केरल लिंचिंग से सामने आया समाज का बर्बर चेहरा, केंद्र ने मांगी रिपोर्ट,सूबे ने किया मुआवजे का ऐलान

कहां आ गए हम... , नई दिल्ली, शनिवार , 24-02-2018


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। केरल के पलक्कड़ में एक मानसिक रूप से विक्षिप्त आदिवासी युवक के लिंचिंग की घटना को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया है। सरकार ने राज्य से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी है। इस बीच राज्य सरकार ने युवक के परिजनों को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है।

केंद्रीय आदिवासी मामलों के मंत्री जुयाल ओरम ने बताया कि सूबे के मुख्य सचिव से मामले की रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया है इसके साथ ही इस मामले में सरकार ने क्या कदम उठाया है उसकी भी जानकारी देने का निर्देश दिया गया है। पीटीआई ने इसकी जानकारी दी है।

गौतरलब है कि बृहस्पतिवार को मानसिक तौर पर विक्षिप्त मधु नाम के इस आदिवासी युवक की खाना चुराते हुए पकड़ लिए जाने के बाद लोगों ने पिटाई कर दी थी। जिसके बाद उसकी मौत हो गयी थी।

ओरम ने कहा कि “हमारे मंत्रालय ने घटना और इस मामले में उठाए गए कदम के बारे में मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी है।”

इस बीच राज्य सरकार ने पीड़ित युवक के परिजनों के लिए 10 लाख के मुआवजे का ऐलान किया है। ट्विटर पर इसकी जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री के दफ्तर ने कहा कि “केरल की सरकार ने पलक्कड़ में भीड़ के हमले में मारे गए आदिवासी युवक के परिवार को 10 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है। सीएम ने मुख्य सचिव को उस रकम को जल्द से जल्द परिजनों को देने का निर्देश दिया है।”     

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में टार्चर के बाद लगने वाले शॉक से पीड़ित की मौत की बात कही गयी है। रिपोर्ट में उसके आंतरिक जगहों के साथ ही सिर और पीठ में चोट की बात दर्ज है। इससे भी आगे रिपोर्ट उसकी पिटाई की भी पुष्टि करती है।

मामले में पुलिस ने 10 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। इसमें उबैद टीयू नाम का वो शख्स भी शामिल है जिसने घटना की वीडियोग्राफी की थी जो पूरे सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। 

इस घटना ने एक बार फिर भारतीय समाज के बर्बर चेहरे को सामने ला दिया है। घटना के केरल में होने से लोगों की चिंता और बढ़ गयी है। क्योंकि आमतौर पर केरल को एक पढ़ा लिखा और तमाम सूबों से तमाम मामलों में आगे बढ़ा हुआ समाज माना जाता है। लेकिन वहां के समाज में इस तरह की असहिष्णुता का प्रदर्शन किसी को भी अचरज में डालने वाला है। ये उस भीड़ की पूरी मानसिकता पर सवाल खड़ी करती है जिसने महज एक किलो चावल चुराने पर युवक की जान ले ली। ऊपर से पूरे मामले को एक शौर्य और मनोरंजन की घटना में तब्दील कर देना उससे भी ज्यादा दुखद है। जिसमें लोगों ने युवक को बचाने की जगह उसके साथ सेल्फी लेकर उसे वायरल करना ज्यादा जरूरी समझा।

ये भारतीय समाज में व्याप्त घृणा और नफरत के साथ ही उसकी बढ़ती क्रूरता का भी परिचायक है। जिस युवक की मानसिक स्थिति पर दया और करुणा का भाव उभरना चाहिए था।

जिसके पेट की आग बुझाने के लिए एक किलो चावल चोरी की घटना को उसकी मजबूरी का हिस्सा समझा जाना चाहिए था। ऐसा समझने की बजाय पूरे मामले को नफरत, द्वेष और घृणा की अपनी पूरी भड़ास निकाले का जरिया बना दिया गया।

ये बताता है कि भारतीय समाज एक बीमार समाज में तब्दील होता जा रहा है। और इसमें अपने किस्म की रूग्णता हावी होती जा रही है। इस घटना से ये भी साबित होता है कि लोग अपने व्यक्तिगत जीवन में बेहद परेशान हैं और कुंठा उनके जीवन में अपना घर बनाती जा रही है। और इस तरह का कोई भी मौका पाने पर वो ऐसा ही बर्बर रूप धारण कर लेती है। 










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