ताजपोशी के बाद भी रूपानी को सता रहा है मेवानी का भूत

आड़ा-तिरछा , , मंगलवार , 02-01-2018


mevani-rupani-gujarat-dalit-assembly-amit-shah

बसंत रावत

गुजरात के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल को मलायीदार वित्त मंत्रालय न मिलने के कारण दो-तीन दिनों तक चले अति नाटकीय राजनीतिक भगदड़ के बाद मंत्री जी के कथित विद्रोह को अमित शाह नियंत्रित करने में तो कामयाब रहे, लेकिन मुख्यमंत्री विजय रूपानी की चिंता अभी तक बनी हुई है। आलम ये है कि रूपानी अपनी जीत के बाद दूसरी बार हुई ताजपोशी का जश्न तक नहीं मना पा रहें हैं। उनकी रातों की नीद उड़ गयी है। मुख्यमंत्री की चिंता का कारण उप मुख्यमंत्री के दिल में भड़क रही बग़ावत की आग नहीं, बल्कि युवा आक्रामक दलित नेता जिग्नेश मेवानी की बढ़ती लोकप्रियता है। मेवानी का ख़ौफ़ किसी प्रेत की तरह उन्हें सता रहा है। रूपानी बहुत विचलित बताये जाते हैं। 

फेंकू न्यूज़ संवाददाता को सरकारी सूत्रों से मिली अति गोपनीय जानकारी के मुताबिक़ रूपानी सरकार जल्द ही मेवानी को एक राजनैतिक आपदा घोषित कर सकती है। इसके अलावा एक दूसरा विवादित प्रस्ताव भी विचाराधीन है। इस प्रस्ताव के तहत मेवानी के उग्र बयानबाज़ी के आधार पर उन्हें संभावित आतंकवादी या राष्ट्रद्रोही घोषित किया जा सकता है। इस सिलसिले में रूपानी सरकार नागपुर और दिल्ली स्थिति झंडेवालान में रह रहे राष्ट्रभक्ति के अधिकृत लंबरदारों से सम्पर्क बनाए हुए है। पिछले हफ़्ते अहमदाबाद के गोमतीपुर इलाक़ों में अपने रोडशो के बाद महिलाओं की शिकायत पर खुले में बिक रही शराब के अड्डों का जब से मेवानी ने घेराव कर, शराब का धंधा बन्द करा दिया, सरकार और पुलिस दोनों सदमे में हैं। 

फ़िलहाल सुना है इस मसले में सरकार एक ह्वाइट पेपर निकालने के मूड में है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़ सरकार गुजरात में शराबबंदी की नीति की नाकामयाबी का ठीकरा 22 सालों से सत्ता से बाहर रह रही कोंग्रेस के सिर फोड़ने वाली है। कांग्रेस पार्टी के असहयोग के चलते भाजपा सरकार गांधी जी के शराबबंदी के सपने को पूरा नहीं कर पायी। प्रदेश भर में जो हज़ारों की तादाद में दिव्य सोमरश के तस्कर फल-फूल रहे हैं ये सब कांग्रेस की देन हैं। और क्योंकि बड़गांव सीट से मेवानी की जीत कांग्रेस के समर्थन से इंडिपेंडेंट प्रत्याशी के तौर पर हुई है, इसलिए दलित नेता को भी कसूरवार समझा जाना चाहिए। ऐसा रूपानी सरकार का साफ़ तौर पर मानना है। मेवानी के समर्थक इसे एक हसीन मज़ाक़ मानते हैं और इस आरोप को रूपानी सरकार के दिवालियापन की निशानी मानते हैं।

