वक्‍त की जरूरत है नया ट्रैफिकिंग बिल

बदलाव , , बुधवार , 19-12-2018


parliament-beggar-anti-trafficking-bill-govt

पंकज चौधरी

बिहार के सीतामढ़ी जिले का रहने वाला है सलमान (बदला हुआ नाम)। अभी उसकी उम्र 16 साल हो रही है और उसके पिता दिहाड़ी मजदूर हैं। कहानी उसकी यह है कि जब वह 9 साल का था, तभी एक दलाल उसके मां-बाप को बहला-फुसलाकर उसको दिल्‍ली ले आया और जरी वाले एक कारखाने में बाल मजदूर बना दिया। ट्रैफिकिंग करके लाए गए सलमान से कारखाने के मालिक 14-15 घंटे काम लेता था। खाना मांगने और काम नहीं करने पर उसकी निर्ममता से पिटाई की जाती। गैर सरकारी संगठन बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) को जब सलमान के बारे में पता चला तो उसने अपनी छापामार कार्रवाई में उसे न केवल गुलामी से मुक्‍त कराया बल्कि उसकी पढ़ाई-लिखाई का प्रबंध भी किया। इस तरह से सलमान को उसका खुशहाल बचपन मिल गया। 

सलमान जैसे गरीब बच्‍चों को गुलामी का जीवन जीना नहीं पड़े और उनको भी अपना बचपन खुलकर जीने का मौका मिले, इसकी जरूरत मानवाधिकार संगठनों की ओर से बरसों से महसूस की जा रही थी। आखिरकार वह दिन आया जब सलमान जैसे बच्‍चों के प्राकृतिक अधिकार की रक्षा के लिए ट्रैफिकिंग ऑफ पर्सन्‍स (प्रीवेंशन, प्रोटेक्‍शन एंड रीहैबिलिटेशन) बिल, 2018 बना और उसे इसी साल जुलाई में लोकसभा में प्रस्‍तुत किया गया तथा लोकसभा ने उसे पास भी कर दिया। अब जब यह संसद के उच्‍च सदन से भी पास हो जाएगा तभी कानून की शक्‍ल अख्तियार कर पाएगा और फिर कार्यान्‍वयन में आएगा। उम्‍मीद है कि संसद के इसी शीतकालीन सत्र में राज्‍यसभा भी इसको पारित कर दे। 

आईपीसी की धारा 370 ट्रैफिकिंग को व्‍यापक रूप में परिभाषित करती है, जिसमें जबरिया और बंधुआ मजदूरी के साथ-साथ सरोगेसी, झूठी शादी, भिखमंगी को भी एग्रीवेटेड फॉर्म्‍स ऑफ ट्रैफिकिंग का दर्जा दिया गया है। इसके अपराधियों के लिए ज्‍यादा से ज्‍यादा सजा की मांग करता है।

इस बिल में मुकदमों की तेजी से सुनवाई हो इसके लिए हरेक जिले में एक विशेष अदालत बनाने की बात कही गई है। इसके तहत अपराधियों को कड़ी सजा मिलेगी। सीमा पार से ट्रैफिकिंग रुके इसके लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। ट्रैफिकर को 10 वर्ष की जेल से लेकर आजीवन कारावास के साथ जुर्माने के दंड का भी भुगतान करना होगा। इसमें राष्‍ट्रीय स्‍तर पर एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग ब्‍यूरो की स्‍थापना की जो बात की गई है, वह विभिन्‍न संस्‍थाओं का कनवर्जेंस करेगा और साथ ही ट्रैफिकिंग की रोकथाम, पीड़ितों एवं गवाहों की सुरक्षा, पुनर्वास आदि के लिए जिला, राज्‍य और राष्‍ट्रीय स्‍तर पर त्रिस्‍तरीय ढांचा बनाएगा। यह ब्‍यूरो ट्रैफिकिंग के राज्‍य, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्‍ट्रीय नेटवर्क को तोड़ने का काम करेगा।

साथ ही ट्रैफिकिंग जिसने संगठित अपराध का रूप ले लिया है, उसको जड़ से मिटाने के लिए ट्रैफिकर की संपत्ति की कुर्की-जब्‍ती तो की ही जाएगी और उससे जो धन प्राप्‍त होगा, उसका उपयोग पीड़ितों के पुनर्वास के लिए होगा। इस एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग ब्‍यूरो में इस बात का विशेष ध्‍यान रखा गया है कि इसके जो सदस्‍य होंगे, वे उन विभिन्‍न मंत्रालयों के अधिकारी हों, जिनके मंत्रालय के तहत ट्रैफिकिंग के मामले आते हैं। इससे कानून के कार्यान्‍वयन में तेजी आएगी। नेशनल एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग ब्‍यूरो में महिला और बाल विकास मंत्रालय के सचिव इसके अध्‍यक्ष होंगे। गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, श्रम और रोजगार मंत्रालय, सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्रालय, पंचायती राज्‍य मंत्रालय, स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्रालय आदि के सदस्‍य इसके सदस्‍य होंगे। 

