“समकालीन हिन्दी साहित्य सांस्कृतिक गुंडों और प्रच्छन्न क़िस्म के फ़ासीवादी दस्तों के लिए कोई खुला मैदान नहीं है”

विवाद , नई दिल्ली, शनिवार , 05-08-2017


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मुकुल सरल

हिन्दी के वरिष्ठ कवि-लेखकों ने कृष्ण कल्पित-अनामिका विवाद में हस्तक्षेप करते हुए आज एक बयान जारी किया है। बयान इस प्रकार है- 

वक्तव्य/ Statement

हिन्दी जगत में साहित्यिक पुरस्कारों पर विवाद कोई नई बात नहीं है। पिछले कुछ समय से भारतभूषण अग्रवाल कविता पुरस्कार (जो ३५ वर्ष से कम आयु के कवि द्वारा लिखी गई वर्ष की सर्वश्रेष्ठ हिन्दी कविता के लिए दिया जाता है) विवाद के केन्द्र में रहा है  और कविता के चयन पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। लेकिन सोशल मीडिया और दूसरे मंचों पर कुछ पुरुष लेखकों ने, जिनमें युवा और प्रौढ़ दोनों तरह के लोग हैं, जिस भद्दे और ऑक्रामक स्त्री-विरोधी रवैये और अश्लील भाषा का प्रदर्शन किया है, उससे हम स्तब्ध हैं। दुख की बात यह है कि इनमें से अनेक लोग अपने को लोकतांत्रिक, उदारमना और कुछ तो वाम रुझान वाला मानते हैं।

पिछले साल पुरस्कार के लिए चयनित कवि शुभमश्री और उनकी कविता पर अशोभनीय और अपमानजनक ढंग से हमले किये गये थे। इस वर्ष अश्लील हमले का निशाना चयनकर्ता अनामिका को बनाया गया है। हमें डर है कि इससे एक ऐसी अस्वस्थ परम्परा की नींव पड़ रही है जिसके तहत हर तरह के स्त्रीद्वेषी, मर्दवादी विमर्श, सामन्ती मानसिकता के खुले प्रदर्शन और साहित्य जगत में लफ़ंगेपन को वैधता मिलेगी। दूसरी तरफ़ इसी समय अति-दक्षिणपंथी विचारों के नैतिक-प्रहरी और ट्रॉल भी सक्रिय हैं जो अपनी ज़हरीली भाषा के साथ, छद्मवेश में तरह तरह के भ्रम और दुष्प्रचार फैलाने, और चरित्रहनन करने में मशग़ूल हैं।

हम सभी लेखकों और साहित्यप्रेमियों की चिंताओं के भागीदार हैं जो इस वस्तुस्थिति से परेशान हैं, और उन लेखकों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हैं जिन्हें हाल ही में असभ्य और प्रतिक्रियावादी हमलों का निशाना बनाया गया है। समकालीन हिन्दी साहित्य सांस्कृतिक गुंडों, उनके भटके हुए अनुयायियों और प्रच्छन्न क़िस्म के फ़ासीवादी दस्तों के लिए कोई खुला मैदान नहीं है।

शुभा  

प्रशांत चक्रवर्ती      

मंगलेश डबराल 

मनमोहन

दूधनाथ सिंह
नरेश सक्सेना
असद ज़ैदी
राजेश जोशी
अली जावेद
अमिताभ
अनीता वर्मा
अपर्णा अनेकवर्णा
अरुण माहेश्वरी
चंदन पांडेय
चमनलाल
देश निर्मोही
धीरेश सैनी
जवरीमल पारख
कात्यायनी
किरण शाहीन
कुलदीप कुमार
कुमार अंबुज
कुमार विक्रम
लाल्टू
लीना मल्होत्रा
मदनगोपाल सिंह
महरुद्दीन ख़ाँ
महेश वर्मा
मुकुल सरल
निर्मला गर्ग
नूर ज़हीर
पल्लव
पंकज चतुर्वेदी
पंकज श्रीवास्तव
प्रत्यक्षा
अार चेतनक्रांति
रंजीत वर्मा
रवीन्द्र त्रिपाठी
संजीव कुमार
समर्थ वशिष्ठ
सरला माहेश्वरी
शालिनी जोशी
सुमन केशरी
शिवप्रसाद जोशी
शीबा असलम फ़हमी
शेफ़ाली फ़्रॉस्ट
सुषमा नैथानी
तरुण भारतीय
त्रिभुवन
वंदना राग
विनोद दास
वीरेन्द्र यादव

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कवि असद ज़ैदी की फेसबुक पोस्ट पर समर्थन में किए गए कमेंट्स।

कवि-लेखकों की ओर से जारी इस बयान का व्यापक तौर पर समर्थन हुआ है। इस प्रयास को साहित्यिक जगत ने खुले मन से सराहा है और खुद को भी इस वक्तव्य का हिस्सा बनाने की अपील की है। इन लोगों ने उम्मीद जताई है कि इस तरह के हस्तक्षेप से ऐसे कुत्सित विचारों और ट्रोलिंग पर रोक लगेगी। 

कवि असद ज़ैदी की फेसबुक पोस्ट पर समर्थन में किए गए कमेंट्स।

सोशल मीडिया पर जारी इस बयान को बड़ी संख्या में अन्य कवि-लेखकों ने साझा किया है और अपना नाम भी इस सूची में दर्ज करने का आग्रह किया है। 










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Tuhin Deb :: - 08-05-2017
Sahmat,Shamil

????????? ???? :: - 08-05-2017
इस प्रकार की कुत्सित प्रवृत्ति का हम कडे शब्दों में निंदा करते हैं।