मेवानी ने भाजपा की नाक में इस क़दर दम कर रखा है कि फ़ौरी तौर पर उठाए गए क़दमों में से पहला क़दम जो नवगठित सरकार ने उठाया है वो है विश्व हिंदू परिषद और कुछ आक्रामक गौ रक्षक दलों से अनाप-शनाप बकने की क्षमता धारकों को भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा के पास ट्रेनिंग के लिए भेजना। ताकि वो दिल्ली से लौटने के बाद आने वाले समय में टेलीविज़न टॉक शो में मेवानी का मुक़ाबला के सकें। गाँधीनगर के राजनैतिक गलियारों में हड़कंप, अफरातफरी का माहौल किसी भी अंधे को दिखाई दे सकता है । यही वजह है कि बीजेपी नेताओं, खासकर मंत्रियों और अफसरों की समझ मे ये नहीं आ रहा कि दलित आंदोलन की इस सुनामी से कैसे निपटें। सरकार के पास बहुत से सुझाव आ रहे हैं। पंडितों को बुलाया जा रहा है। यज्ञ और हवन की तैयारी पर भी विचार किया जा रहा है। गुजरात में बढ़ते दलित आंदोलन के राजनैतिक प्रदूषण के शुद्धीकरण करने के लिए, काशी और हरिद्वार से धर्मगुरुओं का एक जत्था जल्द ही गुजरात में अवतरित हो सकता है। उधर पहले से ही हरिद्वार से बाबा रामदेव ने हवन के लिए शुद्ध स्वदेशी गाय का घी भेजने का आश्वासन दिया है। 

हॉलाकि नवगठित लुंजपुंज सरकार ने अभी तक साफ नहीं किया है कि हवन में आहुति डालने के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय नेता, बीजेपी शासित राज्यों से मुख्यमंत्री शामिल होंगे या नहीं। प्रधान सेवक भी आएंगे या नहीं, इस बात की अभी तक पुष्टि नहीं हो पायी है। रूपानी सरकार ने कार्यभार लेने के बाद जो सबसे अहम फ़ैसला लिया है वो मेवानी को लेकर ही है। आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनज़र मेवानी को नियंत्रित करने के लिए संजय जोशी ऑपरेशन फ़ार्मुला को काम में लाने पर विचार किया जा रहा है। इसमें किसी को कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए अगर जल्द ही मेवानी किसी सेक्स सीडी के मुख्य किरदार के रूप में दिखें। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री इस फ़िल्म का महात्मा मंदिर में प्रीमियर भी रख सकते हैं।

सूत्रों की मानें तो मेवानी पर निगरानी रखने के लिए मुख्यमंत्री ने एक स्पेशल सेल का गठन कर दिया है। ये सेल मेवानी के फ़ोन टैप करने के अलावा उसके भाषण और गतिविधियों पर नज़र रखेगा। वो किस से कब मिलता है, उसकी गर्लफ़्रेंड किस कम्यूनिटी की है, कौन सा नया कार्यक्रम करने वाला है, जेएनयू में कितने “देशद्रोहियों” के सम्पर्क में है। मेवानी के ख़िलाफ़ किस दलित का इस्तेमाल किया जा सकता है। ये इस सेल का मुख्य टास्क है । स्पेशल सेल को हिदायत है कि मेवानी को विधानसभा के पहले सत्र में शामिल होने दिया जाए। तब तक उसे न छेड़ा जाए । मेवानी के आक्रामक रूख को देखते हुए ठानगढ़ दलित हत्या कांड की रिपोर्ट को मजबूरी में टेबल करने की सरकार सोच रही है। एक उच्च अधिकारी को फ़ाइल से पांच साल पुरानी धूल हटाने के लिए काम पर लगा दिया गया है। 

(बसंत रावत वरिष्ठ पत्रकार हैं और अहमदाबाद में दि टेलीग्राफ के ब्यूरो चीफ रह चुके हैं। आप आजकल अहमदाबाद में ही रहते हैं।)

 










Leave your comment











Rahul Gohil :: - 01-10-2018
Jay bhim

shailesh khot :: - 01-03-2018
Because of u and ur speech my friends stopped to speak with me ...we r loosing our credibility because of u...U bullshit

shailesh khot :: - 01-03-2018
this news channel is run by jignesh chacha....jignesh na brahman jita na maratha na Dalit...jita to sirf jignesh kal ka lounda hinsa failake gaya...khud pehnta hai RayBan ka chashma aur janta ko bargalata hai !!!.....If you want to do something for us...ask us to take education and build own position