लेनिन पर सरकारी धन की फ़िज़ूलख़र्ची करने वाले माणिक पर चलाया जाए देशद्रोह का मुकदमा!

आड़ा-तिरछा , , शनिवार , 10-03-2018


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वीना

प्रधानसेवक ने त्रिपुरा पर अधिकार को विचारों की विजय बताया है। 25 साल की ग़रीब माणिक सरकार का मजबूत क़िला प्रधान सेवक ने केवल 5 साल की अमीरों की चौकीदारी की बदौलत जीत लिया है।

सुनने में आया है कि त्रिपुरा के लोग प्रधान सेवक की पार्टी की जीत को रोज़ी-रोटी के सवाल की जीत मान रहे हैं। माणिक सरकार की प्रधान सेवक की तरह लगाई-बुझाई की आदत नहीं थी। सीधे स्वभाव अपने शिक्षा-स्वास्थ्य सुधार पर लगे रहे। 

सो बेचारे त्रिपुरा वासियों ने शायद साहेब के अतीत-वर्तमान के बारे में सुना-जाना न हो। नहीं तो उन्हें पता होता कि 2002 से लेकर अब तक साहेब का अतीत और वर्तमान मेहनत की रोटी कमाने के लिए रोज़गार की मांग करने वालों को जाति-धर्म के साइनाएड से चुप कराने का रहा है।  साहेब को मेहनताने की एवज में 10-15 हज़ार न्यूनतम वेतन मांगने वाले, महज़ रोटी-दाल से पेट भर कर सुख की नींद सोने की इच्छा रखने वाले मज़दूर पसंद नहीं हैं। फ़सल की लागत के ऊपर केवल आधे मुनाफे में ही संतुष्टि पा जाने वाले किसानों की गलीच इच्छाओं से उन्हें खीज होती है। 

साहब अगर इन छोटी सोच के मज़दूरों-किसानों के बहकावे में आ जाएं तो एक दिन में केवल एक ही पोशाक़ से काम चलाना पड़ सकता है। अंबानी-अडानी, टाटा-बिड़ला, नीरव मोदी-मेहुल चौकसी, कोठारी-मेहता, विजय माल्या, ललित मोदी की तरह हज़ारों-लाखों करोड़ की चोरी सीना ज़ोरी करो तो कुछ बात बने। ताकि साहेब दिन भर में कम से कम 6-7 क़ीमती पोशाकें पहनकर फैशन इंडस्ट्री को बढ़ावा दे सकें। भई इससे दो-चार सौ लोगों को रोज़गार भी मिल जाता है। पार्टी प्रचार के लिए हेलिकॉप्टर, हवाई जहाज़ के साथ-साथ लाखों हज़ार करोड़ काला पार्टी फंड जुट जाता है।

फटीचर माणिक सरकार तो दो धोती-कुर्ता में सालों निकाल लेते होंगे। रोज़ एक धोते-सुखाते होंगे, एक पहनते होंगे। अब 25 साल धोने-सुखाने में गंवा दोगे भाईयों-बहनों तो विदेशी निवेश मांगने कब जाओगे? फिर ऐसा करके भी कौन सा आप जनता को संतुष्ट कर पाए। जल-जंगल-ज़मीन में जंग लगाया सो अलग। 

ख़ैर, अब भी क्या बिगड़ा है। अपना गोदी मीडिया तैयार है मेरे विकास के जुमले को कवर करने के लिए। और पूंजीपति भाई बेताब हैं त्रिपुरा की धन संपदा को विदेशी बैंकों में सुरक्षित रखने के लिए।

15 साल गुजरात को बनाए रखा और अब 4 साल से पूरे देश को बिना मजूरी की संघ सेना बना रहा हूं। देखना सब कैसे खाली पेट मरते-खपते, बेहोश होते राम मंदिर बनाने दौड़ेंगे, मेरी एक आवाज़ पर। अगर मैं आवाज़ दूं तो। घबराओ नहीं, मैं ऐसा नहीं करूंगा। विचार भुनाने के लिए होता है लक्ष्य प्राप्ति के लिए नहीं। माणिक सरकार ने जनता का दो-चार लाख खर्च किया भी तो कहां? किसी विदेशी का बुत बनाने पर! 

क्या समझे थे... हमारे रहते कोई लेनिन-फेनिन का भूत काफ़ी है भड़काने के लिए- कि हिंदुस्तान के मज़दूरों एक हो, जाति-धर्म छोड़ो, तभी पेट भरेगा, तन ढकेगा। हम पूरा देश लुटवा देंगे साबित नहीं कर पाओगे। और तुम्हारी लेनिन स्थापना के टुटपुंजिया खर्चे पर ही वॉट लग सकती है। चाहे नमूना देख लो। गोदी मीडिया हो जा शुरू-

गोदी मीडिया एंकर- अगर त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का कमल नहीं खिलता तो पता ही न चलता कि सादगी का जीवन जीने वाले और सबसे ग़रीब मुख्यमंत्री कहलाने वाले माणिक सरकार ने फ़िज़ूलख़र्ची का कीचड़ भी जमा किया हुआ है। जी हां ये दो-चार रूपये की बात नहीं....कम से कम दो-चार लाख रूपये की फ़िज़ूलख़र्ची का मामला है..! 

