देश भर में अपने-अपने तरीकों से मना वेमुला का शहादत दिवस, चंद्रेशखर ने कहा-रोहित के हत्यारों को नहीं आने देंगे सत्ता में

स्मृति , , बृहस्पतिवार , 17-01-2019


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जनचौक ब्यूरो

(आज रोहित वेमुला का शहादत दिवस था। इस मौके पर पूरे देश में उन्हें श्रद्धांजलि देने के क्रम में अलग-अलग तरह के कार्यक्रम आयोजित किए गए। आज से तीन साल पहले वेमुला की संस्थानिक हत्या के बाद पूरे देश में केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन खड़ा हो गया था। देश के तमाम उच्च शिक्षा के परिसर सीधे सड़क से जुड़ गए थे। हैदराबाद से लेकर जेएनयू और इलाहाबाद से लेकर अलीगढ़ तक के छात्रों की एकता ने न केवल देश की राजनीति को अपनी गिरफ्त में लिया बल्कि उसे अपने सामने झुकने के लिए मजबूर भी कर दिया। 

संसद भी इस आंदोलन से अछूती नहीं रही। सदन में न केवल इस पर बहस हुई बल्कि उस समय की शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी को झूठ बोलने के लिए शर्मिंदा होना पड़ा और आखिरकार अंत में उन्हें अपनी कुर्सी छोड़ने के जरिये इसका खामियाजा भुगतना पड़ा। शहादत के इस मौके पर वामपंथी छात्र संगठनों ने हैदराबाद में कार्यक्रम आयोजित किया। इसके अलावा बनारस में एपवा और प्रतिरोध का सिनेमा ने मिलकर रोहित वेमुला पर बनी फिल्म के प्रदर्शन का आयोजन किया। इस मौके पर भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर आजाद ने अपने फेसबुक लाइव में रोहित वेमुला के हत्यारों को सत्ता में वापस न आने देने का संकल्प लिया। इसके अतिरिक्त ढेर सारे लोगों ने अपने-अपने तरीके से रोहित वेमुला को अपनी श्रद्धांजलि दी। पेश है उनमें से कुछ की टिप्पणियां और वीडियो-संपादक)

इस मौके पर अपने एक ट्वीट में गुजरात के विधायक और युवा फायर ब्रांड नेता जिग्नेश मेवानी ने राधिका वेमुला के अपने बेटे रोहित की प्रतिमा की चूमती हुई तस्वीर शेयर करते हुए कहा कि “एक ऐसी तस्वीर जो रोहित के आखिरी शब्दों की तरह किसी के भी दिल को धक्का पहुंचा सकती है। जाति ने एक खूबसूरत शख्स की जान ले ली जो कार्ल सगन बनना चाहता था। राधिका जी शायद आज जी भरकर रोयी होंगी लेकिन पिछले तीन सालों से वो उम्मीद की प्रतीक के तौर पर लड़ रही हैं। हम उनकी इस जज्बे को सलाम करते हैं”।

छात्र नेता उमर खालिद ने कहा कि रोहित वेमुला की तीन साल पहले आरएसएस-बीजेपी द्वारा हत्या की गयी थी। इन सालों में हम सब न्याय को खारिज करने और उसे बदनाम करने के प्रयासों के गवाह रहे हैं। हमने उनकी मां और भाई द्वारा किए गए भीषण संघर्ष को भी देखा है। रोहित वेमुला हमारे सपनों और संघर्षों में जिंदा है।  








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