जब राहुल गांधी ने कहा-गुप्त रखी जाए निर्भया के परिवार की मदद

विशेष , नई दिल्ली , सोमवार , 30-10-2017


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जनचौक ब्यूरो

नई दिल्ली। ऐसे दौर में जबकि कोई एक करता है और 18 का श्रेय लेना चाहता है। तब कोई शख्स किसी की सहायता करे और उसको दूसरों से न बताए और इतना ही नहीं अगर कोई बताने की कोशिश कर रहा हो तो उसे रोक दे। ऐसे शख्स को आप किस श्रेणी में रखेंगे? ऊपर से अगर वो शख्स सार्वजनिक जीवन में हो, जहां उसका कैरियर उसके द्वारा किए गए कामों के प्रचार पर ही निर्भर करता है तब आप क्या कहेंगे? जी हां इसी तरह का एक मामला सामने आया है जो कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से जुड़ा है। 

बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने दिल्ली की गैंग रेप पीड़िता ‘निर्भया’ के छोटे भाई को बगैर किसी शोर-शराबे के चुपचाप पायलट ट्रनिंग करने में मदद की थी। 2012 में जब राजधानी दिल्ली में निर्भया के साथ हैवानी घटना हुई थी। तब उसका भाई 19 साल का था और 12वीं कक्षा का छात्र था। लेकिन अब उसने उत्तर प्रदेश में रायबरेली के इंदिरा गांधी उड़ान एकैडमी (आईजीआरयूए) से अपना प्रशिक्षण पूरा कर लिया है और आजकल नौकरी की तलाश में है।  

निर्भया के दो छोटे भाई थे। ये बड़ा भाई है जिसने पायलट का प्रशिक्षण कोर्स को पूरा किया है। हालांकि कोर्ट में सुनवाई के दौरान बड़ा भाई जरूर दिखता था लेकिन छोटे भाई को पूरे प्रकरण से दूर रखा गया था। प्रशिक्षण पूरा करने वाला ये भाई उस समय भी तब प्रकाश में आया था जब अपनी बहन के साथ हुए वाकये पर उसने मीडिया के सामने प्रतिक्रियाएं दी थीं। यहां तक कि एक बार गुस्से में उसने कोर्ट के भीतर नाबालिग आरोपी के साथ मारपीट शुरू कर दी थी।

गौतरलब है कि नाबालिग होने के चलते उसे बलात्कार जैसे घृणित अपराध के लिए केवल तीन साल की सजा हुई थी। जिसको लेकर आम लोगों और खास कर परिजनों में जबर्दस्त गुस्सा था। निर्भया के भाई का वही गुस्सा कोर्ट में निकला था।

कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी द्वारा किए गए इस काम का प्रचार नहीं किया क्योंकि मामले में गांधी का साफ निर्देश था कि परिवार को गुप्त रूप से सहायता की जानी चाहिए।

संडे गार्जियन के हवाले से आई इस खबर में बताया गया है कि निर्भया की मां आशा देवी ने इस बात की पुष्टि की है। उनके मुताबिक ये बात सही है कि कांग्रेस नेता ने उनके बेटे को प्रवेश दिलवाने और उसके कोर्स को पूरा करवाने में मदद की है। उन्होंने बताया कि उनके बड़े बेटे को राहुल गांधी की दरियादिली और नेकनियती का पूरा लाभ मिला है। पूरे घटनाक्रम को विस्तार से बताते हुए आशा देवी ने कहा कि “फैसले के दिन कोर्ट के नजारे के बाद हम लोगों ने अपने बेटों को दिल्ली से दूर रखने का फैसला कर लिया था। हम लोग इस बात को लेकर चिंतित थे कि ये सभी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं उनके भविष्य को प्रभावित कर सकती हैं। ”

परिवार का छोटा बेटा पुणे से इंजीनियरिंग का कोर्स कर रहा है और वहां वो पहले वर्ष का छात्र है। आशा देवी ने बताया कि छोटे बेटे की पढ़ाई का खर्च परिवार खुद उठा रहा है।

 

  • निर्भया के पिता की भी की थी मदद
  • नहीं बदला है महिलाओं के लिए माहौल-आशा देवी

 

इसके साथ ही आशा देवी ने इस बात की भी पुष्टि की कि उनके पति जो इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कार्यरत एक निजी कंपनी में कांट्रैक्ट पर नौकरी करते थे। उन्हें भी स्थाई नौकरी दी गयी। वो इस समय टर्मिनल-3 पर तैनात हैं। आशा देवी ने कहा कि “घटना के बाद उनका स्वास्थ्य सामान्य नहीं रह गया। उनके लिए अब स्थाई आय के स्रोत की तलाश करना मुश्किल हो गया था। अब उनके पास टर्मिनल-3 पर एक डेस्क की नौकरी है जो उनके स्वास्थ्य के लिहाज से अनुकूल है।”

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए कुछ नहीं बदला है। सड़कों पर अभी भी वो असुरक्षित हैं। देश के लोग उनके परिवार के प्रति बेहद दयालु रहे हैं और सभी ने मिलकर न्याय की लड़ाई में उनका सहयोग किया। लेकिन सरकार और कानून को लागू करने वाली संस्थाओं को इस बात की गारंटी करनी होगी कि बलात्कार सरवाइवर को न्याय हासिल हो।










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Shiv :: - 10-30-2017
Sir agara wale rape kuch likhiye