किसानों, नीरव मोदी के चांद पर बाल उगाने के लिए हड़ताल नहीं, चंदा चाहिए!

आड़ा-तिरछा , , शनिवार , 24-02-2018


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वीना

किसान नेता: सभी किसानों का कर्ज़ माफ करो...

प्रधान चौकीदार: कर्ज़ माफ नहीं किया जाता। लेकर भागा जाता है। क्या तुम्हारा एक पैर विदेश में है? भाग जाओे विदेश तुम भी कर्ज़ लेकर। किसने मना किया है? कर्ज़ लौटाओ भी ना और रहो भी हिंदुस्तान में, ऐसे थोड़े ही होता है।

किसान नेता: पर हमें तो इतना मिला ही नहीं कि भागने की नौबत आए! और भागने में उससे ज़्यादा पैसा खर्च होगा जितने का कर्ज़ नहीं है हम पर..! कहां से लाएंगे?

प्रधान चौकीदार: देख ली अपनी अक़्ल और औक़ात! 

किसान नेता: किसानों का 8 हज़ार करोड़ माफ करके ही एहसान दिखा रहे हो। जिसमें किसी के आठ आने किसी का एक रूपया माफ हुआ है। 

प्रधान चौकीदार: तो फिर क्यों माफ करने की रट लगाए जा रहे थे?

किसान नेता: हमने नहीं कहा था चवन्नी-अठन्नी माफ करने को...

प्रधान चौकीदार: देखा..! बिना कहे हमने तुम्हारा कर्ज़ा माफ़ किया। एहसान मानने की बजाय आंखे दिखा रहे हो!

किसान नेता: चवन्नी का कर्ज़ा माफ़ करने के लिए तुमने 400 रुपये किराए-भाड़े में लगवा दिए। 

प्रधान चौकीदार: अब सरकार की कागज़ी कार्यवाही तो पूरी करनी ही पड़ेगी मेरे राज में। देखा! मेरी चौकीदारी कितनी चाक-चौबंद है। चवन्नी का भी हिसाब रखा जाता है।

किसान नेता: हां, गरीब किसानों की चवन्नी का। उस नीरव मोदी का क्या जो साढ़े 11 हज़ार करोड़ लेकर भाग गया विदेश..?

प्रधान चौकीदार: अब देखो यार...नीरव मोदी जैसी ऊंची हस्ती का नाम यहां घसीट कर अपने जाहिल होने का सबूत मत दो। 

किसान नेता: अच्छा हम जाहिल...और वो भगोड़ा ऊंची हस्ती?

प्रधान चौकीदार: देखो भड़को मत...मैं समझाता हूं। अब क्या है कि तुम लोग तो सिर पर मैला-कुचैला कपड़ा-लत्ता बांध कर काम चला सकते हो। तुम्हे आखि़र जाना कहां है। खेतों में या मंडियों में। जहां सब तुम्हारे जैसे होते हैं। तुम्हारे सिर पर बाल हैं या नहीं किसी को फ़र्क़ नहीं पड़ता।

किसान नेता: सिर पर बाल या गंजा होने से कर्ज देने, माफ़ करने का क्या लेना-देना?

प्रधान चौकीदार: यार तुम सुनते कम हो भड़कते ज़्यादा हो...लेना-देना क्यों नहीं है..! तुमने देखा है न नीरव मोदी कितनी बड़ी-बड़ी तस्वीर लगाता है अपनी। मेरे पीएम सेल्फी स्टाइल से प्रभावित हो गया बेचारा हा...हा...हा...तुम जानते ही हो मेरे जूतों-कपड़ों, सूटों-जैकटों का खर्चा। पर बाल मेरे सही सलामत हैं, हैं कि नहीं...

किसान नेता: इस फैशनगर्दी का हमारे मामले से क्या लेना-देना..!

प्रधान चौकीदार: लाल बहादुर शास्त्री ने ‘‘जय जवान जय किसान’’ का नारा पता है क्यों दिया था? इसलिए कि घर-खेत के चक्कर लगाने वाला किसान अपने गंजे सिर की परवाह न करे। और विदेशों में, बड़े-बड़े वीडियो-फोटो में स्टाइल मारकर हिंदुस्तान का नाम रौशन करने वाले भारतीय उद्योगपति के गंजे सिर पर बाल उगाने के लिए अपनी मेहनत की पाई-पाई दांव पर लगा दें।

किसान नेता: और अपनी गर्दनें पेड़ों केहवाले कर दें...

