और जब जज हिस्ट्रीशीटर की तरह मारा गया...

आड़ा-तिरछा , , शनिवार , 25-11-2017


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वीना

 

क्या हिस्ट्रीशीटर गयासुद्दीन की हत्या का केस सुन रहे जज भी गयासुद्दीन हो गए?

गयासुद्दीन नहीं वो तो खोया था बृजमोहन खोया, हिंदू। 

तो फिर मारे क्यों गए? अगर वो जज हिंदू होते तो मारे जाते? उनकी यूं बेकद्री होती? 

नहीं, नहीं वो गयासुद्दीन ही था। पीछे लोया-खोया, सोया बृजगोपाल, बृजमोहन, हरिकिशन कुछ भी लगा लो पर आगे वो गयासुद्दीन ही था। हर कोई जो सत्ता की ताल बिगाड़कर अपनी ताल बजाता है गयासुद्दीन है। चाहे इंसाफ,इंसानियत-बराबरी के हक में बजाए या अपने फायदे के लिए। हर कोई गयासुद्दीन हो जाएगा। हर कोई।

नहीं। मैं तुम्हारी बात क्यों मानू? लाओ मुझे टाइम मशीन की चाबी दो। मैं खुद देखूं जाकर कि जज खोया खुद मर गए या वो गयासुद्दीन खोया बना कर मार गिराए गए। जैसाकि तुम कहते हो। 

मैंने टाइम मशीन पर बैठकर सीट बैल्ट लगाई और बटन दबाया 30 नवंबर 2014, नागपुर कवि भवन।

अरे गांडा, तेरे को पावर काए को दिया रे! पावर का इस्तेमाल कर, ऐश कर। पनामा, पैराडाइज हैवन में अकाउंट खुलवा। मजे कर मजे। बकैती ने समझाया।

मैं इंसाफ का तराजू नाइंसाफी की तरफ नहीं झुका सकता। जज खोया ने अपनी बात समझानी चाही।

जेंन्टलमेन खसेटी-बकैती आप इन्हें सुधारिये हम अपने रूम में वेट करते हैं। देशभक्त जज वन और देशभक्त जज टू ने कहा। 

क्यों इसे देशभक्त बनाने में हाथ नहीं बटाओगे? खसेटी ने घूंसा दिखाते हुए पूछा।

नो...नो...नो...हमारा कलीग है...हमें शोभा नहीं देता...यू गाइज प्लीज कैरी ऑन। बेस्ट ऑफ लक जज खोया। अफसोस! आप हमारी तरह समझदार नहीं है। यू आर रिसपॉन्सिबल फॉर ऑल दिस। प्लीज हमें धोखेबाजों की तरह मत घूरो। क्या है कि एक तो हमको गयासुद्दीन नहीं बनना था। दूसरा हम जानते हैं कि पांच साल में एक बार वोट का बटन दबाने से राजतंत्र लोकतंत्र नहीं बन जाता। तो संविधान, ईमानदारी, बराबरी की पट्टी काएको पढ़नी? चलिये, देशभक्त जज वन ने देशभक्त जज टू का हाथ खींचते हुए कहा। और दरवाजा बंद कर चलते बने।

खसेटी फिर जज खोया पर पिल पड़ा। बोल गयासुद्दीन बनेगा या देशभक्त जज तीन।

मैं इंसाफ की कुर्सी छोड़ दूंगा। अपने गांव में जाकर खेती कर लूंगा पर नाइंसाफी को इंसाफ नहीं कह सकता। जाने दो मुझे। 

जाने का है तेरे को...अपने गांव जाने का है...चल अपन छोड़के आते हैं तेरे को...तैयार तो हो जा...और फिर... जज खोया के होश जाते रहे... 

