ईश्वर की गजब कलाकारी

शख़्सियत , , बृहस्पतिवार , 14-06-2018


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संदीप जोशी

विशाखापट्नम देश के दक्षिण पूर्व समुद्री तट पर बसा एक सुंदर शहर है। एक तरफ समुद्र के खारे पानी से तो दूसरी तरफ मीठे पानी की नदियों से घिरा विशाखापट्नम है। ऐसे शानदार माहौल में विशाखापट्नम शांत और सौम्यता का शहर भी माना जाता है। आंध्र प्रदेश के इस शहर को खेती के परिश्रम और समुद्र से जुड़े  व्यवसाय  के कारण जाना जाता है। यहां के लोगों में परिश्रम,लगन और ठहराव का समन्वय सहज ही देखा जा सकता है। विशाखापट्नम में ही ईश्वर भी रहता है।और ईश्वर कहां नहीं रहते हैं।  

मार्च के अंत में आइपीएल के ग्यारहवें सत्र की शुरूआत थी। दिल्ली डेयर डेविल्स का अभ्यास कैंप चालू हो गया था। अचानक कैंप के तीसरे दिन एक बेहद बेडोल, छोटे कद का गोल-मटोल तोंद लिए लड़का खिलाड़ियों के साथ मैदान पर आया। उसके हाथ में एक विशेष औजार था। क्रिकेट खेलने-खिलाने वाले ही समझ सकते थे कि वह औजार किस लिए है। वह अमेरिकी खेल बेसबॅाल से उठाया गया औजार था। इसका इस्तेमाल गेंद को तेजी से फेकने के काम आता है। पारंपरिक गेंदबाज को तो पूरा हाथ घुमा कर ही गेंद करने का अधिकार है लेकिन इस औजार से गेंद को तेजी से फेकने के काम में लिया जाने लगा है। यह अभ्यास में तेज गेंद खेलने-खिलाने के लिए बहुत उपयोगी रहता है। इसके सहारे बिना हाथ घुमाए गेंद को तेजी से फेका जा सकता है। यही औजार हाथ में लिए हुए ईश्वर डेयरडेविल्स के बल्लेबाजों को अभ्यास देने के लिए विशाखापट्नम से दिल्ली आया था। 

  खेल  का एक विशेष औजार बेसबॅाल

अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में तेज गेंदबाजों का बोलबाला रहता है। आइपीएल क्रिकेट की एक अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धा है और इसमें सभी देशों के चुनिंदा तेज गेंदबाज भाग लेते हैं। इसलिए तेज गेंदबाजी को खेलने का अभ्यास  जरूरी हो जाता है।

चेहरे पर हंसी और उम्मीद की आशा लिए ईश्वर मैदान पर अपनी कला दिखाने के लिए उत्सुक दिखा। मई महीने की भीषण गर्मी और उस पर तपती दोपहर। बल्लेबाजों को तेज गेंदबाजी का अभ्यास देने के लिए ईश्वर को कहा गया। गेंद को 140 किलोमीटर और उससे ज्यादा की रफ्तार से सही दिशा और सटीक टप्पे पर गेंद फेकने के लिए ईश्वर को बुलाया गया था। उसके गेंद फेकने की कला में वर्षों का कड़ा परिश्रम साफ दिखा। कंधे और उससे ऊपर तेजी से उठती गेंद फेक रहे थे। उस पर सही दिशा और टप्पे का शानदार मिश्रण था। चार घंटे तक ईश्वर लगातार ऐसी ही तेज गेंद फेकते रहे। एक के बाद एक बल्लेबाज थक कर पसीने से लथपथ नैट से बाहर आते रहे मगर ईश्वर को थकान का अता-पता नहीं था। उनमें गजब की कला और परिश्रम की लगन थी। 

