“हम आपको इस दुनिया और समाज को बर्बाद नहीं करने देंगे”

बेबाक , , मंगलवार , 19-09-2017


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हिमांशु कुमार

आप शहर में रहते हैं,

क्या आप अनाज उगाते हैं?

क्या आप लोहा खोदते हैं?

क्या आप कपड़ा बनाते हैं?

क्या आप दूध दुहते हैं?

क्या आप मकान बनाते हैं?

क्या आप सड़क, कार साइकिल बनाते हैं?

आप कुछ नहीं करते

आप मजे में हैं

लेकिन यह सब कुछ करने वाले तकलीफ में हैं

सांकेतिक तस्वीर। साभार : गूगल

यह लोग जब पूरी मजदूरी या अपने उत्पादन का पूरा मोल मांगते हैं तो आप अपने सिपाही भेज कर इन पर डंडे और गोली चलवा देते हैं,

इसलिए आप सिपाहियों को बहुत पसंद करते हैं,

लेकिन आप खुद सिपाही नहीं बनना चाहते,

और कोई सिपाही खराब खाने की शिकायत करे तो आप उसे बर्खास्त कर देते हैं,

लेकिन आपने पूरा तन्त्र ऐसा बना लिया है कि अब कुछ गरीब सब कुछ उगा कर बना कर आपके सामने रख देने के लिए मजबूर हैं,

सर उठाने वाले को पीटने के लिए सिपाही मजबूर है,

और आप मजदूर के खिलाफ, किसान के खिलाफ होते हुए भी मजे में हैं,

सांकेतिक तस्वीर। साभार : गूगल

आप प्रकृति के भी खिलाफ हैं,

इसलिए आप प्रकृति को बचाने वाले कार्यकर्ताओं को विकास विरोधी विदेशी एजेंट कह कर उनका मजाक बनाते हैं,

अच्छा सोचिये अगर सारे पेड़ मर जाएँ तो क्या होगा?

आप पट से ज़मीन पर गिर कर मर जायेंगे

क्योंकि आप जो सांस ले रहे हैं वह इन पेड़ों द्वारा ही बनाई जा रही है,

आप सोच रहे थे कि प्रकृति अलग है और आप अलग हैं?

अच्छा अगर मजदूर ना हो तो क्या होगा?

तो ना आपके पास घर होगा ना कपड़े ना खाना होगा,

आप के लिए खाना कपड़े और मकान यही लोग बनाते हैं जिन्हें आप पीटना चाहते हैं जिन्हें आप कामचोर कहते हैं,

आपकी अपनी राजनीति मजदूर विरोधी, किसान विरोधी, प्रकृति विरोधी है,

इसलिए जब कोई मजदूरों किसानों और प्रकृति की बात करता है तो आप नफरत से उसे कम्युनिस्ट कह कर दुत्कारने लगते हैं,

ध्यान से देखिये आप इस दुनिया को बचाने वाले हर विचार और हर कोशिश के विरोधी हैं,

हम आपकी इसी आत्महत्यारी राजनीति की खिलाफ लिखते हैं बोलते हैं और काम करते हैं,

आप हमें चाहे विकास विरोधी कहिये, वामी, आपी, कान्ग्रेसी, सिक्युलर, एनजीओवादी, कहते रहिये,

लेकिन हम आपको इस दुनिया और समाज को बर्बाद नहीं करने देंगे,

हम लड़ेंगे.

(लेखक प्रसिद्ध गांधीवादी कार्यकर्ता हैं।)










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