मिल गया झूठ और जुमलों के भूतों से निजात पाने का अचूक इलाज!

आड़ा-तिरछा , , रविवार , 08-07-2018


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वीना

तो आखि़र साहब ने पहले ही पोल खुल जाने के बाद भी 7 जुलाई को जयपुर, राजस्थान में वसुन्धरा राजे की देख-रेख में सुनियोजित तरीके़ से गढ़े गए झूठ देश को परोस ही दिए। वसुन्धरा राजे और मोदी दोनों में जैसे होड़ लगी थी कौन कितना अच्छा जुमलेबाज, बेशर्मी से झूठ बोलने में उस्ताद है। क्या दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का प्रधानमंत्री स्तर का व्यक्ति इतना ढीठ, बेशर्म होना चाहिये? नहीं। पर अफसोस है! आखि़र क्या वजह है कि ये पता होते हुए भी कि देश और पूरी दुनिया उसकी इन चीजों को देख-समझ रही है फिर भी वो तनिक नहीं लजाता!

‘‘मार के आगे भूत भी नाचता है।’’ ये कहावत बचपन से सुनते आए हैं। राजस्थान में एक बालाजी मंदिर है। सुना है वहां अला-बला, भूत-पिशाच जो इंसानों के शरीर में घुसकर उन पर कब्ज़ा कर लेते हैं बालाजी उन मस्त-मलंग शैतानों से इंसानी शरीर को आज़ाद करवाने की सुपारी लेते हैं।

जिन औरतों-बूढ़ों, बच्चों-जवानों को वहां ले जाया जाता है, उनके शरीर पर बालाजी का कब्ज़ा हो जाता है। और फिर, बालाजी उस शरीर में पसरी शैतान रूहों की ख़बर लेते हैं। किसी शरीर को उल्टा लटका दिया जाता है। किसी को बांध कर उस पर कोड़े बरसाए जाते हैं, किसी की पीठ पर मनो वज़नी पत्थर लदवा दिया जाता है। किसी का लात-घूसे, थप्पड़ों से ही काम चल जाता है। माने जैसा भूत, वैसा इलाज। लोग कहते हैं इन यातनाओं का मनुष्य के शरीर को कोई नुक्सान नहीं होता। ये कुटाई तो भूतों की होती है। आदमी पिटता है और भूत बचाओ-बचाओ चिल्लाता है।

ये सब मैं इसलिए बता रही हूं क्योंकि हमारे यहां आज़ादी और लोकतंत्र के साथ-साथ झूठ, जुमलों, अफ़वाहों के भूत भी अंग्रेज़ों की गिरफ़्त से निकालकर अपने बस में कर लिए गए। आरएसएस में तो अंग्रेज़ों ने झूठ-फरेब, मक्कारी-अफ़वाहों के भूत-छलावों को अपनी देख-रेख में ठूस-ठूस कर भर दिया था। ये इतना ज्यादा भरा गया कि ख़ुद भूतों का दम घुटने लगा। और उनमें से कुछ उछल-उछल कर थोड़ा दम लेने के लिए संघियों के शरीरों से निकल कर कांग्रेसियों के खेमें में हवा खाने पहुंचे।

अब जबकि हमारे यहां ये स्थापित सत्य है कि भूतों-शैतानों का इलाज कुटाई है। तो जहां हमें झूठ-भूत सत्ता को ख़त्म करने के लिए या कमज़ोर करने के लिए उसकी कुटाई-पिटाई के इंतज़ाम करने चाहिये थे इसके उलट हमने उनकी सुरक्षा के इंतजाम कर दिए!

