इति श्री लोकतंत्र कथा: कोई सवाल नहीं, क्योंकि पहले पड़ोसी को हराना है!

आड़ा-तिरछा , , बुधवार , 20-02-2019


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भूपेश पंत

चक्करवर्ती सम्राट अपनी आरामगाह में अपना सबसे प्रिय चैनल देख रहे हैं जिसे अंग्रेजीदां रिपब्लिक को बनाना कहते हैं। चैनल में उनका अति प्रिय कार्यक्रम 'भक्तों में है दम' चल रहा है। एंकर ने एक भक्त को अपने साथ बिठा लिया है जबकि अपने टूटे फूटे घर से लाइव चीथड़ों में लिपटी जन्ता दर्द से कराह रही है। आज सुबह उस पर किसी मवाली ने राज्य द्रोही बोल कर हमला किया था।

बाद में सीमा पर लड़ने जाने की पेशकश कर उसने खुद को राज्य भक्त साबित कर दिया। जन्ता ने ये भी सुना है कि सीमा पर राज्य के दर्जनों जांबाज एक बार फिर आतंकी हमले में खेत रहे। जब से अंदर से कलेजा कटा है तब से उसे अपना बाहरी दर्द बहुत छोटा लगने लगा है। लेकिन जिन बुनियादी सवालों पर चैनल ने कार्यक्रम तय किया है उसे तो उन्हें पूछना ही होगा। उसकी तैयारी की मजबूरी जो है।

एंकर- 'तो मेरी प्यारी जन्ता। जैसा कि तुम जानती ही हो भक्त हमारे बगल में विराजमान हैं। उनका कहना है कि सम्राट ही राज्य हैं और राज्य आपसे जानना चाहता है कि जब सुरक्षा बलों पर हमला हो रहा था तब तुम क्या कर रहे थे?'

जन्ता (हेडफोन को कान में खोंसते हुए) - 'देखिये.. मैं उस चुनावी रैली में थी जहां सम्राट सबको बता रहे थे कि उनका फिर से चुन कर आना राज्य की सुरक्षा के लिये क्यों ज़रूरी है।'

भक्त - 'देखा... ये राज्य द्रोही है। जब पूरा राज्य आतंकी हमले से सदमे और आक्रोश में था तब ये रैलियों में ताली बजा रही थी।'

जन्ता - 'लेकिन आपके हिसाब से तो मैं उस वक्त अपने राज्य के साथ ही खड़ी थी।'

भक्त - 'देख लिया आपने, मैं यही बताना चाह रहा हूँ बुनियादी सवाल पूछने वाले द्रोहियों को कि आतंकी हमले के बाद पूरा राज्य सम्राट के साथ खड़ा है।'

जन्ता - 'लेकिन अभी तो आपने बोला कि सम्राट ही राज्य हैं...'

भक्त (कुढ़ते हुए) - 'वही तो कह रहा हूँ मूर्ख! कि सम्राट हमेशा अपने साथ खड़े रहते हैं चाहे वो चुनावी रैलियां हों या युद्ध का मैदान।'

जन्ता - 'लेकिन कुछ देर पहले तो आप कह रहे थे कि पूरा राज्य सीमा पर जवानों के साथ खड़ा है। तो फिर बताओ कि राज्य तो सम्राट के साथ खड़ा है लेकिन सम्राट राज्य के साथ क्यों नहीं खड़े दिखते?'

भक्त (एंकर से) - 'देखा आपने! ये कितने सवाल पूछ रही है वो भी शोक की इस घड़ी में। ये राज्य द्रोही है स्स्... अबे तुझे भी बांध कर पड़ोस में फेंक देना चाहिये ताकि वहीं अपने सवालों के बम फोड़ती फिरे।'

जन्ता - 'लेकिन वहां तो पहले से ही मुझ जैसी दीन हीन फटेहाल जन्ता अपने राजा से सवाल पूछ रही है कि आतंक की खेती कब तक?'

भक्त सकपकाते हुए - 'तो सम्राट भी कोई कम तो नहीं हैं। होगी उनकी भी कोई कूटनीति। वैसे भी वो बिना दूरदृष्टि के कोई काम नहीं करते। जो भी करते हैं गज़ब करते हैं।'

जन्ता (एंकर से) - 'आपने तो ये पंचवर्षीय कार्यक्रम बुनियादी सवालों को उठाने के लिये किया था तो अब इसे जन्ता की अदालत क्यों बना रहे हैं?'