इसी तरह स्‍टेट एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग ब्‍यूरो के जो अध्‍यक्ष होंगे, वे राज्‍य के मुख्‍य सचिव होंगे। और राज्‍य के पुलिस महानिदेशक, महिला और बाल विभाग का सचिव, गृह और श्रम विभाग के सचिव, स्‍वास्‍थ्‍य विभाग का सचिव, राज्‍य विधिक सेवा प्राधिकरण का सचिव, राज्‍य पुलिस नोडल अधिकारी आदि इसके सदस्‍य होंगे।       

बिल में इस बात का पूरा ख्‍याल रखा गया है कि पीड़ितों का जो पुनर्वास हो, वह अभियुक्‍त के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने या मुकदमे के फैसले पर निर्भर नहीं हो। इसकी एक अन्‍य विशेषता है कि यह पीड़ितों की निजता के अधिकार की रक्षा करने की गारंटी देता है। मुकदमे की सुनवाई बंद कमरे में करने का प्रावधान है। बिल पुनर्वास एजेंसियों की जिम्‍मेदारी पर जोर देता है। अभी तक पुलिस की ही इसकी जिम्‍मेदारी थी कि वह पीड़ितों को छुड़ाए लेकिन अब यह जिम्‍मेदारी उन पुनर्वास एजेंसियों को भी उठानी होगी, जिन्‍हें अब तक इस जद में शामिल नहीं किया गया था। इससे पीड़ितों को छुड़ाना आसान हो जाएगा। 

ट्रैफिकिंग ऑफ पर्सन्‍स (प्रीवेंशन, प्रोटेक्‍शन एंड रीहैबिलिटेशन) बिल 2018, में इस बात का भी प्रावधान किया गया है कि वह उन पीड़ितों को अपना पक्ष प्रस्‍तुत करने के लिए बेहतर माहौल उपलब्‍ध कराएं,  जिनको पुनर्वास और परामर्श की सुविधा दी जाए। बिल में इस तरह का प्रावधान इस उद्देश्‍य से इसीलिए किया गया है ताकि पीड़ितों द्वारा अपराधियों के खिलाफ गंभीर कदम उठाने से न्‍यायिक प्रक्रिया में तेजी आए। न्‍यायिक प्रक्रिया में तेजी आने से ट्रैफिकिंग जैसे अपराध की रोकथाम प्रभावी होगी। पीड़ितों और गवाहों की देखभाल के दृष्टिकोण वाले प्रावधान कानून के राज को स्‍थापित करेंगे। 

पुनर्वास प्रक्रिया को और मजबूत करने के लिए बिल में विशेष प्रावधान  किए गए हैं। जिसके जरिए एजेंसियों के कार्य और भूमिकाएं रेखांकित होंगी। राष्‍ट्रीय, राज्‍य और जिला स्‍तरीय कमेटियों का निर्धारण पुनर्वास प्रक्रिया की निगरानी की दिशा में गंभीर कदम साबित होगा। ऐसा करने की जरूरत इसलिए महसूस की गई, क्‍योंकि सिविल सोसायटी के लिए यह एक मुश्किल काम था। और पीड़ितों तक राहत पहुंचाने के लिए सिविल सोसायटी को सरकारी संस्‍थाओं के दरवाजे खटखटाने पड़ते थे। कानून में इस नए आयाम के जुड़ने से पूरी जांच प्रक्रिया आसान और तेज होगी। 

प्रस्‍तावित बिल में आलोचना का एक बिंदु यह जुड़ रहा है कि यह देह व्‍यापार से जुड़े लोगों के पुनर्वास से संबंधित कोई बात नहीं करता। बिल का अध्‍ययन करने के बाद पता चलता है कि इस तरह की आलोचना में जो लोग मुब्तिला हैं वे लोग अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं। दरअसल उन्‍होंने बिल का विधिवत अध्‍ययन ही नहीं किया है। बिल में देह व्‍यापार से जुड़े लोगों के पुनर्वास की बात की गई है। इसमें इस बात की ताकीद की गई है कि यदि कोई वयस्‍क महिला जज के सामने इस बात को कबूल  करती है कि वह अपनी मर्जी से देह व्‍यापार कर रही है, तो उसके साथ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। बिल के जरिए देह व्‍यापार से जुड़े उन वयस्‍कों का भी सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास होगा, जो देह व्‍यापार छोड़कर किसी अन्‍य व्‍यवसाय को अपनाना चाहते हैं। 

ट्रैफिकिंग ऑफ पर्सन्‍स (प्रीवेंशन, प्रोटेक्‍शन एंड रीहैबिलिटेशन) बिल 2018, में ट्रैफिकिंग से पीड़ित बच्‍चों और लोगों के लिए पुनर्वास, राहत और अधिकार से संबंधित जितने भी प्रावधान किए गए हैं, अगर उनका कानून बन जाने के बाद कार्यान्‍वयन किया जाए, तो कोई कारण नहीं कि पीड़ित जीवन की मुख्‍यधारा से नहीं जुड़ सके। बदलते वक्‍त की हरसंभव मांग को पूरा करता है नया ट्रैफिकिंग बिल।

(पंकज चौधरी सामाजिक कार्यकर्ता हैं और बचपन बचाओ आंदोलन से जुड़े हुए हैं।) 








Tagparliament beggar antitrafficking bill govt

Leave your comment