प्रधान चौकीदार: बेचारा नीरव! जवानी में ही टकला हो गया... वो भी आगे से..! पीछे चांद हो तो फिर भी सबर कर ले महान आदमी...पर आगे..! देखा ना... सूट-बूट पहनने के बाद भी कैसा चिम्पैंजी का बच्चा लगता है नीरव मोदी। 

किसान नेता: तो तुमने नीरव मोदी के सिर पर बाल उगाने के लिए उसे साढ़े ग्यारह हजार करोड़ थमा दिए..!

प्रधान चौकीदार: करना पड़ा मजबूरी थी। अब देश-विदेश में शान-ओ-शौक़त दिखाने वाला कोई अपना मोदी-गुजराती भाई यूं बदसूरत दिखाई दे मुझसे तो ये बर्दाश्त नहीं होगा...

किसान नेता: और यहां घर में हम टनों अनाज उगाकर रोटी के टुकड़े के लिए तरस रहे हैं। कपड़े की एक कत्तर परिवार को नसीब नहीं...वो तुमसे बर्दाश्त होता है...!

प्रधान चौकीदार: फिर गरम हो गए। ठंडे दिमाग़ से सोचो यार...घर में कौन देखता है...थोड़े बहुत मर-खप भी जाओगे तो क्या फ़र्क पड़ता है...दुनिया के नक्शे से हिंदुस्तान गायब तो नहीं हो जाएगा ना? पर नीरव मोदी का चिम्पैंजी लुक पूरी दुनिया में हमारी थू-थू करवा रहा था...नकली पत्थर को हीरा बताकर बेचने के लिए ख़ुद को भी टिप-टॉप रखना पड़ता है। मैं बहुत नाराज़ हूं तुम लोगों से...बस कुछ और हज़ार मिल जाते तो बेचारे के सिर पर पूरे बाल उग आते...तुम्हारी चिल्ल-पों के कारण पहले ही भागना पड़ा। सच देश की इज़्ज़त का ज़रा भी ख़्याल नहीं। देशद्रोही हो तुम लोग...देशद्रोही...

किसान नेता: अरे! हमने नंगे, भूखे-प्यासे रहकर फसलों की पैदावार बढ़ाई उससे देश का मान नहीं बढ़ा?

प्रधान चौकीदार: ख़ाक बढ़ा...तुम्हारे जैसे गधे मेहनती और देशों में भी कम नहीं है। 10 हज़ार करोड़ का ‘‘एंटिलीया’’ महलनुमा घर बनाने वाला मुकेश अंबानी दुनिया में अकेला है। इसे कहते हैं देश का नाम रौशन करना। 

किसान नेता: जब उनके पास इतना धन है तो तुम उनके साढ़े चार लाख करोड़ के कर्ज क्यों माफ कर रहे हो..?

प्रधान चौकीदार: सुना है मुकेश अंबानी अपनी ख़ूबसूरत बीवी नीता अंबानी को सोने-चांदी, हीरे-पन्नों से जड़े टॉयलेट सहित और ऐसे कई नायाब तोहफे़ देना चाहता है जो विश्व में किसी उद्योगपति ने अपनी पत्नी को न दिए हों। लाजवाब नीता नायाब तोहफ़ों की हक़दार भी है। है कि नहीं..?

किसान नेता: इन्हीं सब कारनामों से देश की इज़्ज़त बढ़ती है तो जसोदाबेन को क्यों कूड़े के ढेर में पटका हुआ है..?

प्रधान चौकीदार: देश की इज़्ज़त के मामले में मैं अपना-पराया नहीं देखता। जो क़ाबिल है उसी को आगे बढ़ाता हूं। आजकल काम का नहीं प्रचार का ज़माना है मेरे भाई, प्रचार का। अब जसोदा प्रचार मैटिरियल नहीं है तो पड़ी है गुजरात के किसी कोने में। नीता अंबानी है तो मैं मुकेश अंबानी की पूरी मदद कर रहा हूं...

किसान नेता: अगर हमें पहले पता होता तुम धूर्त-मूर्ख चौकीदार हो तो...

प्रधान चौकीदार: ओहो! बगावत...जवानों ख़बर लो इन फटीचर किसानों की...

(वीना पत्रकार और फिल्मकार हैं।)










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shikha bharwaj :: - 02-25-2018