अफसोस की बात ये है कि ये फ़िज़ूलख़र्ची की भी गई तो किस पर? एक विदेशी रूसी लेनिन नाम के आतंकवादी पर! जी हां दुनियाभर में समाजवाद के लिए जाना जाने वाला क्रांतिकारी व्लादिमिर इल्यीच ‘लेनिन’ भारत के लिए किसी नक्सली-माओवादी आतंकवादी से कुछ नहीं है। 

हम देश की भोली-भाली जनता को सूचित करना चाहते हैं कि मज़ूदर मालिक की बराबरी की बात करने वाले लेनिन के विचार भारत भूमि पर कतई बर्दाश्त नहीं किए जा सकते। 

लेनिन की विचारधारा से न केवल मनुवाद के परखच्चे उड़ सकते हैं। बल्कि देश के मज़लूम-भूखे-नंगे महान उद्योगपति मुकेश अंबानी व उनके 10 हज़ार करोड़ की लागत से बने महलनुमा बंगले पर कब्ज़ा करने पर आमादा हो सकते हैं। 

अगर लोग लेनिन के बारे में जान जाएंगे तो वो ये भी पता लगा लेंगे कि कैसे अंबानी ने अपने बंगले की हर ईट किसानों-मज़दूरों, ग़रीबों के हक़ और मेहनत की कमाई लूट कर लगाई गई है। भात-भात करती भूख़ से मरने वाली झारखंड की आदिवासी संतोषी के हिस्से का राशन एंटीलिया के गोदामों में पड़ा सड़ रहा है। और ये काम अंबानियों ने अकेले अपने दम पर नहीं बल्कि सभी सरकारों की मिली भगत से किया है।

हम नहीं जानते कि सरकार-पूंजीपतियों की मिलीभगत का ये खुफिया राज़ कार्ल मार्क्स नाम का जर्मन दाढ़ी वाला बुड्ढा कैसे जान गया? कैसे उससे होते हुए फिर दूसरे विदेशी रूसी लेनिन तक पहुंच गया? और फिर कैसे लेनिन ने हमारे देश के कुछ बुद्धिजीवियों की बुद्धि भ्रष्ट कर दी? 

राहत की बात ये है कि अभी तक ये बुद्धिजीवी उस भाषा को ईजाद नहीं कर पाए हैं जिसमें कि आम जनता तक ये राज़ डीकोड किया जा सके। (कान में प्रोड्यूसर - अबे मरवाएगा क्या? कोड-डीकोड वापस ले)

गोदी एंकर घबराते हुए - माफ कीजिये समाजवाद का विदेशी वायरस हमारा स्टूडियो हैक करने की कोशिश कर रहा है। मेरी आखि़र में कहीं गई चार लाईने आप अपने दिमाग़ से डिलीट कर दें, मिटा दें। धन्यवाद।

तो असली मुद्दा ये है कि आज हमारे महाराष्ट्र के किसान भाई जो नासिक से मुंबई पदयात्रा करने पर मजबूर हैं उसके लिए माणिक सरकार ज़िम्मेदार हैं। 

महाराष्ट्र के किसानों का 34 हज़ार करोड़ का कर्ज़ माफ किया जाना है। जेटली जी ने अभी-अभी इस बजट में 80 हज़ार करोड़ रूपये बैंकों को दान दिया है। उद्योगपतियों के बट्टे खाते को कम करने के लिए। कुल आठ लाख करोड़ एनपीए (नॉन परर्फोमिंग ऐसेट) है देशवासियों। मोदी-जेटली जी को पूरा कर्ज़ चुकाने के लिए और पांच साल चाहिये। आखि़र तीन लोगों की मेहनती सरकार केवल पांच साल में कितना एनपीए चुका सकती है? जबकि माणिक सरकार जैसे फ़िज़ूलख़र्च भी देश में मौजूद हों तो।

अगर विदेशी लेनिन की मूर्ति पर जो दो-चार लाख का खर्चा किया माणिक सरकार ने वो नहीं किया होता तो कम से कम इतनी राशि इन किसानों के कर्ज माफ़ी में काम आ सकती थी। हम चाहते हैं कि देश के किसानों के साथ ये विश्वासघात बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिये।

मार्च करते किसान।

बारह मार्च को मुंबई विधान सभा का घेराव करने वाले किसान अगर आपे से बाहर हो गए तो इसका ज़िम्मेदार कौन होगा? जी हां, माणिक सरकार...केवल माणिक सरकार... देश में हिंसा के हालात पैदा करना देश द्रोह है। इसिलए हमारा मानना है कि माणिक सरकार पर देशद्रोह का मुकद्मा चलाया जाए।

(वीना फिल्मकार और पत्रकार हैं।)






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