सभी धर्म भी बुराई,  झूठ-फरेब को शैतान की करामात मानते हैं। मनुष्य जो भी अपराध करता है उससे शैतान करवाता है। और क्योंकि शैतान मार से काबू में आता है इसीलिए अपराधियों को रिमांड पर भेजा जाता है। ताकि इंसान के भीतर बैठे असली अपराधी शैतान की अच्छे से ख़बर लेकर उसे अपराध कुबूल करने पर मजबूर किया जा सके। आम आदमी के भूत जेलों-रिमांडों, फांसियों से उतरवाए जाते हैं। पर ख़ास पर सवारी करने वाले शैतानों का हमारे यहां कोई इलाज नहीं।

अब बताईये, भूत संघियों में घुस-घुसकर बाबरी मस्जिद तुड़वा रहे हैं। गोधरा करवा रहे हैं। देश भर में मॅाब लिंचिंग का तांडव हो रहा है। और तो और मौज-मौज में सर्जिकल स्ट्राइक करवा दी नामुरादों ने!! वैसे कांग्रेसी कहते हैं कि सर्जिकल स्ट्राइक के भूत उनके खेमे में भी मौजूद हैं। और पाकिस्तान वाले दावा करते हैं कि हमारे खेमे में भी सर्जिकल स्ट्राइक का मज़ा लेने वाले भूत-छलावों की कमी नहीं है। पर कांग्रेस के राज में भारतीय भूत और पाकिस्तानी भूत चुपके-चुपके मज़ा ले लिया करते थे। मगर बीजेपी की संघी ट्रेंनिग ने इन गूंगे भूतों को ज़बान भी मुहैया करवा दी। नतीजा, अब ये भूत देश भर में उछल-उछल कर सबके सामने बकते फिरते हैं कि देखो-देखो हमने सर्जिकल स्ट्राइक की है!

अब छुटभईया नेताओं में घुसकर कुछ अला-बला बकें ये भूत महराज तो चलो कोई बात नहीं। नामुराद 56 इंच में झूठों का टैंक लेकर घुस गए हैं। गुजरात तक सीमित रहते तो भी चलो देखा जाता। यहां तो पूरे देश की ऐसी-तैसी हो रही है। हर रोज़ साहब के मुंह से कोई न कोई बकलोल बाहर धकेल देती है भूत ब्रिगेड! 

 2014 से साहेब जो भी कर-कह रहे हैं ( नोटबंदी, जीएसटी, सर्जिकल स्ट्राइक, किसान आदिवासियों, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों का सफाया, सेना, पुलिस, कानून-न्यायालयों को अपना ग़ुलाम बनाना बाकी झूठ तूफान आदि-आदि) उसमें उनका कोई कुसूर नहीं है। दरअसल भूतों के माफिया ने उन पर कब्ज़ा कर लिया है। जिसे दशकों आरएसएस में ट्रेनिंग मिली है। और इन भूत माफियाओं की धूर्त ट्रेनिंग का नमूना देखिये कि देश की बेस्ट सुरक्षा अपने लिए मुर्करर कर ली है! 

अब सोचिये,  इन हालातों में भारत का हश्र क्या होगा? जब देश का अरबों रूपया मोदी सुरक्षा...माफ़ कीजिये मोदी पर कब्ज़ा किए भूतों की सुरक्षा, उनकी विदेशी मौज-मस्ती, सूटों, मशरूमों-काजुओं, विज्ञापनों, आलीशान बीजेपी कार्यालयों पर खर्च हो रहा हो। और बाक़ी बचा अंबानी-अडानी की जेबों में ठूसा जा रहा हो।

ऐसी हालत में अब जनता के पास बस एक ही इलाज बचता है कि इन वीवीआईपी और वीआईपी शरीरों की सवारी करते भूतों की सुरक्षा छीन कर, इन्हें बालाजी ट्रीटमेंट के लिए छोड़ दिया जाए। 

कल्पना कीजिये ज़रा, मोदी की शक़्ल शरीर में ये नामुराद झूठे-मक्कार भूत सुरक्षा घेरे की छतरी में इतराते हुए झूठ के लच्छे देशभर में फेंकते फिरते हैं। इतिहास-भूगोल, विज्ञान सबकी ऐसी-तैसी मोदी ज़बान से करवा रहे हैं। 

इसका क्या प्रमाण है? जिसके दिमाग़ में ये सवाल हो तो उनसे मेरे ये सवाल है कि जितने सुरक्षा घेरे का मोदी के लिए इंतजाम करवाया गया है, उसकी उन्हें क्या ज़रूरत है? जन सभाओं में कई-कई किलोमीटर जनता से दूर और ऊंचे मंच मोदी के लिए बनाए जाते हैं किसलिए? क्या जनता के प्यारे, 56 सीने वाले, सीधे-सच्चे, गरीब मोदी को इसकी कोई ज़रूरत है? 

