क्योंकि उनका देश भी मैं हूं, उनका भगवान भी मैं हूं!

आड़ा-तिरछा , , रविवार , 06-01-2019


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भूपेश पंत

चक्करवर्ती सम्राट स्मार्टफ़ोन पर डाउनलोड हुए वीडियो गेम में पूरी तल्लीनता से डूबे हुए थे। इस गेम के जरिये विपक्षी रागा को थप्पड़ मारने का कोई मौका वो चूकना नहीं चाहते। ये गेम उन्होंने खुद और शाही विदूषक की पसंद पर बनवाया है जिसमें उनके राजनीतिक विरोधी इतना भ्रष्ट हो जाते हैं कि देश को गिरवी रख कुछ हथियार खरीद लेते हैं। सम्राट इन भ्रष्ट हथियारों के विरुद्ध देश हित में उनसे भी भ्रष्ट बमवर्षक विमानों की खरीद करते हैं जिस पर विरोधी रागा और उनके समर्थक सम्राट पर अपने बिनाफोर्स तोपों और बैस्ट लैंडेड विमानों से बमवर्षा करते हैं लेकिन वो बम देशहित की लक्ष्मण रेखा पार करते ही पुष्प वर्षा में बदल जाते हैं। सम्राट को इससे आने वाले चुनावों में बड़ी जीत की उम्मीद है क्योंकि गेम के शुरू होते ही राज्य की सारी आबादी देशहित में उनको फॉलो कर रही है।

सम्राट (मोबाइल की टच स्क्रीन पर तेजी से उंगलियां फिराते हुए) - 'वाह सम्राट वाह। क्या गज़ब का खेल बनाया है हमने। रागा और उसके सहयोगी इस खेल में हमसे नहीं जीत पाएंगे क्योंकि हम लोकतंत्र के रक्षक बने हैं और वो देशद्रोही।'

'वाह सम्राट वाह... (सम्राट का मुंहलगा शाही विदूषक हाथ में स्मार्टफ़ोन लिये कक्ष में दाख़िल होते हुए)... राज्य में चारों ओर आपके इस ऑनलाइन गेम के चर्चे हैं और देश के नाम पर भक्त मर मिटने को आतुर हैं।'

सम्राट (उत्सुकता से...) - 'जरा विस्तार से बताओ कि इस गेम को खेल कर हमारा प्यारा लोकतंत्र सुरक्षित रह पाएगा या साठ साल राज कर चुके देशद्रोही फिर सत्ता पाएंगे।'

विदूषक - 'अरे नहीं सम्राट, पिछले साढ़े चार सालों में हमने राज्य की जन्ता को बेवकूफ़ी भरे मनोरंजन के बहुतेरे साधन उपलब्ध कराये हैं। उन्हीं का मिश्रण बना कर हमने यानी लोकतंत्र ने ये गेम तैयार किया है... इसे तो हिट होना ही है।'

सम्राट (गर्वीली मुस्कान के साथ) - 'गेम को अपने मुताबिक ढालने में तो वाकई हमारा कोई जवाब नहीं। हमने इस गेम में भी देशद्रोही रागा और उसका राग अलापने वालों को नेस्तनाबूद कर देना है।'

फोन की स्क्रीन पर देश भक्ति का गेम राष्ट्रीय गीत की धुन के साथ शुरू होता है। देश की जगह चक्करवर्ती सम्राट का फोटो लगा है और भक्ति रह रह के अपनी जगह पर उछल रही है। देश विरोधी रागा के खेमे में मायूसी है क्योंकि चक्करवर्ती सम्राट के फॉलोअर लगातार बढ़ रहे हैं। भक्ति भाव में डूबे ये लोग सम्राट के मुंह से झर रहे जुमलों की गेंद बना कर रागा समर्थकों पर फेंक रहे हैं। सम्राट पूरे मनोयोग से विदूषक के साथ इस ऑनलाइन गेम का हिस्सा बन चुके हैं।

विदूषक - सम्राट ये आपने बहुत अच्छा किया कि एन वक्त पर सारी भीड़भाड़ वाली जगहों को अपने इलाके में मिला दिया। (एक आँख दबा कर) ...और अब मंदिर, पेट्रोल पंप, एटीएम, सिनेमा हॉल, धरना मैदान और गाय अनुसंधान संस्थान के गोरक्षकों की भीड़ अपने आप ही हमारे फॉलोअरों में शामिल हो गयी हैं।