पहले ही दिन के बाद दिल्ली डेयर डेविल्स की टीम प्रबंधन ने तय किया कि ईश्वर  को टीम का हिस्सा बनाएंगे। उनको टीम के साथ टीम के होटल में ही ठहराया गया। सवा महीने के आइपीएल के लिए उनका अच्छा मेहनताना तय किया गया। ईश्वर  की प्रतिभा और कला गजब की थी। सभी बल्लेबाज  उनकी गेंदों को खेलने के अभ्यास  से अपने को तैयार करना चाहते थे। भारत के लिए खेले गौतम गंभीर हों या ऑस्ट्रेलिया की ओर से खेलने वाले ग्लेन  मैक्स्वेल हों या इंग्लैंड की ओर से खेलने वाले जैसन रॉय या फिर न्यूजी़लैंड की ओर से खेलने वाले कॉलिन मुनरों हों, सभी ईश्वर  की प्रतिभा से अपने को परखना चाहते थे। इनमें से ज्यादातर सभी को अभ्यास  के दौरान ईश्वर  की गेंदो के सामने बल्ले छूटते देखा जा सकता था। यह सब उनकी गेंदों की तेजी और सही टप्पे की करामाती प्रतिभा के कारण था। ईश्वर पांच-छह बल्लेबाजों को अकेले ही थका कर हैरान करने का माद्दा रखते देखे गए।   

तैंतीस साल के ईश्वर ने अपने समय में विशाखापट्नम में जिला क्रिकेट खेली है। जैसा हर बच्चे का भारत के लिए क्रिकेट खेलने का सपना रहता है वही सपना ईश्वर का भी था। ज्यादा आगे क्रिकेट नहीं खेलने का उनको मलाल बेशक रहेगा। मगर अब ईश्वर ने इस बेसबॅाल के औजार से क्रिकेट खिलाड़ियों  को और टीमों को गेंद फेकने को ही अपना जीवनयापन का जरिया बना लिया है। पहले वे आंध्र प्रदेश और भारत के लिए खेले वेणुगोपाल राव को निजी तौर पर गेंद फेकने से गुजारा करते थे। फिर वे अन्य लोकप्रिय खिलाड़ियों को तेज गेंद खेलने का अभ्यास देते रहे हैं। आंध्र प्रदेश टीम के भी वे हिस्से रहे। सात-आठ साल पहले उनने विशाखापट्नम में रणजी मैच खेलने आयी मुंबई की टीम को भी तेज गेंद का अभ्यास दिया था।

तब के मुंबई कोच प्रवीण आमरे उनसे प्रभावित हुए थे। आमरे और श्रीराम दिल्ली डेयरडेविल्स के इस साल सहायक कोच थे। उन्हीं दोनों ने ईश्वर को दिल्ली बुलाया और टीम का हिस्सा बनने में मदद की। दुनिया की सबसे धनी क्रिकेट लीग में दिल्ली टीम का हिस्सा बनने से ईश्वर  भी अच्छे धनी हो गए हैं। मन के काम और तन की लगन से ही ईश्वर आज संजोए सपने को साकार होते देख रहा है। 

अभ्यास सत्र की समाप्ति और आइपीएल के अंतिम मैच से पहले एक मजेदार किस्सा  हुआ। अभ्यास  के सवा महीने तक बल्लेबाजों को ठीक से सांस भी न लेने देने वाली उछाल-भरी तेज गेंद फेकने वाले ईश्वर को उन्हीं बल्लेबाजों ने पैड-ग्‍ल्‍वस् –हैल्मेट पहना कर बल्ला पकड़ाया और नैट में उतार दिया। वह इसलिए किया कि सभी बल्लेबाज ईश्वर के लगातार सिर पर चड़ने वाली गेंदबाजी से खिन्न -परेशान आए हुए थे।और ईश्वर को उन्हीं की दवा पिलाने और वैसा ही मौहाल देना चाहते थे। बल्लेबाजों ने जमकर उछाल भरी तेज गेंद ईश्वर को की। गेंदे झेलने का मज़ा लेते ईश्वर के चेहरे पर वही मुस्कान बनी रही। सभी ने उस हंसी-मज़ाक के माहौल का जोरशोर से मज़ा लिया। 

मई महीने की कड़ी मेहनत-मशक्कत के बाद ईश्वर विशाखापट्नम के खुशनुमां माहौल में आनंद और आराम कर रहे हैं। खिलाडियों की तरह ईश्वर को किसी नीलामी में नहीं जाना होगा।  क्योंकि  उनकी कला बिकाऊ नहीं है। उनकी कला, उनके परिश्रम से गढ़ी गयी है। अगले साल कोई न कोई टीम ईश्वर को अपना हिस्सा बनाने में जरूर लगेगी। ईश्वर को अपने जीवन से यही छोटी सी आशा है।

               (संदीप जोशी पूर्व क्रिकेटर और सामाजिक-राजनीतिक विषयों के जानकार हैं।)




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