जब पूरी व्यवस्था पर भारी पड़ गया चंद दरिंदों और उनका वहशीपन

कहां आ गए हम... , , सोमवार , 13-11-2017


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अखिलेश अखिल

कानपुर के पास मां-बेटी के चलती ट्रेन से कूदने की घटना और उसके पीछे की कहानी पूरे रेलवे तंत्र, पुलिसिया व्यवस्था और भारतीय समाज को कठघरे में खड़ा कर देती है। चंद मनचले और उनका वहशीपन किस तरह से पूरे तंत्र पर भारी पड़ सकता है। ये घटना उसकी नजीर है। दूसरी तरह से कहा जा सकता है कि तंत्र ने काम करना बंद कर दिया और समाज अपनी भूमिका में नहीं रहा। इसका नतीजा ये रहा कि दो इंसानी जिंदगियां दरिंदों के रहमोकरम पर रहने के लिए अभिशप्त हो गयीं। 

इस घटना में मां और बेटी अगर चलती ट्रेन से नहीं कूदतीं तो उनके पास खुद को दरिंदों के चंगुल से बचाने का कोई रास्ता नहीं था। ये मामला इसलिए बेहद संगीन हो जाता है क्योंकि किसी एक जगह का नहीं है न ही एक घटना है या फिर ये संयोग वश हुआ है। इसके पीछे मुगलसराय से लेकर कानपुर के बीच जंगलनामे की एक पूरी दास्तान है। जिसमें पुलिस और रेवले के पूरे तंत्र के साथ ट्रेन में सफर करने वाला यात्रियों का समुदाय भी शामिल है। ये बताता है कि पिछले 70 सालों में हमने एक ऐसी व्यवस्था और समाज गढ़ा है जो अब जंगल से भी ज्यादा खतरनाक और असुरक्षित हो गया है। इसमें हर इंसान अकेला होने के साथ उसकी जिंदगी बर्चस्वशाली के रहमोकरम की मोहताज है। वो समाज की वहशी ताकते हों या फिर राज्य का तंत्र सब इंसानी वजूद के खिलाफ खड़े हैं। 

मामला केवल चंद गुंडों का ही नहीं है जिन्होंने भरी ट्रेन में मां -बेटी को अपनी हवस का शिकार बनाने की कोशिश की। सवाल तो उन सैकड़ों यात्रियों पर उठता है जिनके सामने ये वहशियाना हरकत हो रही थी। यात्रीगण मूक बधिर बने सब कुछ देखते रहे। पूरा मामला व्यवस्था के नकलीपन को दिखाता है साथ ही एक ऐसे समाज की तरफ भी इशारा करता है जो अपनी जड़ों से कटकर अंदर से बिल्कुल खोखला हो गया है। 

अब आइये आपको पूरी कहानी बताते हैं। एक 40 वर्षीय मां और उसकी 15 साल की बेटी ने चलती ट्रेन से छलांग लगा दी  क्योंकि 10 से 15 की संख्या में मनचले उन्हें छेड़ रहे थे।  यह घटना शनिवार 11 नवंबर की देर रात हावड़ा से नई दिल्ली आ  रही ट्रेन में घटी। घटना उस समय घटी जब ट्रेन की सामान्य कोच में उन मनचलों ने लड़की को जबरन शौचालय में खींच कर ले जाने की कोशिश की। जिससे उनके चंगुल से बचने के लिए मां और बेटी को ट्रेन से नीचे कूद जाना पड़ा। चंदारी और कानपुर के बीच में मां और बेटी तकरीबन दो घंटे तक बेहोश पड़ी रहीं।  फिर होश आने पर गंभीर रूप से घायल मां-बेटी लहूलुहान हालत में चंदारी रेलवे स्टेशन पहुंचीं। जहां से उन्हें एंबुलेंस के माध्यम से इलाज के  लिए लाला लाजपत राय अस्पताल ले जाया गया। जीआरपी को घटना की सूचना रविवार को मिली। कानपुर जीआरपी के एसएचओ राम मोहन राय ने बताया कि “शिकायत के बाद हमने एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है”। महिला का पति दिल्ली में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है। जबकि बच्ची कोलकाता में कक्षा नौ की छात्रा है। 

