...जब तक मसूद अज़हर अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित नहीं हो जाता

आड़ा-तिरछा , , रविवार , 03-03-2019


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वीना

अगर मसूद अज़हर अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित हो जाता तो पुलवामा में हमने जो भूल की वो हम नहीं करते। हमला होने की ख़बर हमारे ख़ुफ़िया विभाग ने दी थी। अमरीकियों ने भी हमें ठोका-बजाया था कि सावधान! पर हमने ऐसी बेक़ार चेतावनियों पर कान देना जरूरी नहीं समझा। क्यों? क्योंकि अभी तक मसूद अज़हर अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित नहीं हुआ है।

इसलिए हमने 350 किलोग्राम आरडीएक्स से भरी गाड़ी आतंकवादी समेत अपने सीआरपीएफ के जवानों के साथ  जाने दी। वो भी कतार में पांचवें नंबर की उस गाड़ी के साथ जो बुलेट प्रूफ़ नहीं थी। क्यों? क्योंकि हमें पूरा यक़ीन था कि तब तक कोई ख़तरा नहीं जब तक मसूद अज़हर अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित नहीं हो जाता।

हमें इस बात की भी बिल्कुल फ़िक्र नहीं थी कि आरडीएक्स से भरी गाड़ी में बैठा, हमारे ज़ुल्मो-सितम से तंग आया कश्मीरी बालक बिना बुलेट प्रूफ़ गाड़ी को अपनी जान पर खेलकर उड़ा देगा। क्योंकि अभी तक मसूद अज़हर अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित नहीं हुआ।

पाकिस्तान के अधिकार वाले कश्मीर में जब हमारा विंग कमांडर ग़लती से पहुंच गया और उसने  हिंदुस्तान ज़िंदाबाद, भारत माता की जय  के नारे लगाए तो वहाँ के बच्चे-नौजवान हमारे जवान पर हमला करते हैं और पकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगाने लगते हैं। अब पूरी तरह पकिस्तान के हो चुके उन कश्मीरियों को हम हिंदुस्तानी बना कर छोड़ेंगे। क्यों? क्योंकि मसूद अज़हर अभी तक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित नहीं हुआ है।

कश्मीर के लोग और शाह फैसल जैसे नौजवान भारत को अपना समझने लगे थे। भारत के साथ कश्मीर की तरक़्क़ी   और तक़दीर को जोड़ने लगे थे। पर वो तब तक ऐसा कैसे कर सकते थे जब तक कि मसूद अज़हर अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित न हो जाए! 

सो हमने उन्हें फ़िर रौंदना-कुचलना शुरू कर दिया। उन्हें मजबूर कर दिया कि स्कूल से निकल-निकल कर सेना के जवानों पर पत्थर चलाएं। किताब छोड़ कर बंदूक उठाएं। और सेना को हिदायत दी कि इन मासूम लड़के-लड़कियों की पैलेट गन से आँखें फोड़ दो। ताकि ये कभी भारत से मोहब्बत करने की न सोचें। इन मासूमों के धड़कते सीने पर सीधा निशाना लगाओ। 

हमारी इसी योजना के  फलस्वरूप ज़हीन कश्मीरी नौजवान बुरहान वानी को आख़िरकार आतंकवादी बनने पर मजबूर कर दिया गया। और हमने उसे ढेर कर दिया। बुरहान वानी को हमारे कब्ज़े के कश्मीर में पाकिस्तानी झंडे में लपेटा गया। पाकिस्तान ज़िंदाबाद के नारे लगे और बुरहान कश्मीर का भगतसिंह हो गया। जब हिंदुस्तान आज़ाद है और कश्मीर उसका ताज तो किसी के भगत सिंह बनने की नौबत क्यों आई? बक़वास बंद करो। कश्मीरी तब तक भारत के हम वतन  नहीं हैं जब तक कि मसूद अज़हर अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित नहीं हो जाता।

थोड़े में समझिए तो बात इतनी है कि ये जो पाकिस्तान-भारत के बीच कश्मीर समस्या फसी पड़ी है उसके लिए सीधे-सीधे चीन-पकिस्तान की यारी ज़िम्मेदार है। चीन की वीटो पॉवर की वजह से ही अब तक मसूद अज़हर अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित नहीं हो पाया है। 

वैसे ये इमरान खान भी बंदा सही नहीं है। असली राजनेता नवाज़ शरीफ़ था जिसे मदीने से नहीं पनामा में दिलचस्पी थी। अगर राजनीति करनी नहीं आती तो भई आए ही क्यों यहाँ झक्क मारने। 

