पकड़ो.....मारो....राष्ट्रद्रोही भागा जाता है..!

आड़ा-तिरछा , , शनिवार , 28-10-2017


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वीना

महसूस करिये...महसूस करिये...पेट भर रहा है....भूख मिट रही है...

पर लोकसेवक जी पेट में चूहे कूद रहे हैं...

चूहे तुम्हारे पेट में क्या कर रहे हैं बहानेबाज़ों? चूहे तो बिहार के सोमरस स्टॉक में बिजी हैं। चलो-चलो योग करो। 

अब नहीं होता लोकसेवक जी। किसी भी दम, दम निकल जाएगा

अरे! तुम तो अंग्रेजों का कालापानी झेल जाने वाले भारत माता के वीर हो। कुछ शरम करो। अंग्रेज़ क्या सोचते होंगे?  वो कहेंगे हमने 150 साल कोड़े मार-मार भूखा सुलाया, जगाया, भगाया, धरती से सोना निकलवाया और फिर भी उफ्फ तक न करने दी। ये देखो! अपने देसी लोगों की एक नहीं सुनते। मेरी बारी में 3 साल में ही टैं बोल गए!

3 नहीं लोकसेवक जी 60 साल। आपने ही तो गिनती करवाई थी।

हां...हां... ठीक है... 60 साल। तो भी, कहां 150 साल...और कहां 60... वैसे भी मेरे तो अभी 3 ही हुए हैं ना?

लोकसेवक जी कुछ तो...कुछ तो...

अच्छा...अच्छा समझ गया। 2019 बस आने ही वाला है। भले ही विपक्ष ताना मारे पर मैं फिर से सबको चाय पिलाऊंगा। अवश्य पिलाऊंगा।

लोक सेवक जी कोई रोज़गार का आसन...मंत्र... बता देते तो कुछ कमाकर आटा-दाल खरीद लेते...

कर दी न देशद्रोहियों वाली बात! देश के संस्कारों की कुछ तो लाज रखो एहसान फरामोशों!

आध्यात्मिक परंपराओं-संस्कृतियों से मालामाल देश में रोटी मेहनत से नहीं कमाई जाती। केवल ध्यान के ज्ञान से भूख को हराया जाता है। क्या समझे?

कुछ नहीं समझे लोकसेवक जी ..!

धत् तेरे की..! इसीलिए कहता हूं... योग करो, ध्यान लगाओ...अच्छा सुनो...

कहिये लोक सेवक जी...

इस बार चाय के साथ समोसे भी पक्के।

सच लोकसेवक जी! कितने समोसे? एक व्यक्ति पर एक मिलेगा न सवेक जी?

देख रहा हूं नोटबंदी, जीएसटी और टेटली की केटली से गुजरने के बाद अब आप लोगों की डिमांड बढ़ गई है। और दुश्मन कहते हैं कि विकास नहीं हो रहा। तो, कैसा लग रहा है?

लोक सेवक जी जैसा कि आप देख रहे हैं, बस प्राण ही बचे हैं...

मुझे तो खूब हट्टे-खट्टे नज़र आ रहे हो। कुछ कमी है अगर तो वो है राष्ट्रभक्ति की।

व्यंग्य।

बिहार में चूहे शराब की दावत उड़ा रहे हैं तो हमारे राज में तुम लहू पियो लहू। अनाज-रोटी, दूध-दही वो भी मिलावटी, इनके मिलने और फिर लहू बनने का इंतज़ार कब तक करोगे? राष्ट्रद्रोही, देशद्रोही, आतंकियों के लहू का सीधा आयात करो।

लोक सेवक जी आतंकियों का लहू हमारी हड्डियों से चिपकी खाल में मास भर देगा?

अरे देखो...देखो...पकड़ो देशद्रोही भागा जा रहा है। 

जो आज्ञा लोकसेवक जी...पकड़ो...पकड़ो...पकड़ो...अ...ये धरा...

शाबाश!

 

  • अरे लोक सेवक जी, ये आतंकवादी नहीं ये तो पत्रकार है!
  • अरे मूर्खों! ये आतंकवादियों, राष्ट्रद्रोहियों का सरदार है।

 

लोकसेवक जी, ये तो वो वाला है जो कहता है या तो सबको ही चाय मिलनी चाहिये नहीं तो सबकी थाली में आपकी थाली की तरह 56 भोग हों। ये तो हमारा पेट भरने की बात कहता है। अपना आदमी है। 

अरे अज्ञानियों, ये विदेशी विचारकों के इशारों पर नाचता है। तो क्या अब विदेशियों की चलेगी इस देश में? अपने सनातन धर्म का कचूमर निकलने दोगे?

अपने भी तो जीने नहीं दे रहे लोकसेवक जी।

अपना अछूत समझकर मार-मार कर जान ले ले। पर अपनी मिट्टी का अपना ही होता है। विदेशी चाहे 56 भोग तुम्हारी थाली में परोसने का इंतजाम कर दे पर रहेगा तो विदेशी? है कि नहीं?

विदेसी ही सही लोकसेवक जी, पर बात तो अपने भले की है।

तो तुम लोग इस जनम में 56 भोग के लालच में सनातन धर्म का अपमान करके अपना परलोक बिगाड़ने पर उतारु हो?

आप भी तो हम शूद्रों में से ही एक हो लोकसेवक जी। क्या 56 भोग का मज़ा लेकर और 56 हज़ार इस्टाल मारकर आपका परलोक न बिगड़ेगा?

मेरा क्या है? मैं तो त्याग कर रहा हूं त्याग। ताकि तुम सबको इस जनम-मरण के चक्कर से मुक्ति मिले। मोक्ष प्राप्त हो। और फिर अन्नत काल तक स्वर्ग में सुरा-सुंदरी की मौज उड़ाओ। ना हाड़ तुड़ाई न कम वेतन की रुलाई। बस ऐश ही ऐश। 

जैसे ही आप लोगों ने मुझे अपनी जिम्मेदारी सौंपी। दिन-रात एक कर इसी इंतजाम में लग गया कि भले ही एक-दो परसेंट लोग अपना परलोक बिगाड़कर इसी लोक में ऐश कर लें। पर मेरी 98 प्रतिशत जनता मोक्ष अधिकार से वंचित नहीं रहनी चाहिये। 

मैं लगातार आपके लिए अपमान का जहर पी रहा हूं। अगर यही मेरा कुसूर है... तो आप मुझे चौराहे पर खड़ा करके फांसी दे दें। कहते-कहते लोकसेवक जी फूट-फूट कर रोने लगे।

नहीं...नहीं...आप रोईये नहीं लोकसेवक जी! हम सब समझ गए। आप महान है। पर हम भी इतने स्वार्थी नहीं है कि आपको जीवन-मृत्यु के फेर में पड़ा छोड़ दें। आप मान लीजिये उस विदेसी मारकस बाबा की बात। दे दो सबको बराबरी। रोक दो हम पर किए जाने वाले सारे अत्याचार। हम इसी लोक में मान-सम्मान, सुख-समृद्धि पाकर संतोष कर लेंगे। 

सत्यानाश! 

क्या हुआ लोकसेवक जी?

अरे वो देखो....राष्ट्रद्रोही भागा जाता है..! पकड़ो...पकड़ो....पकड़ो... मारो...मारो...










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