जब एक हिन्दू महिला योध्दा ने किया जेहाद (धर्मयुध्द) का ऐलान

जयंती पर विशेष , , सोमवार , 20-11-2017


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अमरेश मिश्र

आज 19 नवम्बर 2017 को भारत की महान स्वतन्त्रा सेनानी रानी लक्ष्मी बाई की 189वीं जयंती है। रानी लक्ष्मी बाई 1857-58 के भारत के अंग्रेज विरोधी, साम्राज्यवाद विरोधी क्रान्ति की महा नायिका हैं और अंग्रेजों से लड़ते हुए युध क्षेत्र में ही शहीद हुईं।

आज भी रानी लक्ष्मीबाई, अपने शौर्य, शत्रु को अस्थिर करने वाली राजनिति और खूबसूरती के लिये जानी जाती हैं।

रानी के मुख्य दुश्मन, अंग्रेज जनरल 'सर' हुयू रोज़ ने खुद उनके बारे में लिखा है: "रानी में व्यक्तिगत क्षमता, सूझबूझ, चालाकी कूट-कूट के भरी हुई है। वो खूबसूरत भी हैं। हिन्दुस्तान के सारे नेताओं में वो शायद सबसे खतरनाक हैं"

मई 1858 में जारी एक घोषणा पत्र में रानी ने भगवत गीता का उदहारण देते हुए अंग्रेजों के खिलाफ एक साथ 'धर्मयुध्द' और 'जेहाद' का एलान किया था।

घोषणापत्र में लिखा है: "हम आज़ादी के लिये लड़ रहे हैं। भगवान कृष्ण के शब्दों में अगर हम जीते तो हमें जीत का फल मिलेगा और अगर हारे या लड़ते हुए मारे गये तो हम शाश्वत सम्मान और मोक्ष के हक़दार होंगें। हिन्दू और मुसलमान एक हैं। काफिर फिरंगियों के खिलाफ जंग हिन्दुओं के लिये धर्मयुद्ध और मुसलमानों के लिये जेहाद हैं। काफिर अंग्रेजों को उसी समंदर तक खदेड़ देना है। जिसके सहारे वे यहां दाखिल हुए।"

घोषणा पत्र में भगवतगीता की यह लाइन लिखी है: 

हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम् ।

भगवत गीता की यह पंक्ति विशेष है। इसलिये की यही बात कि मारे गये तो स्वर्ग मिलेगा, जीते तो धरती का भोग मिलेगा-हू-ब-हू क़ुरान में जेहाद के सन्दर्भ में कही गयी है। गीता में धर्मयुद्ध की परिभाषा और क़ुरान में जेहाद की परिकल्पना का हू-ब-हू एक होना भी अपने आप में अदभुत और बेमिसाल है।

उससे भी ज़्यादा अचरज भरा है, 1857 के हिन्दू एवं मुसलमान नेताओं का धर्मयुध्द और जेहाद को आपस में मिला देना या एक कर देना। साथ ही हिन्दूओं और मुसलमानों की धार्मिक-सांस्कृतिक समानता पर ज़ोर देना।

आज की परिस्तिथियों में इस बात का विशेष महत्व है। 17 जून 1858, ग्वालियर की अपनी अंतिम लड़ाई में, रानी के साथ उनके खास चुने हुए, 250 पठान घुड़सवार थे। दोस्त खान के नेतृत्व में, सभी 250 पठान रानी के साथ उसी दिन शहीद हो गए।

(अमरेश मिश्र इतिहासकार हैं और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम पर इनका विशेष काम है।)


 






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