विकास की बात मत पूछिए, धर्मांतरण पर बहस कीजिये

सम-सामयिक , , मंगलवार , 22-08-2017


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अखिलेश अखिल

विकास के मापदंड पर पूरी तरह से फेल रघुवर दास सरकार के पास जनता को बताने के लिए अब कुछ नहीं बचा है। विकास के सारे दावों पर फिसड्डी साबित  होती यह सरकार अब जनता का दिमाग विकास से हटाकर कुछ ऐसे मुद्दों पर केंद्रित करती जा रही है जिससे समाज में विघटन पैदा हो। और लोग आपस में लड़े भिड़ें। एक नया खेल सूबे में धर्मांतरण को लेकर चल रहा है। सरकार ने धर्मांतरण विरोधी बिल लाकर सूबे की जनता के बीच अलगाव का जो बीज पैदा किया है उससे पूरा झारखण्ड धार्मिक उन्माद में फंसता नजर आ रहा है। लेकिन जनता सरकार की इस नीति का विरोध भी कर रही है। 

झाऱखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास।

ईसाई महासभा ने खोला मोर्चा

धर्मांतरण विरोधी बिल के खिलाफ राष्ट्रीय ईसाई महासभा ने मोर्चा खोलते हुए कहा है कि इसके प्रावधान चर्च और मिशनरियों को प्रताड़ित करने वाले हैं। महासभा ने कहा है कि धर्मांतरण के खिलाफ अलग से बिल लाने की क्या जरूरत है। अगर सरकार को लगता है कि बड़े पैमाने पर धर्मांतरण हो रहा है तो वो भारतीय दंड संहिता की धारा 295 (ए) का इस्तेमाल क्यों नहीं करती। महासभा का कहना है कि रघुवर दास सरकार के बिल का सेक्शन 5 कहता है कि किसी भी धर्मांतरण से पहले डिप्टी कमिश्नर से इजाजत लेनी होगी। यह संविधान में मौजूद निजता और अपने धर्म के पालन करने के अधिकार के खिलाफ है। बिल के प्रावधान राज्य में ईसाई मिशनरियों और चर्चों को निशाना बनाने के उद्देश्य से बनाए गए हैं।

अरमानों पर फिरा पानी

जय जोहार और जय झारखण्ड सरकार। बिहार से अलग होते वक्त झारखण्ड की जनता यही गीत गाये जा रही थी। यह झारखण्ड का समवेत गान था। सभी धर्मों, जातियों, प्रजातियों और समुदायों की बस एक ही मांग थी झारखण्ड में बने अपनी सरकार। बिहार बंट गया और सन 2000 में झारखण्ड का उदय हो गया। पहली सरकार बीजेपी की ही बनी। बाबूलाल मरांडी सूबे के पहले मुख्यमंत्री बने। तब से लेकर कई सरकारें बदल गयी लेकिन झारखण्ड नहीं बदला। जिस आदिवासी समाज के नाम पर इस सूबे की लड़ाई लड़ी गयी, आदिवासियों की कुर्बानियां हुईं, उसी सूबे में आज आदिवासियों को पूछने वाला कोई नहीं है। सूबा बनने के 17 साल बाद भी झारखण्ड का आदिवासी समाज विकास के सबसे पिछले पायदान पर खड़ा बदहाली का आंसू बहाता दिख रहा है।

महिलाओं से अपना पैर धुलवाते रघुवर दास।

हाशिये पर रह गए आदिवासी 

इधर झारखण्ड की रघुवर सरकार के निशाने पर अगर कोई समाज है तो वह है आदिवासी समाज। कह सकते हैं कि  झारखंड की बीजेपी सरकार लगातार आदिवासियों को निशाना बना रही है। पहले छोटानागपुर-संथाल परगना टेनेंसी एक्ट और अब धर्मांतरण विरोधी बिल के जरिये आदिवासियों में फूट पैदा करने की कोशिश में लगी है। छोटानागपुर संथाल परगना टेनेंसी एक्ट के जरिये रघुवर दास सरकार आदिवासियों और मूल निवासियों को हाशिये पर डालना चाहती है। दूसरी ओर, यह धर्मांतरण विरोधी बिल के जरिये ईसाइयों और ईसाई मिशनरियों को प्रताड़ित करने का रास्ता तलाश रही है। हालांकि दोनों बिलों का  जोरदार विरोध हो रहा है।

 

रघुवर दास और राज्यपाल मुर्मू।

राज्यपाल ने लौटाया बिल

गौरतलब है कि छोटनागपुर-संथाल परगना टेनेंसी बिल को राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू ने लौटा दिया और पूछा है कि  सरकार यह बताए कि इसमें किए गए संशोधन आदिवासियों के किस तरह हित में होंगे। सरकार अभी इस मुद्दे पर मौन साधे जनता का मन टटोल रही है और अगले लोक सभा चुनाव को देखते हुए राजनितिक गोटी फिट करती जा रही है। 
इसमें कोई दो राय नहीं कि झारखंड में बीजेपी सरकार ने आते ही मूल निवासियों, आदिवासियों को हाशिये पर धकेलने और उनमें विभाजन पैदा करने वाले कदम उठाने शुरू कर दिए थे। जब भी राज्य में संघ समर्थित सरकारें आई हैं, इन्होंने उसके एजेंडे को ही लागू करने काम किया है। झारखंड में विकास की रफ्तार बेहद धीमी है। बड़ी आबादी रोजगार के अभाव में पलायन के लिए मजबूर है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि विकास, उद्योग विस्तार, रोजगार, इन्फ्रास्ट्रक्चर और स्वच्छता के मामले में झारखंड देश के सबसे पिछड़े राज्यों की कतार में खड़ा है। लेकिन राज्य सरकार लोगों का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने में लगी है। यही वजह है कि वह छोटानागपुर संथाल परगना टेनेंसी एक्ट और धर्मांतरण विरोधी बिल के जरिये भावनात्मक और मूल निवासियों के अस्तित्व के विरोध वाला कदम उठा रही है।

झारखण्ड की रुदाली को भला कौन सुने? केंद्र में भी बीजेपी की सरकार और सूबे में भी रघुवर दास की सरकार। लेकिन आदिवासी समाज इस सरकार के एजेंडे में कहीं दिखाई नहीं पड़ता। लगता है बीजेपी का असली गेम हर हाल में सरकार बनाने और पार्टी का विस्तार करने तक सीमित है। 










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Ramesh kumar tudu :: - 08-27-2017
झारखंड सरकार धर्मांतरण स्वातंत्र्य विधेयक विधानसभा मे पारित किया गया झारखंड सरकार को संताल सरना धर्म महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश कुमार टुडू ने कहा कि संताल सरना धर्म महासभा लगातार जनता के बीच आवाज को बुलंद करने का काम किया है आज झारखंड सरकार ने संताल सरना धर्म महासभा के आवाज को सम्मान करते हुए धर्मांतरण स्वातंत्र्य विधेयक पारित किया गया है

Ramesh kumar tudu :: - 08-27-2017
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