वैज्ञानिक संस्थाएं भी अंंधविश्वास और जातिवाद की फांस में

हमारा समाज , पुणे, रविवार , 10-09-2017


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जनचौक ब्यूरो

पुणे। 21वीं सदी में जातिवाद न केवल गांवों में जड़ जमाए बैठा है बल्कि देश के उच्च आधुनिक वैज्ञानिक संस्थानों में भी वो अपने पूरे नंगे रूप में मौजूद है। पुणे स्थित भारतीय मौसम विभाग में सामने आयी एक घटना ने इसी बात को साबित किया है। खास बात ये है कि इस मामले में पीड़ित को न केवल आरोपी के तौर पर पेश किया गया बल्कि बाकायदा उसके खिलाफ थाने में एफआईआर तक दर्ज करायी गयी। हालांकि बाद में एफआईआर वापस ले लिया गया।

मेधा खोले पुणे स्थिति भारतीय मौसम विभाग में डिप्टी डायरेक्टर जनरल के पद पर तैनात हैं। उन्होंने अपनी महिला बावर्ची के खिलाफ एक केस दर्ज किया था जिसमें उस पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। बावर्ची महिला 60 वर्ष की वृद्धा है। खोले ने महिला पर अपनी जाति छुपा कर अपने साध धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। 

निर्मला यादव।

 

धार्मिक भावनाओं को आहत करने का लगाया आरोप

खोले ब्राह्मण जाति से आती हैं और पेशे से वैज्ञानिक हैं। उनका कहना है कि बावर्ची महिला ने अपनी जाति छुपाकर उनके यहां नौकरी हासिल की। उन्होंने बताया कि महिला ने खुद को ब्राह्मण बताया था जिससे उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है। बावर्ची महिला का नाम निर्मला यादव है। निर्मला यादव मेधा खोले के शिवाजीनगर स्थि त आवास पर एक बावर्ची का कार्य साल 2016 से कर रही थीं।

सिंहनाद पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई थी शिकायत

मेधा खोले ने सिंहगढ़ रोड पुलिस स्टेशन मे एक एफआईआर दर्ज कराते हुए कहा था कि ”मैंने  2016 में दिए अपने विज्ञापन में कहा था कि मुझे एक ब्राह्मण, विवाहित महिला, बावर्ची की आवश्यकता है, जो खास मौकों और त्यौहारों, जैसे गणेश चतुर्थी और पितृ पूजा पर मिष्ठान और परिवार के लिए खाना बना सके। और यह महिला मेरे घर इस काम के लिए आयी और उसने अपना नाम निर्मला कुलकर्णी बताया। और कहा कि वह भी एक ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखती है।” खोले की जिज्ञासा यहीं नहीं खत्म हुई। उन्होंने बाकायदा महिला के घर का दौरा किया सिर्फ यह सुनिश्चिसत करने के लिए कि क्या सच में महिला ब्राह्मण है या नहीं?

और जब खोले को ये सुनिश्चिण‍त हो गया कि महि‍ला ब्राह्मण है तब जाकर महि‍ला को बावर्ची की नौकरी मेधा खोले परिवार मे प्राप्त हो सकी। निर्मला यादव ने खोले के घर 6 विशेष मौकों पर खाना बनाया।

खोले ने दी थी परिणाम भुगतने की धमकी 

बुधवार को जब एक पुजारी ने खोले के घर पर पूजा के दौरान बताया कि निर्मला ब्राह्मण नहीं है तो खोले आपे से बाहर हो गयीं। फिर उन्होंने तुरंत महिला के घर जाने का निश्चय लिया। और फिर पूछताछ में महिला ने स्वीकार किया कि वो ब्राह्मण नहीं है और एक यादव परिवार से आती है। ऊपर से उसके विवाहित होने की जगह विधवा होने का पता चलने पर मानो खोले के पांव के नीचे से जमीन खिसक गयी। 

फिर क्या था खोले ने महिला को झूठ बोलने का परिणाम भुगतने की धमकी दे डाला। और वो वहीं तक नहीं रुकी पास के थाने में जाकर बाकायदा उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दीं। 

पुणे पुलिस ने दर्ज किया एफआईआर।

धोखा देने की धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर

पुलिस ने बताया कि ”मेधा खोले के दिए गये बयान के आधार पर हमने निर्मला यादव के खिलाफ धारा 419 (पहचान छुपा कर धोखा देने) और इससे संबधित अन्य धाराओं में केस रजिस्टर्ड कर लिया है। बताया जाता है कि पति की मृत्यु के बाद माली हालत ठीक न होने से महिला को मजबूरन नौकरी करनी पड़ी थी। जिसके चलते उसे अपनी पहचान छुपाकर समझौता करना पड़ा। 

असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर ज्योति गडकरी ने बताया कि ” जब हमने निर्मला यादव से पूछा कि आपने अपनी पहचान और जाति को क्यों छुपाया तो उसने कहा कि पति की मृत्यु के बाद से मेरी माली हालत अच्छी नहीं है और मुझे पैसों की सख्त जरूरत थी। लेकिन क्योंकि मेधा खोले को सिर्फ ब्राह्मण बावर्ची की आवश्यकता थी इसीलिए मैंने नौकरी पाने के लिए अपनी जा‍तीय पहचान को छुपाया।”

इस बीच बाहर से तमाम सामाजिक संगठनों के दबाव के बाद खोले को पीछे हटना पड़ा है और उन्होंने थाने में दर्ज अपनी शिकायत को वापस ले लिया है। लेकिन इसके साथ ही उनका वैज्ञानिक होने के बावजूद पिछड़ेपन और दकियानूस विचारों का हिमायती होना न केवल उच्चसंस्थानों बल्कि पूरे आधुनिक समाज और उसके ताने-बाने पर ही सवाल खड़ा हो गया है। 










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