भय से शांति नहीं बल्कि युद्ध निकलता है

विशेष , , बृहस्पतिवार , 16-11-2017


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हिमांशु कुमार

कल मेरे पास यहां हिमाचल में चार युवक आये

ये लोग राजस्थान में स्वराज विश्वविद्यालय से आये थे

स्वराज विश्वविद्यालय एक नए तरह का विश्वविद्यालय है

इस विश्वविद्यालय में कोई विषय नहीं पढ़ाया जाता, यहां कोई प्रोफेसर नहीं है

इस विश्वविद्यालय में छात्र को खुद ही अपना विषय चुनना होता है

छात्र ही अपना विषय पूरा करने का समय, सीखने की गति तय करता है

छात्र ही अपना गुरू तय करता है

मान लीजिये आपको फिल्म निर्देशन सीखना है

आपको खुद ही तय करना है कि आप इसे कितने साल में सीखेंगे

आप खुद ही तय करेंगे कि आपको फिल्म निर्देशन कौन सिखाएगा

जैसे यहां एक छात्र आया और उसने कहा कि मुझे मूर्तिकला सीखनी है

और सड़क के किनारे बैठ कर मूर्ती बनाने वाला मूर्तिकार मेरा गुरू होगा

यहां कोर्स को यात्रा कहा जाता है

यहां से पढ़ कर निकले हुए कई छात्र छात्राओं से मुझे मिलने का मौका मिला है

यहां के छात्र बहुत बुद्धिमान, अच्छे स्वभाव के और मददगार लगे

कल इसी विश्वविद्यालय के चार छात्र मुझसे मिलने आये

इनके नाम हैं आकर्ष, सुमित, बसंत और भुवनेश

इन लोगों ने तय किया था कि उदयपुर से हिमाचल तक लिफ्ट मांग कर एक भी पैसा खर्च किये बिना पहुंचेंगे

यहाँ आने से पहले ये युवक सतीश कुमार जी से मिले

सतीश कुमार ने अपने एक साथी के साथ साठ के दशक में विश्व शांति के लिए दिल्ली से अमेरिका तक की पैदल यात्रा करी थी

सतीश कुमार और उनके साथी जब यात्रा के लिए गांधी जी के शिष्य विनोबा भावे से मिलने गये

तो विनोबा ने इन दोनों युवकों से पूछा कि जेब में कितना पैसा है ?

उन्होंने अपने जेब में रखा हुआ पैसा निकाल कर दिखाया

विनोबा ने कहा पैसा रखने का मतलब है कि आपके मन में डर है कि कहीं कोई खाने के लिए देगा या नहीं ?

यानी आपके मन में भय है

और जहां भय है वहां शांति कैसे आ सकती है

भय में से तो युद्ध निकलता है

इसलिए विश्व शांति के लिए यात्रा करनी है तो बिना डरे बिना पैसे के जनता पर भरोसा करके करो

सतीश कुमार और उनके साथी ने जेब से सारे पैसे निकाल दिए और अमेरिका तक बिना पैसे पैदल यात्रा करी थी

कल यह चारों युवा मेरे पास आये इन्होंने उदयपुर से हिमाचल के पालमपुर तक की अपनी बिना पैसे की यात्रा का विवरण सुनाया

इन युवकों ने मुझसे आदिवासियों के बारे में भी बात करी

आज भी बहुत सारे युवक हैं जो इस दुनिया को अहिंसक प्रेम की जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं

यही लोग धरती के नमक हैं 

(हिमांशु कुमार गांधीवादी कार्यकर्ता हैं और आजकल हिमाचल प्रदेश में रह रहे हैं।)










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