शुरुआती पुलिसिया बाधा के बाद सरहदी दीवारों को तोड़ने के मंसूबों के साथ शुरू हुई भारत-पाक मैत्री यात्रा

इंसाफ की लड़ाई , अहमदाबाद , बुधवार , 20-06-2018


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। मैगासेसे अवार्ड से सम्मानित संदीप पाण्डेय और उनके साथियों द्वारा आयोजित “भारत पाक मैत्री एवं शांति यात्रा” को अहमदाबाद पुलिस ने इजाजत नहीं दी। पुलिस का कहना था यात्रा अहमदाबाद जिले से बाहर किसी स्थान से निकालें। पुलिस के इस फरमान को खारिज करते हुए यात्रा पहले से तय अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से निकली। लेकिन पदयात्री जैसे ही आश्रम से बाहर निकले पुलिस ने संदीप पाण्डेय, मंजिल नानावती, एजाज़ मरयम, कौशर अली सैय्यद, तनुश्री बेन, अलोक पाण्डेय, मेहुल कुमार वर्सोवा समेत तमाम लोगों को हिरासत में ले लिया। जिसके बाद उन्हें रानिप पुलिस स्टेशन ले जाया गया। जहां उन्हें दो से ढाई घंटे रखकर अहमदाबाद में यात्रा न निकालने की सलाह दी गई। 

पुलिस स्टेशन से छूटने के बाद यात्रा को अडालज (गांधी नगर) से प्रारंभ कर दिया गया है। सुबह 8 बजे साबरमती आश्रम से यात्रा की शुरुआत करने के लिए बड़ी संख्या में गांधीवादी, सिविल सोसाइटी तथा नेता, विधायक उपस्थित थे। कार्यक्रम को गांधी भजन से आरंभ किया गया। 

संदीप पाण्डेय ने यात्रियों तथा अन्य उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि “1962 से अब तक भारत-चीन सीमा पर कोई सैनिक शाहीद नहीं हुआ क्योंकि दोनों सरकारों ने गोली न चलाने की अकथित संधि कर रखी है। इसी प्रकार से भारत-पाकिस्तान के बीच सीमा पर गोली नहीं चलनी चाहिए। यह दोनों सरकारें तय करें कि न तो भारत का न ही पाकिस्तान का कोई सैनिक शहीद होगा।” पाण्डेय ने आगे बताया कि “हम न तो व्यास नदी के पानी के बंटवारे को मानते हैं न ही दोनों देश की जनता के दिलों के बंटवारे को मानते हैं। भारत-पाकिस्तान की भाषा एवं संस्कृति एक है जिस दिन जनता चाहेगी जर्मनी की ही तरह सरहदों को तोड़ देगी। यह राजनैतिक लोग कुछ नहीं कर पाएंगे।”

हिरासत में संदीप पांडेय।

पाण्डेय ने आतंकवाद के प्रश्न पर कहा कि आतंकवादी वीज़ा पासपोर्ट लेकर नहीं आते हैं। आम जनता को आतंकवाद के बहाने से वीज़ा न देना ठीक नहीं। आतंकवादी बिना वीज़ा के ही आते हैं। पाण्डेय ने कुलदीप नैय्यर के हवाले से बताया कि जब नैय्यर साहब ने नेशनल असेम्बली की सदस्य वहीदा मीर दीप से मुंबई हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद के खिलाफ पाकिस्तान सरकार द्वारा कुछ ठोस कार्रवाई नहीं करने का सवाल पूछा तो वहीदा का जवाब था कि इन लोगों ने आपके सिर्फ 160 ही मारे हैं हमारे पांच छ हज़ार लोग मार दिए हैं। फिर भी हम कुछ नहीं कर पा रहे हैं। 

पाण्डेय ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान भी आतंकवाद से पीड़ित है। भारत को आतंक के खिलाफ लड़ाई में सहयोग करना चाहिए। मेरा तजुर्बा है पाकिस्तान में कुछ समस्याएं हैं। लेकिन जनता बहुत अच्छी है वहां हमारे कार्यक्रम में पुलिस कमिश्नर यूनिफार्म में आकर बैठ जाते हैं जबकि भारत में इस प्रकार के कार्यक्रम से अधिकारी डरते हैं।