जी नहीं। पर जो हमें नज़र आते हैं वो मोदी हो तब ना! वो तो अफवाहें फैलाने वाले, झूठे जुमले गढ़ने वाले मक्कार भूत-छलावे हैं। और अगर वो ये सब हरकते करते हुए जनता के हाथ लग गए तो जानते हैं कि उनकी खै़र नहीं। इसलिए पूरी सुरक्षा का इंतजाम अपने लिए कर रखा है। ये भूत अब सभी पार्टियों के नेताओं और अफसरों,  हुक्मरानों के भीतर अपना डेरा जमा चुके हैं। 

इनसे पिंड छुड़ाने का जनता के पास एक ही इलाज है। और वो ये कि इनकी सुरक्षा को छीन लिया जाए। जनता अब से ऐलान कर दे कि किसी भी नेता-हुक्मरान को अब से कोई सुरक्षा मुहैया नहीं करवाई जाएगी। चाहे वो राष्ट्रपति हों, सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश हों, या प्रधानमंत्री। लाल-पीली-नीली बत्ती सबके लिए गुल। किसी के लिए कोई प्रोटोकॅाल नहीं। उसी को नौकरी मिलेगी जो आम इंसान की तरह अपनी नौकरी बजाएगा। 

अबकी वोट उसी को दिया जाएगा जो अपने रिस्क पर मैदान में आएगा। जन सभाओं का नेताओं का मंच जनता के करीब होगा। पुलिस, सुरक्षा बल जनता के लिए होंगे, जनता के कहने पर चलेंगे। नेता के लिए नहीं। अब से लोकतंत्र की नई रस्म शुरु की जाए। घोषणापत्र अब पार्टियां नहीं जनता बनाएगी। अबकी बार जनता की तरफ से पेश हो जनता का पहला – नेता हुक्मरानों के लिए ‘‘ज़ीरो सुरक्षा’’  घोषणापत्र।

यक़ीन मानिये! ‘‘ज़ीरो सुरक्षा’’ के ख़याल भर से ही अच्छे-से अच्छे उस्ताद झूठे-जुबलेबाज़, भूत, नेता का शरीर छोड़कर भाग खड़े होंगे। मुड़कर देखेंगे भी नहीं। और फिर जो जनता के सामने जनता की पहुंच-पकड़ में आने वाले नेता जनता को मिलेंगे वो 56 तो क्या 76-86 इंच सीने वाले होंगे।

प्यार, महोब्बत, मेल-मिलाप की मधुर वाणी बोलने वाले, आदर सहित मुसलमान टोपी पहनने वाले, शमशान से पहले कब्रिस्तान को ज़मीन पेश करने वाले, गुजरात 2002 के लिए माफ़ी मांगने वाले, सर्जिकल स्ट्राइक को फिजूल स्टंट बताने वाले, अंबानी-अडानी, अमिताभ, नीरव मोदी, मेहुल चैकसी आदि-आदि के पनामा खातों को देश के आगे पटकने वाले होंगे। हिंदू राष्ट्र ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम’’ का दुश्मन है बताने वाले होंगे।

क्योंकि मार के डर से भूत भाग जाता है। तो इस बार चुनाव में बाक़ी बातों को छोड़कर जनता जनार्दन एक ही बात पर अड़ जाईये। सुरक्षित निर्लज्ज, झूठे मक्कार भूतो-शैतानों को असुरक्षित बनाईये। सभी नेता- हुक़्मरानों पर ‘‘ज़ीरो सुरक्षा’’ कानून लागू करवाईये। जो बिना सुरक्षा लोकसेवा का दम रखता है आए मैदान में। वरना वोट बहिष्कार अपनाइये। देश को खोखला करने की सभी बीमारियों की एक दवा। एकबार इस्तेमाल कीजिये और फिर असर देखिये। बेईमानी, बेशर्मी, बेरहमी, मौक़ापरस्ती के भूतों-शैतानों का अचूक इलाज!

(वीना पत्रकार, व्यंग्यकार और फिल्मकार हैं।)










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