इस पर देशभक्ति का इंजेक्शन काम नहीं कर रहा डॉक्टर। ही इज देशद्रोही। 100 करोड़ के इंजेक्शन का ऑफर ठुकरा दिया। मुंहमांगी जमीन का इंजेक्शन रिजेक्ट किया। शानदार फ्लैटस जितने ये चाहता मिलते। यू नो वॉट? ही इज मैड! नहीं माना। हम तो इससे बहुत कम में देशभक्त बन गए थे। देशभक्त जज वन ने पसीना पौंछते हुए बताया।

आप कौन हैं? डॉक्टर ने पूछा। आई एम देशभक्त जज वन। एंड आई एम देश भक्त जज टू। और ये नागपुर का देशभक्त डॉक्टर है। पीछे से एक कड़कदार आवाज आई। नमस्कार डॉक्टर! मैं देशभक्त खसेटी। क्या है कि नाकपुर की हवा ही ऐसी है। ये किसी को देशद्रोही बनने का मौका नहीं देती। देशभक्त तो बनना ही पड़ता है। जिन्दा या मुर्दा ये बनने वाले की मर्जी। लोकतंत्र है भई, तय करने के लिए पूरा वक्त और अधिकार देते हैं हम।   

एक नजर डॉक्टर ने बेसुध पड़े जज खोया की तरफ देखा फिर देशभक्त जज टू की तरफ देखा। डॉक्टर मिस्टर देशद्रोही इज इनफेक्टेट विथ ऑनेस्टी, कॉन्सिट्यूशनल वैल्यूज  एंड इक्वल जस्टिस वायरस एटसेक्टरा...प्लीज सेव हिम। सॉरी हमारा देशभक्ति डिटेक्टर ईसीजी काम नहीं कर रहा है। इनकी बीमारी खतरनाक है। बड़े अस्पताल ले जाईये।

दूसरा अस्पताल। इस पर देशभक्ति का इंजेक्शन... जज वन ने फिर पहली कहानी दौहराई। आपका आफ्टर लाईफ डोज काम कर गया है सर। नॉउ ही इज फुल देशभक्त। सर्टिफाइड विथ पंचनामा। दूसरे अस्पताल के डॉक्टर ने खसेटी से कहा। ओके थेंक्स! खसेटी ने मुस्कराकर जवाब दिया।

अरे यार ये देशद्रोही भी न आधी रात को ही टपकते हैं पोस्टमार्टम के लिए। देशद्रोही माने राक्षस। राक्षसों की रात होती है दिन नहीं हा...हा...हा...जगत, भगत सफाई कर्मचारियों ने ठहाका लगाया। तभी पोस्टर्मोटम करने वाला डॉक्टर आया और जगत-भगत पर बरसा। कीप क्वाइट जगत-भगत, अपना काम करो। बॉडी में दिल के दौरे वाला चीरा लगाओ। जगत-भगत ने सुर मिलाया “यस सर।’’ चल हो जा शुरु जगत, लगा चीरा भगत बोला। ये ले ये... चीरा...और ये पड़ा दिल का दौरा... डॉक्टर साहब लग गया चीरा। जगत ने फाइल बनाते डॉक्टर को बताया। ओके। अब सिल दो। मैंने पोस्टर्मोटम रिपोर्ट बना दी है। यस सर। जगत-भगत ने एक आवाज में हुकुम बजाया। 

और इस तरह जज खोया को मुलजिम गयासुद्दीन बना दिया गया। जिसे बात न मानने पर कहीं भी धर-पकड़ कर ढेर किया जा सकता है और कोई पूछने-बोलने वाला नहीं। 

कोई देशभक्त ऐसा बोलता है! गयासुद्दीन को गलत मारा। देश के आकाओं को कातिल बोलता है कोई..?..बोलता है...! किसी और को बोलना है... आए सामने...चारों तरफ खामोशी...सा...रा देश... देशभक्त! है कोई और जो नागपुर के देशभक्ति स्कूल-कॉलेज के अलावा कहीं और का देशभक्ति प्रमाणपत्र सही मानता है..? खसेटी की ललकार पूरे देश में गूंज रही है...हर तरफ सन्नाटा...हा...हा...हा...चारो दिशाओं में बस खसेटी अट्टाहस....हा...हा...हा...हा...हा...हा... 

 










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