बीजेपी को उल्टी पड़ी अहमदाबाद का नाम बदलने की पेशकश; आदिवासियों समेत दूसरे तबकों ने विरोध में कसी कमर

बदलाव , अहमदाबाद, बृहस्पतिवार , 15-11-2018


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कलीम सिद्दीकी

अहमदाबाद। शनिवार को गुजरात के उपमुख्यमंत्री एवं बीजेपी के पाटीदार नेता नितिन पटेल ने अहमदाबाद का नाम बदलकर कर्णावती करने की बात कही थी। उस खबर के साथ जनचौक ने अंदेशा ज़ाहिर करते हुए लिखा था कि "गुजरात सरकार के नाम बदलने का विरोध सिविल सोसाइटी, इतिहासकार, मुस्लिमों के अलावा आदिवासी समूह कर सकते हैं।

यदि बीजेपी राजनैतिक लाभ के लिए अहमदाबाद का नाम बदलकर कर्णावती रखने की सक्रियता दिखाती है तो आदिवासी समाज भी अहमदाबाद के लिए अशावल नाम की मांग कर सकता है। गुजरात में आदिवासी 15% हैं जिनके लिए चार लोकसभा और 27 विधानसभा सीटें सुरक्षित हैं। जिग्नेश मेवानी और हार्दिक पटेल जैसे आंदोलनकारियों की उपस्थिति में सरकार के लिए जनमत तैयार कर पाना आसान नहीं होगा।" यह बात 100 प्रतिशत सही साबित हुई।

आदिवासी किसान मोर्चा के अध्यक्ष रोमेल सुतारिया ने  अशावल नाम की मांग करते हुए  कहा है कि "अहमदाबाद का पुराना नाम अशावल था जिसका राजा आदिवासी था। और जिसका राज चालुक्य राजा कर्ण ने छीन लिया था। 1411 में अहमद शाह बादशाह ने इसे शहर बनाकर राजधानी बनाया था। अगर नाम बदलना है तो बदलकर अशावल रखा जाये। लेकिन किसी भी कीमत पर कर्णावती मंज़ूर नहीं है। अहमदाबाद चला जायेगा यदि आवश्यकता पड़ी तो बीजेपी की नाम बदलने की राजनीति के खिलाफ अहमदाबाद मार्च करेंगे।"

नरेंद्र मोदी के करीबी ज़फर सरेशवाला ने कहा कि "इस शहर को नरेंद्र मोदी ने वर्ल्ड हेरिटेज सिटी का दर्जा दिलाने के लिए बहुत मेहनत की थी। कर्णावती नाम करने की इच्छा मोदी और बीजेपी की नहीं बल्कि प्रवीण तोगड़िया, गोर्धन झड़फिया की बीजेपी की हो सकती है।"

जबकि जिग्नेश मेवानी का कहना है कि "सरकर 2 करोड़ रोज़गार, किसानों की आत्म हत्या, आशा वर्कर , मिडडे मील कर्मचारी , GISF और होम गार्ड जवान , फिक्स पे कर्मचारी की समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए कर्णावती लाया जा रहा है।"

गुजरात आईएएस लॉबी ने  भी नाम बदलने को लेकर नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए अन्य समस्याओं पर ध्यान देने को कहा है। आईएएस-आईपीएस लॉबी भी अहमदाबाद का नाम बदलने के विरोध में खड़ी हो गयी है।

मुख्यमंत्री विजय रूपानी द्वारा तूल दिए जाने के बाद यह मामला और गरमा गया है। सोशल मीडिया पर कर्णावती बनाम अहमदाबाद की जंग शुरू हो गई। इसके तहत I support karnavati पेज बनाया गया। सोमवार तक इस पेज को 6070 लोगों का समर्थन मिला था। जबकि change. org के माध्यम से 13160 लोगों ने अहमदाबाद नाम बने रहने देने के पक्ष में अपनी राय दी। इन सबके अलावा सेव हेरिटेज अहमदाबाद, हूं छुं अमदाबाद जैसे पेज बनाये गए। साथ ही 60 के दशक में गुजराती फिल्म का एक गीत हूं अमदावादी फिर से कानों में गूंजने लगा है।

लोग अहमदाबाद के समर्थन में अपना नाम कुछ इस प्रकार से लिख रहे हैं राकेश लिलाबेन अहमदाबादी, उमेश परमार अहमदाबादी इत्यादि। सबसे अधिक विरोध आदिवासी एवं दलित संगठन कर रहे हैं। मुस्लिम भी सोशल मीडिया के माध्यम से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। आदिवासी किसान मोर्चा के अलावा भारतीय ट्राइबल पार्टी के प्रमुख छोटू वसावा ने भी कर्णावती नाम का विरोध किया है। वसावा ने कहा कि "यदि सरकार कर्णावती नाम रखने की दिशा में काम करेगी तो उसके खिलाफ बड़ा आंदोलन होगा।"

UNESCO  द्वारा अहमदाबाद को वर्ल्ड इस्लामिक हेरिटेज का दर्जा मिला हुआ है। यूनेस्को के डोज़ीयर में कहा गया है अहमदाबाद शहर अहमद शाह द्वारा बसाया गया है। इसका नाम कभी भी कर्णावती नहीं था। यदि गुजरात सरकार अहमदाबाद नाम बदलती है तो तो यह शहर वर्ल्ड इस्लामिक हेरिटेज के तमगे से हाथ धो बैठेगा। 2012 में इस्लामिक हेरिटेज की देखरेख के लिए म्युनिसिपल कारपोरेशन द्वारा ट्रस्ट बनाया गया है जिसका चेयरमैन एमएसी कमिश्नर होता है। 

आप को बता दें भारत के किसी भी शहर की तुलना में अहमदाबाद में सबसे अधिक शाही मस्जिदें हैं। जिनमें प्रमुख सीदी सैय्यद की जाली वाली मस्जिद , रानी रूपमती मस्जिद , जामा मस्जिद किला ए बाद , अहमद शाह द्वारा बनाये गए दरवाज़े, सरखेज़ रोज़ , हौज़ ए क़ुतुब (कांकरिया लेक), शाह आलम इत्यादि इमारतें अहमद शाह के ज़माने की विरासत हैं।


 










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