चक्करवर्ती सम्राट अंतरजाल पर फैला रहे हैं मायाजाल

आड़ा-तिरछा , , शुक्रवार , 15-02-2019


pmnarendramodi-teaseller-india-internet-speaker-monk-himalaya

भूपेश पंत

चक्करवर्ती सम्राट आज एक महत्वपूर्ण काम को अंजाम दे कर थके हारे से महल लौटे हैं। वैसे तो वो बीस-बीस घंटे बिना थके काम पर डटे रहते हैं। लेकिन आज समस्याओं के जंगल से गुजरते वक़्त हवा भी जैसे उनका विरोध करने पर आमादा थी। सम्राट ने आंधी को पहली बार महसूस किया है। लेकिन उनका ये एक काम सब विरोधियों को धूल चटा देगा ऐसा उनका विश्वास है। यही सोच उन्हें गुदगुदाते बिस्तर तक खींच लायी। भावातिरेक में सम्राट के दिलोदिमाग में वो संघर्ष फिल्मी फ्लैशबैक की तरह घूमने लगा है जो बचपन से लेकर आज तक उन्होंने किया है। सम्राट सो चुके हैं पर कहानी चल रही है.....

एक समय की बात है एक चतुर कारोबारी था। दुकान में बहुत तोल मारता था। इतनी बुरी आदत पड़ गयी थी कि अपने घर में भी तोल मारता था। एक बार उसने इसी आदत के कारण दुनिया की मोह माया छोड़ कर संन्यास ले लिया। अरे.. एक बात तो रह ही गयी, उसे एक और बुरी आदत थी। बचपन में वो घर के आसपास के कुत्तों को भगाने के लिये उन पर गरम पानी या चाय फेंका करता था। जैसे-जैसे वो लंबा होने लगा रहस्य, रोमांच और गोपनीयता से भरे कॉमिक्स, उपन्यास और संपूर्ण राजनीति शास्त्र की किताबें पढ़ने लगा। उनसे टीप टीप कर जुमले आस पास के लोगों पर फेंका करता।

...तो संन्यास के दौरान एक बार उसने प्लेटो के दार्शनिक राजा के सिद्धांत को पढ़ा। तब किसी सहयोगी विद्वान ने बताया कि संन्यासी से बड़ा दार्शनिक कोई नहीं। लिहाज़ा अगर तू एक बार संन्यासी जीवन में थोड़ी तोल मार ले तो तुझे राजा बनने से कोई नहीं रोक सकता। कारोबारी को ये कदम राजनीति शास्त्र सम्मत लगा। उसने जिस माया को छोड़ दिया था उसी के जाल में लोगों को बांधा और एक प्रांत का अधिपति बन गया।

कारोबारी संन्यासी नेता ने लोगों को भ्रमजाल में डाला और उसके भक्तों की टोली बढ़ती गयी। धीरे धीरे उसने मायाजाल के साथ अंतरजाल का भी सहारा लिया। उसे राजा बनाने की भविष्यवाणियां इतनी हुईं कि वो खुद लोगों के लिये आकाशवाणी बन गयीं। जैसे यही लोगों के मन की बात हो। संपूर्ण राजनीति शास्त्र के सिद्धांत और प्लेटो की मुराद दोनों ही धरातल पर उतर आयी। फकीर राजा बन गया। वो अब चक्करवर्ती सम्राट है। कारोबारी संन्यासी नेता भले ही अब सम्राट बन चुका हो लेकिन उसके भीतर ये तीनों आज भी मौजूद हैं। उन्हें बड़े कारोबारियों से विशेष स्नेह है और संन्यास तो उन्होंने आज तक नहीं छोड़ा। सम्राट बने रहने के लिये अब नेतागिरी के अलावा और कोई चारा भी नहीं।

सम्राट ने राज्य के लिये क्या कुछ नहीं किया ये उन्हें ही मालूम है। सम्राट जैसा कोई नहीं, वो फकीर हैं राज्य की तकदीर हैं। ऐसे चुनावी नारे अंतरजाल में फैलाये जा रहे हैं। अंतरजाल हो, टीवी सीरियल हो, खबरें या फिर सिनेमा हर कहीं विरोधी खलनायक बन निशाने पर हैं और हीरो तो बस हर रूप में सम्राट ही हैं। कभी वो तेनाली बन जाते हैं तो कभी गोकुल धाम। रचनात्मकता के गले पर उनके नाम का पट्टा बांध दिया गया है। तोता जो भी पर्ची निकालता है बस सम्राट का नाम ही निकलता है। लेकिन सम्राट को मालूम है कि सच इस तरह छिपता नहीं है और आँकड़े झूठ नहीं बोलते। अब सम्राट की चिंता ये है कि आंकड़ों से झूठ बुलवाया कैसे जाये कि झूठ ही सच लगने लगे।

ऐसे तनाव के क्षण में जबकि चापलूस शाही विदूषक पानीपत के मोर्चे पर है, सम्राट के भीतर का कारोबारी उनकी मदद के लिये बाहर आया। उसने सम्राट को हनुमान की तरह उनकी शक्ति की याद दिलाते हुए कहा कि अपनी उस प्रतिभा का इस्तेमाल करो जिससे लोगों को भ्रमित कर सको। वो तुम्हारे चेहरे पर गरीबी की काली पर्त देखें, आंखों में आंसू देखें, हाथ में झोला देखें, राज्य भक्ति और ईमानदारी का अंत देखें और सबसे बड़ी बात कि इस बीच तुम वो हरकत कर जाओ जिससे लोग वही आंकड़े देखें जो तुम उन्हें दिखाना चाहते हो। सम्राट ने दिमाग़ पर जोर डाला कि आखिर कारोबारी का इशारा किस ओर है।

सम्राट सोच रहे हैं कि सांप्रदायिकता, जातीय घृणा, मोहरबंदी, कुसंस्कार और अपशब्दों के हथियारों से भी जो सच का सूरज छुप नहीं पा रहा उसे झूठ के बादलों में छुपाने का कोई तो तरीका होगा। जयद्रथ वध को याद करते ही सहसा उन्हें अपनी पुरानी आदत याद आयी... तोल मारना। कमबख़्त इतनी बार तोल मारी है लेकिन कर्ण की तरह युद्ध के मौके पर ही सूझ नहीं रही थी। सम्राट ने आख़िरकार एक चतुर कारोबारी होने का परिचय देते हुए जनता को राज्य भक्ति की ओर भरमा कर रोजगार से लेकर राफेल तक तमाम सरकारीआंकड़ों पर तोल मार दी। ये सब करके चक्करवर्ती सम्राट अब चैन की नींद सो रहे हैं। सोते सोते अचानक खर्राटे की जगह उनके अधखुले मुंह से निकलता है... 'वाह सम्राट वाह!'

कहानी खत्म!

                (भूपेश पंत वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल देहरादून में रहते हैं।)










Leave your comment