जब से सियासत में क़दम रखा है उन्हीं घिसी-पिटी बातों पर टिका हुआ है कि जी मदीने का राज क़ायम करना है। 

कम्बख़त ने अंतर्राष्ट्रीय ख़िताब से नवाजा जाने वाला "शौक़त ख़ानम" फाइव स्टार कैंसर अस्पताल भी खड़ा कर दिया। जहाँ 70 प्रतिशत बेड ग़रीब बीमारों के लिए मुफ़्त उपलब्ध हैं। 

कहता है यहाँ सबको एक सा खाना, दवाई, तीमारदारी मिलती है। भेद-भाव न हो इसलिए डॉक्टर-नर्सों को भी कानो-कान ख़बर नहीं होती कि कौन मुफ़्त वाला है। 

अब सरकार मिल गई है तो सरकारी फंड लुटाएगा। भला ऐसे राजनीति होती है क्या? भारतीय राजनीति ऐसा तब तक नहीं होने देगी जब तक मसूद अज़हर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित न किया जाए।

ये सारी सुविधाएं सरकारी अस्पतालों में सिर्फ़ नेताओं के लिए होनी चाहिए। जैसे हमारे यहाँ ऑल इंडिया मेडिकल में होता है। और इसके लिए 56 इंच का सीना चाहिए। 

राजनीति बाँटने नहीं छीनने का नाम है। बाँटने वाले दिलदारों को चलेगा पता, जब जनता जी-हज़ूरी में सीस नवाना छोड़ सिर पर बैठ कर एक-एक पैसे, मिनट का हिसाब मांगेगी कि बताओ नेता-नौकर अब तक क्या तीर मारा। सुन ले बे ज्ञानी ध्यानी! ये जनता जूते की नोक पर रखने वाली चीज़ है। हाथ मिला लिया तो आँखों में तुरंत कमीनेपन की परछाई पकड़ लेगी और ऐसा पटकेगी कि फ़िर उठा न जाने का बेटा। 

कहीं शान्ति-शान्ति, तरक़्क़ी-व्यापार का रट्टा मारके हमारा देशभक्ति बम कश्मीर का मुद्दा न ख़त्म करवा दियो सिरफिरे। "दूध मांगोगे खीर देंगे, कश्मीर मांगोगे चीर देंगे " बेक़ार हो गया तो फ़िर बिना कुछ करे-धरे, सत्ता लेना और सुरक्षा के नाम पर धन बटोरने का क्या होगा। 

हमारी मनुस्मृति में तो ये विधान है कि शूद्र अगर पैसा कमा ले तो बामण-क्षत्रिय-बनिया उसका धन छीन ले, लूट ले ताकि उसका स्वर्ग पहुँचने का अधिकार बरकरार रख सके। 

तुम्हें क्या लगता है हम जो इन आदिवासियों-किसानों-दलितों-महिलाओं को बेघर कर रहे हैं, भूखे-प्यासे -नंगे छोड़ रहे हैं। इनके कब्जे के जल, जंगल-ज़मीन, गाँव-झोपड़ी लूट रहे हैं हम इन पर अत्याचार कर रहे हैं! अरे मूर्खों हम इन पर एहसान कर रहे हैं। ये जो हिन्दू धर्म से भटक कर ऐश-ओ-आराम-अपनी मर्ज़ी का जीवन जीने की ज़िद ठाने हैं उसे रोक कर इनका परलोक सुधार रहे हैं। भई हम अपनी मनुस्मृति के हिसाब से चलेंगे तुम्हारे कुरान-मदीने से थोड़े ही। 

सुना है मसूद अज़हर बहुत बीमार है। जो जन्नत को निकल लिया तो क्या होगा? तो क्या होगा क्या मतलब..? उसके रिश्तेदार भी तो हैं। फिर हम उनको अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करवाने में वक़्त बिताएंगे। 

चाहे हमारे यहाँ कोई सरकार हो हम पाकिस्तान से दोस्ती तब तक नहीं  करेंगे जब तक मसूद अज़हर और उसके रिश्तेदारों को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित न किया जाए। औए जब तक ऐसा नहीं होगा भारत की विश्व गुरुआई ख़तरे में है। और इसके लिए चीन-पकिस्तान दोनों ज़िम्मेदार हैं क्योंकि ये मसूद अज़हर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित नहीं होने दे रहे।

(वीना फिल्मकार, पत्रकार और व्यंग्यकार हैं।)








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