चक्करवर्ती के भाग्य से टूटा सरहदी तनाव का छीका

आड़ा-तिरछा , , बुधवार , 13-03-2019


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भूपेश पंत

चक्करवर्ती सम्राट और उनके मुंहलगे शाही विदूषक रात के वक्त महल में गोपनीय मंत्रणा कर रहे हैं। लोकतंत्र के धर्मयुद्ध से पहले ही युद्ध का बिगुल बज चुका है राज्य की सीमा पर। दुश्मन राज्य के भाड़े के टट्टुओं ने अचानक हमला कर राज्य के कई सैनिकों को शहीद कर दिया है। पूरा राज्य सदमे में है और जवाब चाहता है। लेकिन सम्राट को प्रेस कांफ़्रेंस के त्वरित प्रश्नों का जवाब देना पसंद ही नहीं है। उन्हें किसी को भी जवाब देने के लिए स्क्रिप्ट की ज़रूरत पड़ती है। ज़ाहिर है कि बैठक में उसे ही तैयार किया जा रहा है। विदूषक अपने तर्कों से सम्राट को ये समझाने में कामयाब रहा है कि ये मौका एक तीर से कई शिकार करने का है। गोपनीय बैठक का सारा एजेंडा अब एक हमले से ही राज्य के सभी दुश्मनों को ठिकाने लगाने का है क्योंकि सम्राट ही राज्य हैं।

सम्राट (नाटकीय अंदाज में) - 'विदूषक मेरे मन में आग लगी हुई है। मैं कुछ नहीं भूलता... एक-एक को चुन-चुन कर मारूंगा। मैं खुद को नहीं झुकने दूंगा... मुझे शहीदों की कसम। जो मेरा विरोधी है वो राज्य का विरोधी है..' विदूषक - 'उत्तेजित न हों सम्राट, अभी यहां पर न कोई चित्रकार है न पत्रकार। मेरे ख्याल में हमें मुद्दे की बात करनी चाहिए... मेरा मतलब है अपने मुद्दे की।' सम्राट (सहज होते हुए) - 'ठीक है तो ये बताओ कि हमें यानी लोकतंत्र को और मुझे यानी राज्य को बचाने के लिये विरोधियों के विरुद्ध छेड़े जाने वाले युद्ध की ज़मीनी तैयारी कैसी चल रही है?' विदूषक (फुसफुसाते हुए) - 'सम्राट हमने इस बार ज़मीन से नहीं हवाबाजी से हमले की रणनीति बनायी है। बड़े ही गोपनीय तरीके से तीन मोर्चों पर हवाई बम बरसाने की तैयारी हो चुकी है। एक हमला सीमा पार के दुश्मन राज्य पर होगा, दूसरा इसका साइड इफेक्ट हमला जो भक्तों के दिमाग़ को उन्माद की फैक्टरी बना देगा।

इसके बाद तीसरा आभासी हमला जो आपके भक्त खुलेआम करेंगे उन लोगों पर जो पहले और दूसरे हमले से हुए नुकसान का आकलन करना चाहेंगे। एक में उन्हें मारे गये दुश्मनों के आँकड़े की ज़रूरत होगी तो दूसरे में भक्तों के दिमाग़ को पहुंचे नुकसान की सही व्याख्या करने वाले की। जैसे ही वो खुलासे की मांग करेंगे, आपके भक्त आपके एक इशारे पर आपके विरोधियों को राज्यद्रोही साबित कर देंगे। हम उनसे एक एक सैनिक की शहादत का हिसाब लेंगे।' सम्राट - 'वाह। विदूषक अब तुम बस मेरे कक्ष में सारी व्यवस्था कर दो। मैं इन हवाई हमलों का सीधा प्रसारण देख कर अपनी हंसी को और कर्कश बनाने का अभ्यास करूंगा ताकि जीतने के बाद सबको डरा सकूं।' विदूषक - 'जी सम्राट पहले ही सारी व्यवस्था हो चुकी है। आप जी भर कर इस युद्ध का आनंद लीजिये तब तक मैं अफ़वाहों की चिड़िया उड़ा कर आता हूँ।' (विदूषक वाह सम्राट वाह बोलकर कक्ष से निकल जाता है) हवाई हमलों की लगातार हुई दो कार्रवाइयों ने चक्करवर्ती सम्राट और उनके चक्करधारी भक्तों का उन्माद बल आसमान तक पहुंचा दिया है।