एंकर (तनतनाते हुए) - 'हम वही कर रहे हैं जो सम्रा.. सॉरी राज्य करवाना चाहता है। (भक्त से हामी भरवाने के बाद) ठीक है तुम सवाल पूछ सकती हो। भक्त इतने तक तो सहिष्णु हैं।

जन्ता - 'पहला सवाल जो हर बात के लिये मौजूँ है अर्ज़ करती हूँ एक शेर की शक्ल में... '

'तू इधर-उधर की बात कर, ये बता कि काफिला क्यों लुटा, मुझे रहजनों से गिला नहीं, तेरी रहबरी पे सवाल है..'

भक्त - 'ये तो मेक इन राज्य यानी राज्य को बनाओ का शेर नहीं है। इसका तुझे जवाब नहीं मिलेगा। वैसे भी सम्राट को उसके अलावा कोई शेर पसंद नहीं।'

जन्ता - 'तो इस सवाल का जवाब कब मिलेगा कि सरकारी खजाना लुटा कर पड़ोसी राज्य से बना बुत क्यों लगाया?'

भक्त - 'ये कोई सवाल नहीं, पहले पड़ोसी राज्य को हराना है।'

जन्ता - 'तो खाते में पंद्रह लाख ही डाल देते। कब डालोगे?'

भक्त - 'पहले पड़ोसी राज्य को हराना है।'

जन्ता - राफेल भ्रष्टाचार की जाँच कब करोगे?

भक्त - 'ये वक्त सवाल पूछने का नहीं, पहले पड़ोसी राज्य को हराना है।'

जन्ता - 'रोजगार, पेंशन, मंदिर.... '

भक्त - 'अब ये सब बाद में.. पहले पड़ोसी राज्य को हराना है।'

जन्ता (खीज कर)- 'और उसे हराने तक क्या करोगे?'

भक्त - 'तुम जैसों को गरियाएंगे.. और क्या बे.. अब ये सब समस्याएं नहीं रहीं, बस कुछ चुनावी मुद्दे हैं और उसे जीत कर सम्राट बता देंगे कि ये मुद्दे नहीं विरोधियों के हवाई बम हैं। चुनाव जीत कर सम्राट साबित कर देंगे कि वो ही एकमात्र सत्य हैं। वो कभी गलत नहीं करते।'

एंकर - 'मुझे पता है भक्त की बात में 'दम' है।'

सम्राट मुस्कुराते हुए रिमोट को इशारा कर टीवी बंद करवाते हैं। तभी दरवाजे पर कुछ देर पहले ही नमूदार हुआ शाही विदूषक बोल पड़ता है।

विदूषक - 'वाह सम्राट वाह। मजा आया न।'

विदूषक के इस सवाल पर सम्राट यकायक ठहाका लगाते हैं और कुछ सोचने लगते हैं।

विदूषक - 'क्या हुआ सम्राट? मैंने कुछ गलत पूछ लिया क्या?'

सम्राट (हँसी रोकते हुए) - 'अरे नहीं, तुमने आज मुझे उस दिन की याद दिला दी जब मैंने तुमसे पूछा था कि सबसे ज्यादा मजा किस चीज में आता है?'

विदूषक - 'जी सम्राट अभी कुछ दिन पहले की ही तो बात है। तब मैंने आपसे कहा था कि वक्त आने पर बताऊंगा।'

सम्राट - 'याद है मुझे। उस दिन जब तुमने मुझे सुबह सुबह जहाज पर बुला लिया था और भ्रष्टाचार के भँवर ने हमें घेर लिया था। मैंने तो सुबह से शौच भी नहीं की थी। पेट में अजीब सी लहरें उठ रही थीं।'

विदूषक - 'और फिर आपने अचानक राज्य भक्ति की ऐसी लहर पैदा की जिसने हमारे जहाज को बीच भँवर से झटके में महल के सामने ला खड़ा किया।'

सम्राट - 'हां, और जब मैं निवृत्त होकर शौचालय से बाहर निकला तो तुमने सबसे पहले यही सवाल किया था, सम्राट!मजा आया ना।'

विदूषक - 'बिल्कुल ठीक सम्राट, और आपने कहा था कि वाकई इस लहर में सबसे ज़्यादा मजा आया और इसका कोई तोड़ नहीं है।'

सम्राट और विदूषक हंसते हुए चुनावी रैलियां करने निकलते हैं। जन्ता सहमी सी अपनी झोपड़ी में आंसू बहाते हुए एफएम के चैनल बदल बदल कर राग मियां की तोड़ी, राग देश, राग दरबारी और राग माल खौंस सुन रही है।

 

(भूपेश पंत वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल देहरादून में रहते हैं।)








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dr.amit satanker :: - 02-24-2019
Sahi hai ab loktantra me sawal puchha nahi ja sakta Kyo ki sawal puchha aaj apradh ghoshit ho Chuka hai