प्रधान सेवक को अब सहानुभूति का ही सहारा!

आड़ा-तिरछा , , रविवार , 10-06-2018


pm-modi-death-threat-election

वीना

झारखंड में हर दिन दर्जनों बच्चे दम तोड़ रहे हैं। मत सुनाओ मुझे ये बेकार की ख़बरें। पहले मेरी सुनो, मैं प्रधानमंत्री हूं मुझे बचाओ! मरने दो एमजीएम मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल जमशेदपुर में दुदमुहे बच्चों को। एक 67 साल के हिंदूराष्ट्र रक्षक प्रधानमंत्री के आगे एक-दो दिन की उम्र वाले ग़रीब बच्चों की जान का भला क्या मोल?

माना, मैं जो आठ लाख रूपये किलो की मशरूम हजम कर अपना रंग सफेद कर रहा हूं, काजू की रोटी खाकर मुंह लाल कर रहा हूं। इस काजू और मशरूम का पैसा अगर इन अस्पतालों में इलाज की सुविधाएं बढ़ाने के लिए खर्च किया जाए तो बहुत से बच्चों की जान बच सकती है।

लेकिन...लेकिन...मशरूम और काजू की खुराक़ के अभाव में जब मैं अपना श्याम रंग (काला-सांवला) विदेश यात्रा पर लेकर जाऊँगा तो दूसरे देशों के गोरे-चिट्टे, लाल गालों वाले मुखियाओं के सामने मेरी क्या इज़्ज़त रह जाएगी?

आप तो जानते ही हैं कि मुझे फोटो खिंचवाने का कितना शौक़ है! क्या उन सबके बीच मैं अपनी “कलूटी शक्ल” लेकर खड़ा हो पाऊंगा? मैं कितना बेताब रहता हूँ कि पूरी दुनिया मेरे चमकते चेहरे, शानदार-डिज़ाइनर कपड़ों को देखे, सराहे- रश्क़ करे। काले मुंह वाली फोटो मैं कैसे रिलीज होने दे सकता हूं भला!

इस देश में लाखों बच्चे रोज़ पैदा होते रहते हैं। उनमें से कुछ हज़ार मर भी जाते हैं, तो क्या फ़र्क पड़ता है? आबादी कंट्रोल करने में कुछ मदद यूं ही सही।

पर मेरे जैसा प्रधानमंत्री तो केवल एक ही है। इसलिये मेरी देशवासियों से अपील है कि मेरे चमकते चेहरे की ख़ुराक़ में कोई कमी नहीं आनी चाहिये। और न ही मेरे शानदार लिबासों की लिस्ट छोटी होनी चाहिये। भले ही सेना के जवान फटी वर्दी, टूटी बेल्ट, और चिथड़े जूते में काम चलाएं। उन्हें तो हमारे इशारों पर जान गवानी है। कच्छे-बनियान में गवांए या पूरी वर्दी में क्या फ़र्क पड़ता है। और जो वर्दी में सज कर बलि देने का शौक़ रखते हों वो अपनी मामूली तनख्वाह में से खरीदें। पर मुझे टिप-टॉप रखने का सरकारी बजट कम नहीं होना चाहिये।

आखि़र ऐसा सजीला "56 इंच" के सीने वाला प्रधानमंत्री इस देश को नसीब हुआ है जी! सदियों में एकबार ऐसा मौका मिलता है किसी देश को। इसीलिए मैं कहता हूं, मेरे देशवासियों, तुम खुशकिस्मत हो कि तुम्हें मैं मिला हूं। मेरी क़ीमत समझों।

गोरख़पुर में ऑक्सीजन सिलेंडर की वजह से हज़ारों बच्चे मर गए। लखनऊ में आईसीयू में एसी की ख़राबी की वजह से कई लोगों की जान गई। झारखंड जमशेदपुर में अस्पताल की ख़स्ता हालत-लापरवाही के चलते सैकड़ों बच्चे मर रहे हैं, इन छोटी-छोटी बातों के लिए मुझे टेंशन मत दो। मेरे चेहरे पर झुर्रियां पड़ सकती हैं भई!! अच्छा आप ही बताओ, विदेशों में मैंने आपका गौरव बढ़ाया है कि नहीं...बढ़ाया है कि नहीं...हां बढ़ाया है...

तो आपका हीरो काजू-मशरूम खाता रहे, अपना मुंह चमकाता रहे और विदेशों में बढ़िया-बढ़िया सेल्फी फोटो लेकर आपका गौरव ऐसे ही बढ़ाता रहे इसके लिए आपको मुझे फिर से चुनकर प्रधानमंत्री बनाना है।

जैसा कि आप जानते हैं,  हर चुनाव से पहले मेरी जान के दुश्मन बाहर आ जाते हैं, और चुनाव में मेरी जीत के बाद ही गायब हो जाते हैं। तो मुझे जिंदा रखने के लिए मुझे जिताते रहिये...जिताते रहिये...

बाकी पेट्रोल महंगा है। अडानी-अंबानी, मोदी-चौकसी ने देश लूट लिया। आदिवासी-किसान, दलित मर-पिट रहे हैं। भूख से मां-बेटी-बहनें मर रही हैं। भ्रष्टाचार ने बर्बाद कर दिया। हिंदूराष्ट के नाम पर लंफगों ने आतंक मचा रखा है। गाय के नाम पर लिंचिंग हो रही है, बच्चियों का धर्म के नाम पर बलात्कार हत्याएं हो रही हैं। ये सब छोटी-मोटी ख़बरें हैं। यक़ीन मानिये, अबकी बार जब मैं चुनकर आऊंगा तो ये ग़ैरज़रूरी ख़बर फैलाने वालों की अच्छे से ख़बर लूंगा। मेरा वादा है 2019 में मेरे जीतने के बाद ये ख़बरें आपको परेशान नहीं करेंगी।

तो आखि़र में मेरा यही कहना है कि मुझ जैसे सेल्फी गौरव विधाता की जान को ख़तरा है। जान को ख़तरा मतलब? मेरे ऐशो-आराम, शानो-शौक़त मुझसे छिन जाना। और जिसे ये कम्युनिष्ट, धर्मनिरपेक्षतावादी, समाजवादी, बहुजन मुझसे  छीनने पर आमादा हैं। अगर ये सब मेरे पास न रहा तो मैं तो मर ही जाऊंगा न! मेरी ‘‘जान को खतरा’’ स्क्रिप्ट ड्राफ्ट करवा कर फैला दी गई है। तो... 2019 में मुझे फिर विजयी बनाईये मेरी जान बचाईये।

(वीना फिल्मकार और व्यंग्यकार हैं।)




Tagpmmodi death threat election naxal

Leave your comment