इलाहाबाद के एसपी, रेलवे के मुताबिक इस मामले में महिला के बयान के आधार पर शिकायत दर्ज कर ली गई है। सुरक्षाकर्मियों की लापरवाही के मद्देनजर फतेहपुर जीआरपी की एक महिला सिपाही समेत एक दरोगा को निलंबित कर दिया गया है।

घटनाक्रम के मुताबिक नई दिल्ली के गीता कॉलोनी की ये महिला किशोर बेटी के साथ बीमार मां को देखने के लिए कोलकाता के पास स्थित अपने मायके ओलसोना गई थी। 9 नवंबर को महिला की मां का निधन हो गया था। जिसके बाद वो अपनी बेटी को लेकर 10 नवंबर को अपने चचेरे भाई नजरू के साथ हावड़ा से आनंद विहार आ रही डुप्लीकेट कालका एक्सप्रेस के जनरल कोच में बैठ गयी। 

पीड़ित महिला ने पुलिस को बताया कि ट्रेन में सवार 10 से 15 बदमाश लड़कों ने 11 नवंबर को दोपहर के बाद उसकी बेटी से छेड़खानी शुरू कर दी। मुगलसराय के पास उन्होंने बाकायदा बच्ची को पकड़ने की कोशिश की। मामले की गंभीरता को देखते हुए उसने जब जीआरपी से शिकायत की तो उसने बदमाशों को ट्रेन से उतारा। मगर तकरीबन 30 मिनट बाद वो लड़के फिर से उसी डिब्बे में आ गए। महिला का आरोप है कि पहले जीआरपी ने छेड़ने वालों को पकड़ा, फिर पैसा लेकर उन्हें छोड़ दिया।

जब उन लड़कों ने मां-बेटी के साथ बदसलूकी और अश्लील हरकतें जारी जारी रखीं तो फतेहपुर से पहले रसूलाबाद में ट्रेन रुकने के बाद दोनों मां-बेटी अपना सामान ट्रेन में छोड़ कर उतर गईं और उन्होंने वहां शिकायत दर्ज की। वहां मौजूद सिपाहियों ने दोनों को जीआरपी फतेहपुर पहुंचा दिया। मां-बेटी ने ट्रेन में सामान छूटने की जानकारी दी तो फतेहपुर जीआरपी ने कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर फोन कर सामान उतरवा लिया और कुछ देर बाद इलाहाबाद-ऊधमपुर एक्सप्रेस से मां-बेटी को कानपुर के लिए रवाना कर दिया।

 

  • अश्लीलता की सारी सीमाएं तोड़ीं
  • पैसे लेकर गुंडों को छोड़ने का आरोप

 

 

पीड़ित महिला के मुताबिक फतेहपुर से फिर वो बदमाश लड़के ऊधमपुर एक्सप्रेस में उन्हें मिल गये। अश्लीलता और बहशीपन की सारी सीमाएं पार करते हुए रात दो बजे उन बदमाशों ने बेटी को दबोच लिया। और फिर उसके साथ बलात्कार करने की कोशिश की। नतीजतन उनके बहशी चंगुल से बचने के लिए दोनों मां-बेटी चंदारी स्टेशन के पास चलती ट्रेन से कूद गईं।

आजाद भारत की यह सच्चाई पूरे तंत्र को सवालों के घेरे में खड़ा कर देता है। इसमें पुलिस तंत्र की नाकामी तो जगजाहिर है। आखिर पुलिस ने उन गुंडों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया। यहां तो सच ये है कि पैसे लेकर गुंडों का उल्टे और हौसला ही बढ़ाने का काम किया गया। इसके साथ ही सवाल उन यात्रियों पर भी उठता है जिनके सामने इतना सब कुछ हो रहा था लेकिन सबके सब मूकदर्शक बने रहे। 

 






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