सम्राट के विरोधी इन हमलों में खेत रहे दुश्मनों और दिमाग़ों को तलाश रहे हैं जबकि सम्राट गोपनीय तरीके से तीसरी स्ट्राइक शुरू कर चुके हैं। वो जगह जगह घूम कर हाथ नचा नचा के विरोधियों पर जुमलों से निशाना लगा रहे हैं। भक्त भी सम्राट के पदचिह्नों पर चल रहे हैं। फिलहाल सम्राट युद्ध क्षेत्र का मुआयना करने के बाद महल में शाही बिरियानी भकोस रहे हैं। तभी उनके मुंहलगे शाही विदूषक कक्ष में दाखिल होते हैं। सम्राट (आत्ममुग्ध होते हुए) - 'विदूषक, ये हवाई हमले तो बहुत कारगर रहे। ... (फिर विनोदी स्वर में) लेकिन बिना तुम्हारी मेहनत के ये मुमकिन नहीं था।' विदूषक (सम्राट की इच्छा भांपते हुए) - 'अरे नहीं सम्राट। ये तो आपके हवाबाज व्यक्तित्व का चमत्कार है। आपके तेज ने सबकी आंखें इतनी चौंधिया दी हैं कि अब उन्हें अपने अंधेरे अच्छे लगने लगे हैं। राज्य के लोग खुद ब खुद आँखों पर पट्टी बांध कर घूम रहे हैं। आपके रहते सब मुमकिन है सम्राट और आप हैं तो मैं हूं।' सम्राट - 'विदूषक मुझे इन हवाई हमलों के बाद राज्य में चल रही गतिविधियों का आँखों देखा हाल तो सुनाओ ताकि बिरयानी पच जाये और मूड फ्रेश हो सके?'

विदूषक - 'जी सम्राट। हमने हमलों की तरह ही उनके नतीजों को भी गोपनीय रखा है। राज्य में चारों ओर भ्रम और अविश्वास का माहौल है। भक्तजन आपकी लीलाओं का गुणगान कर रहे हैं और आंकड़ों की आड़ में आपके विरोधियों को राज्यद्रोही साबित कर रहे हैं। जन्ता इस पूरे ऊहापोह के माहौल में अपने बुनियादी सवालों को उठा रही है तो क्या हो रहा है आप ये विडियो में खुद देख लीजिये सम्राट।' (विदूषक अपने स्मार्टफ़ोन में वीडियो चालू कर उसे सम्राट को देता है) सम्राट (देख रहे हैं) कि किस तरह उन्माद की बाढ़ से बचती बचाती जन्ता अपने मुद्दों की गठरी लेकर भक्तों को रोक रोक कर उनसे सवाल पूछने की कोशिश कर रही है। लेकिन भक्त फिलहाल सम्राट विरोधियों पर गालियों की तोप से बौछार करने और चिड़िया बम फेंकने में व्यस्त हैं। विरोधी भी विमानों का सहारा लेकर भक्तों के हमलों का जवाब देने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच सम्राट के एक भक्त ने विकास का सुबूत मांगने पर जन्ता को पीटना शुरू कर दिया है। भक्त उसे पीटते-पीटते पूछ रहा है कि मिल गया सुबूत.. ले और कितने लेगी सुबूत। तू सम्राट से सवाल पूछेगी... तू राज्य से सवाल पूछेगी.. राज्य द्रोही कहीं की।

