100 साल पुराने पटना संग्रहालय के अस्तित्व पर संकट, बचाने में लगे पत्रकार को मिल रही धमकी

धरोहर , , मंगलवार , 03-10-2017


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जनचौक ब्यूरो

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भाजपा से मिलकर भले ही अपनी कुर्सी को सुरक्षित कर लिए हों,लेकिन पटना के आर्ट कॉलेज के बाद अब पटना संग्रहालय में भारी अनियमितता का मामला समाने आया है। आर्ट कॉलेज के छात्र लंबे समय से प्रिंसिपल के भ्रष्टाचार और तानाशाही के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। अब पटना संग्रहालय का मामला सुर्खियों में है। राज्य सरकार इस मामले के दोषियों को पता करने के बजाए अनियमितता के खिलाफ आवाज उठाने वालों को ही निशाने पर ले ली है। राज्य प्रशासन के शीर्ष पर बैठे एक आला अधिकारी ने पटना संग्रहालय का मुद्दा उठाने वाले पत्रकार-आंदोलनकारी को धमकी दिया है। 

पटना के 100 साल पुराने संग्रहालय को बचाने के अभियान में जुटे उक्त व्यक्ति ने दावा किया है कि उनके अभियान को रोकने के लिए नीतीश कुमार की सरकार द्वारा उनको धमकाया जा रहा और उन पर दबाव बनाया जा रहा है। यक्षिणी को बचाओ, पटना संग्रहालय को बचाओअभियान के कार्यकर्ता और संयोजक पुष्पराज, पटना के पुराने संग्रहालय से नए संग्रहालय में बहुमूल्य कलाकृतियों, मूर्तियों और दुर्लभ पांडुलिपियों के स्थानांतरण के खिलाफ चलाए जाने वाले अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। दरअसल, पुष्पराज फ्रीलांस पत्रकार हैं और देश भर में चलने वाले जनांदोलनों से उनका गहरा सरोकार है। पत्रकारिता और जनांदोलन के इसी सरोकार के चलते वे पटना संग्रहालय का मामला उठा रहे हैं। सरकार इस अनियमितता की छानबीन करने के बजाए उल्टे उन्हें ही धमकी दे रहा है। 

यक्षिणी की मूर्ति

पुष्पराज कहते हैं कि ‘‘ हम चुप नहीं बैठने वाले। जब तक मौलिक कलाकृतियां, मूर्तियां और दुर्लभ पांडुलिपियां बिहार संग्रहालय से पटना संग्रहालय में वापस नहीं चली आतीं, तब तक हम अपने अभियान को न केवल जारी रखेंगे बल्कि और तेज करेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले एक महीने में मेरे इस अभियान को रोकने के लिए बिहार सरकार ने मुझ पर विभिन्न तरीकों से दवाब बनाया। हम दबाव में आने के बजाए आंदोलन को और तेज करेंगे। देश भर से इस अभियान को समर्थन मिल रहा है।’’ पुष्पराज ने जनचैक  को बताया, ‘‘हम पटना संग्रहालय को बचाने के लिए देश के बुद्धिजीवियों,पत्रकारों,इतिहासकारों और पुरातत्वविदों से सहयोग और समर्थन मांग रहे हैं।’’ 

आईएएनएस न्यूज एजेंसी से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘‘हम राज्य सरकार पर पटना संग्रहालय को बचाने के लिए अगले एक साल तक अपने अहिंसक आंदोलन को जारी रखकर दबाव बनाएंगे।’’बिहार संग्रहालय के अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन) जे.पी.एन. सिंह के अनुसार, पटना संग्रहालय के 80 प्रतिशत प्रदर्शन-वस्तुओं को स्थानांतरित किया जाएगा। इसमें बौद्ध, जैन और सिख धर्म से संबंधित कलाकृतियां शामिल हैं।

पटना संग्रहालय 2300 साल पुरानी देदारगंज यक्षी मूर्तिकला को भी खो देगा। पटना संग्रहालय दुनिया भर में यक्षिनी की शानदार संग्रह के लिए जाना जाता है। कई शिक्षाविद, इतिहासकार, विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों, शोधकर्ताओं और कार्यकर्ताओं को यह आशंका है कि पटना संग्रहालय, जो कि अप्रैल 2017 में अपने 100वें साल पूरा कर चुका है, धीमे-धीमे खत्म हो सकता है।

उन्होंने बिहार संग्रहालय से पटना संग्रहालय में दुर्लभ एवं अमूल्य पुरातात्विक प्राचीन वस्तुएं और कलाकृतियों के स्थानांतरण के खिलाफ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एक पत्र भी लिखा है। उन्होंने कहा, ‘‘हम हमारी साझी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने वाले प्राचीन काल की वस्तुओं के भविष्य के साथ हो रही इस गड़बड़ी का विरोध करते हैं।’’ रोमिला थापर और इरफान हबीब सहित विश्व के विख्यात इतिहासकारों ने भी राज्य सरकार के निर्णय के खिलाफ एक याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं।










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