…..यह दर्शन करने आया है या दर्शन देने?

आड़ा-तिरछा , , शनिवार , 18-05-2019


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अमित मौर्य

माता पार्वती:

हे भोले, हमारे धाम में यह कौन आ गया?

भोलेनाथ:

क्यों क्या हो गया अर्धांगिनी? क्यों इतनी घबराई हुई हो?

माता पार्वती:

घबरा नही रहीं हूँ प्रभु थोड़ा आश्चर्य हो रहा है, कि पृथ्वीलोक के लोग भले ही कितने वीआईपी हों मगर यहां सामान्य बनकर आते हैं। यह तो रेड कार्पेट पर चल रहा है।

भोलेनाथ:

जाने दो अर्धांगिनी वह भारत देश का प्रधान-मंत्री है, जो खुद को प्रधान सेवक कहता है, इतना तो उसका हक है।

माता पार्वती:

प्रधान-मंत्री रहकर प्रधान सेवक का ढिंढोरा क्यों प्रभु?

भोलेनाथ:

दरअसल भारत में सहानुभूति एक आवरण होता है जिससे खुद को ढक लेने पर जनता किसी की गलतियों को नजरअंदाज कर उस पर स्नेह लुटाती है, यह उसी का लाभ लेता है। इसलिए शीर्ष पर रहकर खुद को अदना दिखाता है, जैसे कोई महल में रहकर गरीब दिखने के लिए घर के दरवाजे पर फटे बोरे का पर्दा लगा दे।

माता पार्वती:

आश्चर्य से, हे प्रभु ऐसा भी...मगर यह भक्ति करने आया तो इतने कैमरे फ़ोटो सोटो क्यों?

भोलेनाथ:

हंसते हुए...अरे पगली उसकी माया सब नहीं समझते। कल चुनाव है,  हमारे गंगा किनारे वाली नगरी में जहां से यह उम्मीदवार है। अब यहां आया है मेरे यहां शीश झुकायेगा। दुनिया को टीवी पर दिखायेगा। तब लोग इसे परम सनातनी मानेंगे न। वरना बिन कैमरे दर्शन का लाभ कैसा ?

माता पार्वती:

प्रभु तब तो इसका बहु-रूप है जब दिखावा ही करना है, तो दर्शन का क्या मतलब ?

भोलेनाथ:

प्रिये आजकल दिखावटी, बनावटी और बाजारवाद का जमाना है, जिसे वह बखूबी समझता है। आज जो दिखता है वही बिकता है।

माता पार्वती:

हे प्रभु...तब तो यह भावनाओं का व्यापारी है। यह आपका भक्त कैसे हो सकता है?

भोलेनाथ:

हे प्रिये मौन रहो कुछ ज्यादा न बोलो 

वरना इसके भक्त इस पर अंगुली उठाते सुन लिए तो तुम्हारे लिए भी कमियां गढ़ लेंगे।

माता पार्वती:

प्रभु मैं समझी नहीं, यह कौन है यह तो जान गयी मगर क्या है, यह स्पष्ट करें। कौन है इसका भक्त? मैं तो यही जानती आई हूं कि भक्त तो सिर्फ देवता के होते हैं। मनुष्य के कैसे भक्त ?

भोलेनाथ:

लम्बी सांस लेते हुए...मत पूछो प्रिये यह आंख वाले अंधों का भगवान हुआ है, जो इसकी लच्छेदार बात पर वाह-वाह करते हैं,

उन्हें इसके कार्य से कोई मतलब नही है। उन्हें लगता है यह युगपुरुष और प्रवर्तक है। इसके बिना देश खत्म हो जाएगा। अगर आंख वाले इन अंध भक्तों को कोई समझायेगा। सभी अन्धभक्त उसे द्रोही बताएंगे।  खैर छोड़ो। वरना क्या पता मुझ पर भी अंध भक्त सवाल खड़े कर दें कि यह नन्दी पर बैठ कर पशु पर अत्याचार कर रहे हैं। इन पर चढ़ाए जाने वाले जल की वजह से देश में पानी की कमी हो रही है।

इनके हिमालय पर रहने की वजह से ग्लेशियर पिघल रहा है। वगैरह....वगैरह।

माता पार्वती:

बस-बस प्रभु समझ गई। मैं भी सती हुई थी। अंधभक्त यह भी कह सकते हैं कि खैर जाने दीजिए जाइये उसे आशीर्वाद दीजिये।

भोलेनाथ:

हां प्रिये, मगर थोड़ा असमंजस है कि यह दर्शन करने आया है या दर्शन देने?

देखूं। सबको अच्छे दिन का वादा किया था, शायद खुद के अच्छे दिन मांगने आया हो। 

(अमित मौर्य बनारस में एक दैनिक अखबार निकालते हैं।)

 








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