जन्ता बिचारी पिटते हुए सुबक रही है कि मैं तो पिछले बहत्तर साल से इन्हीं सवालों के जवाब मांग रही थी लेकिन आज पहली बार विकास के इतने करारे सुबूत मिले हैं। वीडियो में दिख रही भक्त की बातों से साफ है कि सम्राट ने राज्य के लिये सब कुछ बड़े गोपनीय तरीके से ज़रूर किया है भले ही उसे भी जन्ता की तरह कुछ नज़र नहीं आ रहा है। लेकिन भक्त का मानना है कि भगवान भी कभी किसी को नज़र आये हैं भला। ये तो आस्था की आंखें हैं जो कुतर्क के विकास को पिछवाड़े से भी महसूस कर सकती हैं।

भक्त के हृदय में सम्राट के प्रति आस्था का भाव राज्य प्रेम बन कर हिलोरें मारने लगा है। वो कह रहा है कि सम्राट का दर्जा अब उसके लिये भगवान से भी ऊपर है। अब उसे शटअप यूनिवर्सिटी से फेक न्यूज का डिप्लोमा लेने से कोई नहीं रोक सकता। ये सब उसके दिमाग में उसी यूनिवर्सिटी का तो भरा हुआ है। ये भक्त हतप्रभ और लुटी पिटी जन्ता को बता रहा है कि वो अब विकास, रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी लाइलाज बीमारियों से मुक्ति पा चुका है महादेव भोले भंडारी की तरह। वीडियो खत्म होते होते सम्राट का चेहरा विद्रूप हंसी के साथ और गुलाबी हो गया है।

सम्राट (अट्टहास करते हुए) - 'हा हा, विदूषक, ये सारे विरोधी मेरे सामने बच्चे हैं.. मंद बुद्धि बच्चे। जन्ता तो और भी बेवकूफ़ है जो वक़्त की नज़ाकत को नहीं समझती। अरे ये वक़्त सवाल पूछने का नहीं मुझे यानी राज्य को बचाने का है। राज्य भक्ति के जिस विमान में मैंने अपने भक्तों को सवार किया है उसके मुकाबले में विरोधियों का हर विमान फेल है। भक्तों को भी मालूम है कि इस विमान का रिमोट कंट्रोल अभी भी मेरे पास है। अब उन्हें भी अगर इस विमान से सकुशल उतरना है तो मेरा गुणगान कर इसका ईंधन भरना ही होगा। वर्ना... उनकी भी खैर नहीं।' चक्करवर्ती सम्राट और शाही विदूषक जोर का ठहाका लगा कर हंस पड़ते हैं। इतनी जोर का कि सामने मेज पर रखी फाइल नीचे गिर पड़ती है और पन्ने कक्ष में बिखर जाते हैं। भूखी, नंगी और शरीर पर जख़्म खायी जन्ता रेडियो पर ये गाना सुन कर अपनी राज्य भक्ति को जगाने की कोशिश कर रही है... 'ये देश है वीर जवानों का... अलबेलों का' (भूपेश पंत वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल देहरादून में रहते हैं।)








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Umesh Chandola :: - 03-13-2019
IT was certainly not NEHRU INDIRA REGIME WHICH WAS IN FAVOUR OF a Pro people policies . In 1958 Kerala government ruled by CPI was sacked by NEHRU . It's crime was that it was working on health education and land reforms . Dividing country on false division of caste religion etc was good for Congress and Congress did it right after 1947.

Umesh Chandola :: - 03-13-2019
IT was certainly not NEHRU INDIRA REGIME WHICH WAS IN FAVOUR OF a Pro people policies . In 1958 Kerala government ruled by CPI was sacked by NEHRU . It's crime was that it was working on health education and land reforms . Dividing country on false division of caste religion etc was good for Congress and Congress did it right after 1947.