सम्राट - 'हां विदूषक, क्योंकि डेमोक्रेसी इट सेल्फ इज अ नंबर गेम। यही तो वजह है कि हमारा हर चुनावी मिशन सीट के आंकड़े पर फिक्स होता है विकास के आंकड़े पर नहीं।'

गेम का पहला पड़ाव जुमलों, भक्तों के जोश, मोहरबंदी जैसे शस्त्रों के सहारे सम्राट जीत चुके हैं। विरोधी राग को पप्पू राग घोषित किये जाते ही भक्त हंस हंस कर दोहरे हो रहे हैं। विपक्ष को निःशस्त्र देख कर सम्राट विजयी भाव से मुस्कुरा रहे हैं।

सम्राट (भक्तों की भीड़ को संबोधित करते हुए) - 'मित्रों अच्छे दिन आने की शुरुआत हो चुकी है। आप को मैदान में देश विरोधियों के खिलाफ़ पूरी आक्रामकता दिखानी है। हम इनका काला धन छीन कर अपने राजकोष में लाकर रहेंगे। इतना मिलेगा कि सबके हिस्से में पंद्रह पंद्रह लाख मोहरें आ जाएं। कुछ लोग इस नाम पर समर में खेत भी रहें तो क्या?'

रागा का खेमा कुछ बढ़ने लगा है। कुछ गुमराह नौजवान उनके पाले में दिखायी दे रहे हैं जो टुकड़ों टुकड़ों में इंकलाबी नारे लगा रहे हैं। विरोधी खेमा लुटे पिटे किसानों के हाथों में कर्ज़ माफी और समर्थन मूल्य की गेंदें देकर सम्राट पर हमला बोलने की कोशिश कर रहा है। लेकिन वो इतने अशक्त हो चुके हैं कि इक्का दुक्का गेंदें ही सम्राट के खेमे तक पहुंच पा रही हैं। कुछ किसान जोर दे रहे हैं कि उन्हें आत्मघाती दस्ते का रूप दे दिया जाए लेकिन उनकी कहीं नहीं सुनी जा रही है।

सम्राट (एक हाथ से दूसरे पर मारते हुए) - 'देखो भक्तों.. ये रागा झूठा है। नौजवानों को देशद्रोही और किसानों को निकम्मा बना रहा है। मैं शुरू से ही सब्सिडी का विरोधी रहा हूँ। इससे सरकार का बहुत पैसा उन निकम्मों (सामने इशारा करते हुए) पर खर्च करना पड़ता है जिनका देश के (अपनी ओर इशारा करते हुए) लिये कोई योगदान नहीं है। इतना पैसा अगर हम अपने उद्योगपति मित्रों में बांटें तो चुनाव में उसका थोड़ा हिस्सा तुम तक ज़रूर पहुंचेगा और अपनी जीत पक्की होगी।'

विदूषक (सिर खुजाते हुए)- 'सम्राट वैसे तो हम लगातार तीन पड़ाव जीत चुके हैं लेकिन चिंता की बात ये है कि रागा खेमे के फॉलोअर्स लगातार बढ़ रहे हैं।'

सम्राट (लापरवाही से) - 'ज़रूर... लेकिन ये सब तो गेम को थोड़ा रोमांचक बनाने के लिये आवश्यक है विदूषक। इस बार पिछली बार की तरह माहौल नहीं है कि सब कुछ एकतरफ़ा हो और लोगों को आनंद भी आये।'

विदूषक - 'तो आगे क्या करेंगे सम्राट?'

