मोदी की चाय, केतली, मगरमच्छ नुमा पकौड़ा और भागवत का “सैन्य भरोसा”!

आड़ा-तिरछा , , सोमवार , 12-02-2018


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अंशुल कृष्णा

एक लेखक का पीएम मोदी के नाम खुला पत्र:

आदरणीय मोदी जी,

अभी अभी केतली से चाय लेकर एक मगरमच्छ नुमा पकौड़ा हाथ में लिया ही था कि एक खबर देखकर चौंक गया, खबर थी कि आप फिलिस्तीन में हैं और वहां 6 अहम करारों में एक करार नेहरू स्कूल को लेकर भी है, वही नेहरू जो प्रधानमंत्री न होते तो देश में कोई समस्या ही न होती, बस पकौड़े, चाय, आप और हम होते, वैसे नेहरू को लेकर मैं आपसे सहमत हूं, वो आदमी वाकई बुरे थे, देखिये न तो उनका सीना 56 इंच का, और न ही उन्होंने कभी चाय बेची, न ही कोई दँगा करवाया, और न ही किसी करन थापर के यहां पानी पिया, बस इसरो ही तो दिया, जो बस 56 हजार किमी तक रॉकेट करता है, क्या कहा? नंबर गलत है, अच्छा वैसे 600 करोड़ वाला नंबर भी गलत है, हम दोनों एक जैसे हैं,

हाँ तो मैं कह रहा था कि नेहरू अच्छे आदमी नहीं थे, अच्छा आदमी तो वो होता है जो सदन में एक महिला की हँसी का मजाक बनाते हुए उसकी तुलना रामायण के किसी पात्र से कर दे और वो भी तब जब उसकी अपनी धर्म पत्नी किसी दुर्घटना में जख्मी हो गयी हो, धर्म जो राजनीति में कब आया ये आपसे बेहतर कौन जानता होगा, और बीवी -छोड़िये वो फिर कभी ....आपने जब नेहरू पटेल वाली बात कही तो कई वेबपोर्टल्स ने छापा कि आपकी इतिहास की जानकारी ठीक नहीं है, वो जो कह रहे हैं वो ही कुछ कुछ मैंने भी पढ़ रखा है लेकिन मैं उनसे सहमत नहीं हूँ क्योंकि उनमें से किसी के पास एंटायर पोलिटिकल साइंस की डिग्री नहीं है, जबकि आपके पास तो ... अच्छा अच्छा उस पर नहीं बोलना सॉरी सॉरी ...

वैसे मैं आपका फैन हूँ क्योंकि जिस वक्त रोजगार भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे पर इराक में क्रांति मची है, आपने उन सब मुद्दों का पकौड़ा बनाकर सारी क्रांति खुद ही कर डाली, वैसे मैं बस एक बात पर आपसे असहमत हूँ आप देश के तीन महापुरुषों का जिक्र करते हैं –गांधी, बुद्ध और दीन दयाल, ये भी कोई महापुरुष हुए, न तो इनके बेटे ने 80 करोड़ कमाये, न ही किसी का नाम DDCA में आया, न ही राफेल में, और न ही किसी जज की हत्या के केस में, तो कैसे महापुरुष हो सकते हैं मैं इससे असहमत हूँ, देश मे सिर्फ तीन लोग ही महापुरुष हो सकते हैं, आप, अमित और जेटली, अब ये तो मानना पड़ेगा आपको, आपको चाय पकौड़े और केतली की कसम !!

मोदी जी मैं खुद को किसी विचारधारा से कभी जोड़ ही नहीं पाया, क्योंकि एक विचारधारा है जिससे आदिवासी, दलित और पिछड़े छूट जाते हैं तो दूसरी विचारधारा है जिससे कश्मीरी पंडित छूट जाते हैं, और साला हम दोनों (मैं और आप) से तो दोनों ही छूट जाते हैं, क्या करें पकौड़ा ही इतना अच्छा है और शुक्रिया इस केतली का जो चाय अब तक गर्म है,

मोदी जी जिस वक्त सीमा पर शहीदों की संख्या बढ़ती जा रही है,एक अस्पताल से वो किसी आतंकी को भी छुड़वाकर ले गए, आज भी कुछ सैनिक शहीद हुए, सुना 5 में से 4 मुसलमान थे, लेकिन वो मैं नहीं बताऊंगा, हिन्दू राष्ट्र बनाना है आखिर, मोदी जी मुझे तो बहुत डर लग रहा था, लेकिन मैंने किसी से कुछ कहा नहीं क्योंकि मेरे पास 1984 वाले सवाल का जवाब नहीं था लेकिन मुझे मोहन भागवत जी ने बहुत हिम्मत दी, उन्होंने जिस तरीके से देश की सेनाओं पर भरोसा तोड़ते हुये तीन दिन में संघ के सेना बनाने की बात कही है, मेरे सभी बागों में बहार आ गयी है, सीना मेरा भी बढ़ता ही जा रहा, बस डर है कि कहीं फिलिस्तीन तक न पहुँच जाए, मोहन भागवत ने जब से तीन दिन वाला बयान दिया है,

तब से पाकिस्तान पूरा खाली हो चुका है, चीन के लोग पैकिंग करने लगे हैं, पुतिन अभी खाकी नेकर पहने मिला, तब मैंने ही उससे कहा -हाफ नहीं फुल पहन के आओ, सद्दाम हुसैन फिर से जिंदा होकर कांप रहा है, ट्रम्प और ओबामा तोगड़िया वाली जगह पर छुपे हुए हैं, विदेश की धरती पर सिर्फ आपका ही नहीं भागवत का भी डंका बज रहा है लेकिन यहाँ का वामी मीडिया हमको ये बताता ही नहीं,

अच्छा चलता हूँ मोदी जी, सुबह से धूप नहीं निकली तो कपड़े नहीं सूख पाये, अगर पटेल प्रधानमंत्री होते तो जरूर सूख जाते, ख्याल रखिये अपना, आप जब तक उधर से मंदिर का उद्घाटन करके लौटिए, तब तक मैं आपके हिस्से का झूठ बोलकर लोगों का बताता रहूँगा -मंदिर वहीं बनाएंगे!! नेहरू की फ़ोटो भी शेयर करनी हैं अब तो काम बहुत बढ़ गया है मोदी जी, ये वामिये पता नहीं कहाँ से लीलाधर वाजपेयी का जिक्र खोज लाये, और कहां से बजराज मधोक की किताब खोल निकाले, मैं आज कल इनसे बहस नहीं कर पाता, फंस जाता हूँ तो फोटोशॉप फ़ोटो बहुत काम आतीं हैं ,

धन्यवाद

-अंशुल कृष्णा

(लेखक सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और ज्वलंत सवालों पर लिखते रहते हैं। ये लेख उनके फेसबुक से साभार लिया गया है।)


 






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