दसाडा से दलित विधायक नौशाद सोलंकी ने कहा कि “मैं इस यात्रा का हिस्सा बनने आया हूं। मैं भी अपना अधिक से अधिक समय 12 दिनों तक यात्रा को दूंगा। यह यात्रा गांधीजी के आश्रम से शांति का सन्देश लेकर पाकिस्तान की सरहद पर जा रही है यह वही सन्देश है जिसे बापू ने इसी जगह से पूरे विश्व को दिया था। बॉर्डर पर मरने वाला सिपाही गरीब किसान का सपूत होता है। रक्षा में खरबों रुपये खर्च किये जाते हैं। यदि सरहद पर तनाव कम होगा तो बचे पैसे को किसानों पर खर्च किया जा सकता है।” निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी ने कहा कि “केंद्र और राज्य में अशांति वाली सरकार है। दोनों सरकारों को शांति की बात अच्छी नहीं लगती। इसलिए आश्रम से पदयात्रा की अनुमति नहीं दी गई है। सभी साथी डिटेन होने की लिए तैयार रहें। अशांति वाले शांति मार्च नहीं निकालने देंगे। पाकिस्तान सरहद को हिन्दू-मुस्लिम नजरिये से न देख हम सब को चिंता करना चाहिए। जिस प्रकार से चीन सीमा पर सैनिक नहीं मरते हैं। उसी प्रकार से हमारे सैनिक पाकिस्तान बॉर्डर पर नहीं मरने चाहिए।”

थाने में कुछ देर रखे गए लोग।

वाघ बकरी टी ब्रांड के डायरेक्टर पीयूष देसाई ने कहा कि “मेरी इच्छा थी कि मैं इस प्रकार की यात्रा करूं और मैंने 2 अक्तूबर से 30 जनवरी तक की यात्रा का प्लान सोचा भी था। लेकिन कर नहीं पाया। संदीप जी की इस यात्रा में शामिल होकर मुझे बहुत ख़ुशी हो रही है।” देसाई ने बताया कि आने वाले दिनों में रोटरी क्लब भारत और रोटरी क्लब पकिस्तान दोनों मिलकर इस प्रकार से दिलों को जोड़ने वाली यात्रा का आयोजन करेगा।” देसाई ने कहा वाघ बकरी टी कारोबार मेरे दादाजी ने ऐसे समय में शुरू किया था जब कारोबार में नुकसान उठाकर माली तौर पर खाली थे। तो एक मुस्लिम मित्र फिर से कारोबार करने के लिए दस हज़ार रुपये दिए थे। वह दस हज़ार आज एक बिजनेस अम्पायर में तब्दील हो गया है।” आप को बता दें “वाघ बकरी टी ग्रुप” गुजरात का ही नहीं भारत में टी का लीडिंग ब्रांड है। 

विधायक इमरान खेड़ावाला ने बताया कि “मैं 1986 में पाकिस्तान जा चूका हूं वहां लगता ही नहीं है कि यह कोई और देश है। भाषा संस्कृति सब एक जैसी ही है वहां तो मैंने उस समय दुकानों के बोर्ड गुजराती में लिखे देखे थे। सरहद पर कोई सैनिक शहीद न हो इसलिए बापू का सन्देश अहिंसा और शांति ही सही रास्ता है।”

असीम रॉय जो दिल्ली से गाजा तक की यात्रा कर चुके हैं कहा कि “जर्मनी की ही तरह एक दिन भारत पाकिस्तान की सरहदी दीवार टूटेगी। जब जनता खड़ी होगी सरकारें कुछ नहीं कर पाएंगी प्रशासन द्वारा यात्रा में बाधा पैदा करने से इनमे से कोई भी रुकेगा नहीं। हम आगे भी इस प्रकार का कार्यक्रम करते रहेंगे।”

इस यात्रा को समर्थन देने के लिए केवल सामाजिक संगठन ही नहीं आईआईएम एवं आईआईएटी से बहुत से छात्र और प्रोफेसर भी आये थे। 

 








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