मुसलमानों के लिए बोलने और लड़ने वाला कौन है?

धर्म-सियासत , , बुधवार , 13-12-2017


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हिमांशु कुमार

गुजरात में सबकी बात हो गई पाटीदारों की, पिछड़ों की, दलितों की पर मुस्लिमों की बात कोई इस चुनाव में क्यों नहीं किया?

मोदी और राहुल अंतिम दिन तक मठ मंदिर घूमे पर मस्जिद क्यों नहीं गए?

क्यों किसी ने नहीं कहा कि जो फर्जी एनकाउंटर हुए हैं उनकी निष्पक्ष जाँच होगी।

उन बेवाओं के साथ न्याय होगा जिनके पति को आतंकी बता मारा गया।

अकेले गुजरात राज्य में देश भर में हिरासत में लिए गए कुल मुस्लिमों का प्रतिशत 36.5 है।

इनके मामले अंडर ट्रायल हैं और कई लोगों की मौत तो जेल में ही हो चुकी है।

इन्हें कौन न्याय दिलाएगा?

क्या इस बार गुजरात की आबादी में 10 प्रतिशत हिस्सा रखने वाले मुस्लिमों का मत किसी को नहीं चाहिए ?

कांग्रेस ने तो पाटीदारों के आरक्षण के लिए बिल ही लाने की बात कह दी।

राहुल ने ट्वीट में बेरोजगारी, जीएसटी और सभी मुद्दों पर बोला लेकिन भूलकर भी मुस्लिमों की सुरक्षा की बात नहीं की।

क्या ये मुस्लिमों को अलग-थलग रखने की सभी दलों की साजिश नहीं है ?

क्या ये फिर से देश में ऐसा माहौल तैयार नहीं कर रहा जिससे देश के मुस्लिमों में अविश्वास और असुरक्षा की भावना उठेगी ?

क्यों कोई 2002 की बात नहीं करना चाहता ?

क्या अब चुनाव जीतने के लिए देश के मुस्लिमों को वोट देने का भी अधिकार छीनने की तैयारी है ?

उनकी जितनी जरूरत थी सबने अपने फायदे के लिए इस्तेमाल तो कर ही लिया है।

उनके लिए बोलने वाला और लड़ने वाला कौन हैं?

(हिमांशु कुमार गांधीवादी कार्यकर्ता हैं और आजकल हिमाचल प्रदेश में रहते हैं।)

 










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bhuwan :: - 12-14-2017
Pakistani dalaal he na