सम्राट - 'भक्तों का जोश बढ़ाना होगा ताकि सामने वाले खेमे में भी जोश आये और हम पर आरोपों की पुष्पवर्षा तेज हो सके। सर्जिकल स्ट्राइक वाला हथियार निकालो ताकि देश की रक्षा के लिये भक्तों को एकजुट किया जा सके।'

गेम में फिलहाल सम्राट का पलड़ा भारी नज़र आ रहा है। विरोधी खेमा उनके दनादन हमलों से हताश है। सम्राट ने कई ऐसे तोते आकाश में छोड़ दिये हैं जिनका रिमोट इस वक्त सम्राट के पास है। ये तोते रागा के सहयोगियों को परेशान कर उसका साथ देने से रोक रहे हैं।

सम्राट - 'हा हा हा देख रहे हो विदूषक कि जन्ता कितनी बेवकूफ़ है बिचारी। अपने असली मुद्दों को घर पर छोड़ कर कितनी स्वामीभक्ति से हमारे लिये लड़ रही है। उनका देश भी मैं हूँ, उनका भगवान भी मैं हूँ और हम दोनों मिल कर लोकतंत्र तो बनाते ही हैं।'

तभी अचानक कागज का एक जहाज सम्राट के चेहरे से आकर टकराता है। इसमें काली स्याही से लिखा है कि सम्राट चोर है। हथियार चलाने वाला रागा माथे पर सम्राट की तरह ही लंबा तिलक लगाये हुए है। एकबारगी इस हमले से सकपकाए सम्राट पूरे फोर्स से तोप का गोला रागा पर उछालते हैं और सब जगह भ्रम का धुंआ फैल जाता है। भक्त और भी जोश में हैं।

सम्राट (विदूषक से मुखातिब होकर) - 'ये लोग मेरे चेहरे पर चोरी की स्याही मलना चाहते हैं लेकिन ये जहाज तो गेम का हिस्सा नहीं होना था। जरा तुम जाकर देखो आखिर माजरा क्या है? तब तक मैं गेम संभालता हूं।'

ये कहते हुए सम्राट ने रागा के पूरे खानदान को इटली की पिस्टन की स्याही से रंग दिया। जब जब उन्हें कोई जवाब नहीं सूझता तब तब वो इसी हथियार को आजमाते रहे हैं।

विदूषक (कक्ष से जाते जाते) - 'सम्राट आपने सुना होगा एक मशहूर कवि ने कहा भी है कि सीमा पर तनाव है क्या, देखो कहीं चुनाव है क्या? आपको अब इसी हथियार का सटीक इस्तेमाल करना चाहिए ताकि तनाव के सहारे अंतिम पड़ाव हम आसानी से जीत सकें।'

सम्राट - 'तुम सही कह रहे हो विदूषक। लेकिन अचानक गेम में ये तब्दीली कैसे आ गयी? तुम इसका पता लगाओ तब तक मैं हंस कर, रोकर, फकीरी दिखा कर भक्तों की तादाद फिर बढ़ाने की कोशिश करता हूँ क्योंकि सारा दारोमदार इसी संख्या पर है। और हां जाते जाते सेठ निंदानी को कह देना कि चिंता न करें। उनके लिये देश को जीतना ही होगा।'

सम्राट एक ओर भ्रम फैला कर जन्ता को अपने पक्ष में कर रहे हैं वहीं रागा अचानक मंदिर, जहाज और दूसरे कई हथियारों से लैस हो चुके हैं। सम्राट काफी कोशिश के बाद हताश नज़र आने लगे हैं और आखिरकार इंटरव्यू का सुतली बम दाग कर देश के प्रति अपने समर्पण की उद्घोषणा करते हैं।

विदूषक दौड़ते हुए कक्ष में प्रवेश करते है।

सम्राट (उसे हांफते देख जल्दी से पूछते हैं) - 'अरे कुछ पता चला कि नहीं। हमारा ही बनाया ये गेम आखिर हमारे हाथ से कैसे निकल सकता है?'

विदूषक (चिंतित मुद्रा में) - 'सम्राट क्या बताएं... अपने जिस डोमेन पर हमने ये गेम डाला था उसका पूरा सिस्टम ही करप्ट था, इसलिये गेम का पूरा सॉफ्टवेयर ही करप्ट हो गया।'

सम्राट और विदूषक सिर पर हाथ रख कर गेम टेंडर के बारे में सोच रहे हैं और कहीं से गाने की आवाज आ रही है...

'टूटा टूटा एक भरोसा ऐसे टूटा.. कि फिर जुड़ ना पाया... लूटा लूटा....'

(भूपेश पंत वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल देहरादून में रहते हैं।)

 








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