीय प्रश्न: पादुका कौन चमकाते हैं  ?

धनपति उत्तर:जो हनुमान भक्त होते हैं , लिखना ही चाहिए ,राम हमारे राजा

हैं ,हम उनके नाम का बजाते है  बाजा

हनुमानीय प्रश्न :अर्थ क्या हुआ ?

धनपति उत्तर:अरे मूर्ख बंदर नुमा मानुष जो  हनुमान भक्त होते हैं ,वही

बजाते हैं राम का बाजा ,देखा है कहीं आपने राम मंदिर ,नहीं न ,पर हर चौक

–चौराहे पर है हनुमान मंदिर

हनुमानीय प्रश्न: हनुमान की पहचान क्या है ?

धनपति उत्तर:लाल रंग उनकी पहचान है ,न भरोसा हो तो हमारे खाता बही देख लो

–सब लाल रंग के कपड़ों में लिपटे रहते हैं

हनुमानीय प्रश्न: हनुमान की विशेष पहचान क्या है   ?

धनपति उत्तर:उनके हृदय में राम बसते हैं ,और हमारे हृदय में हनुमान बसते

हैं –हृदय रोग विशेषज्ञों ने भी देख लिया है । हृदय भी लाल रंग का ,लहू का

रंग भी लाल । आपके हृदय में कौन बसते हैं –मैं अपना दिखा सकता हूं ।

हनुमानीय प्रश्न: दिखाओ तो सही  ?

भलेमानुष हनुमान को क्या पता कि धन पशु ने इसी दिन के लिए उस काल के

कृत्रिम चिकित्सक से एक खोल बना रखा था जिसमें हृदय में हनुमान राम

आराधना में दिखते थे । हनुमान  स्वयं को देख कर मंत्र मुग्ध हो गए । राम

को सूचना दे दी कि पूरा अयोध्या राम भक्त है । सब लाल रंग में रंगे हैं ।

ईमानदार हैं ...

...तब से लाल रंग राम का रंग था । सारा खाता बही उसी रंग में लिखा होता

है । मूर्ख वाम पंथी और समाजवादियों ने इसे क्रांति का रंग बता दिया तो

हमारा भारत क्या करे !

(जुगनू शारदेय वरिष्ठ पत्रकार हैं। आज कल दिल्ली में रह रहे हैं।)










Leave your comment