राजनियकों से भागवत ने कहा- संघ बनाता है आदमी

विवाद , , बुधवार , 13-09-2017


rss-bhagwat-diplomat-meet

जनचौक ब्यूरो

आरएसएस की सबसे बड़ी खासियत कहिए या फिर दोहरापन ये है कि वो रंग बदलना जानता है। कब, कहां और किस मौके पर क्या कहना है और फिर क्या करना है। उसे पता है। कहीं-कहीं तो अपने ज्ञात और घोषित रुख से 180 डिग्री पलटने में भी उसे कोई हिचकिचाहट नहीं होती। ताजा मामला विदेशी राजनयिकों के साथ संघ प्रमुख मोहन भागवत की बैठक का है। सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि किस हैसियत से उन्हें इन राजनयिकों के साथ बैठने दिया गया। और अगर बैठे तो भला उन्होंने देश और दुनिया के तमाम मसलों पर बात करने की जगह हिंदू मुद्दे पर ही क्यों केंद्रीय किया।

संघ को पता है कि देश के बाहर का कोई शख्स कट्टरता पसंद नहीं करता है। लिहाजा इस मौके पर मोहन भागवत इस तरह से पेश आए मानों वो और उनके कार्यकर्ता उदारता की प्रतिमूर्ति हों और उनका संगठन सबसे बड़ा समाजसेवी संगठन है। इस मौके पर उन्होंने अपने संगठन से जुड़ी दो चीजों से बिल्कुल पल्ला झाड़ लिया। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व ये नहीं है कि आप क्या खाते हैं और क्या पहनते हैं बल्कि लोग जैसे हैं उन्हें उसी रूप में स्वीकार करना हिंदुत्व है। इस मौके पर उन्होंने सोशल मीडिया पर गाली गलौच करने वाले दक्षिणपंथी ट्रोलों से भी पीछा छुड़ा लिया। उन्हें आक्रामक बताते हुए उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर उनकी अतिवादी अभिव्यक्ति कमर के नीचे मार करने सरीखी है। इसके साथ ही उन्होंने पानी के चादर की तरह साफ हो चुके बीजेपी और संघ के बीच के नाभि-नाल के रिश्ते को एक बार फिर से परिभाषित करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि न तो आरएसएस और न ही बीजेपी एक दूसरे को चलाते हैं। दोनों अपने-अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेते हैं।

हिंदू रंग में देश को रंगने की कोशिश।

बीजेपी महासचिव राम माधव के इंडिया फाउंडेशन के बैनर तले आयोजित ये अपने किस्म का अलहदा कार्यक्रम था। बताया जा रहा है कि इसमें तकरीबन 50 देशों के राजदूतों समेत राजनयिकों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर उन्होंने सबको हिंदू बताने की कोशिश की। उनका कहना था कि हिंदुत्व किसी के खान-पान और कपड़े के आधार पर भेद-भाव नहीं करता है। लेकिन आरएसएस की ये परिभाषा उन तमाम घटनाओं से अलग है जिसमें किसी के बीफ खाने के आरोप और किसी के गाय ले जाने के चलते हत्या कर दी गयी। अब संघ प्रमुख को जरूर ये बताना चाहिए कि फिर उनके हत्यारे कौन थे क्या वो कोई भूत थे या फिर ये हत्याएं किसी साजिश का नतीजा थीं। देशभर में गोरक्षा का अभियान कौन चला रहा है और उसकी आड़ में हत्याएं कौन कर रहा है?

संघ प्रमुख की सोशल मीडिया पर ट्रोलों द्वारा की जा रही गाली गलौच की सफाई भी बेहद अचरजभरी है। अभी जब तक इससे बीजेपी समेत पूरे संघ परिवार को फायदा मिल रहा था तब तक किसी को उस पर कोई एतराज नहीं था। बल्कि उल्टे बीजेपी ने अपने आईटी सेल के जरिये इसको जमकर बढ़ावा देने का काम किया। 2014 के चुनाव में पीएम मोदी की जो छवि बनाई गयी उसमें फोटोशाप की बहुत बड़ी भूमिका थी। और हाल के दिनों तक अपने तमाम झूठ को स्थापित करने के लिए उसका पूरा सहयोग लिया गया। लेकिन अब चीजें जब बैकफायर करने लगीं हैं और उन्हीं का हथियार उनके गर्दन पर चलता हुआ दिख रहा है। तब संघ समेत पूरी दक्षिणपंथी जमात उससे पल्ला झाड़ लेना चाहती है। इतना ही नहीं इससे आगे बढ़कर सोशल मीडिया पर अब सच बोलने वाले भारी पड़ने लगे हैं। कोई भी फोटोशाप या फिर झूठ बीजेपी का आईटी सेल डालता है उसे तुरंत पकड़ लिया जाता है। ऐसे में इनके लिए सब कुछ उल्टा पड़ गया है। अनायास नहीं पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को गुजरात में लोगों से सोशल मीडिया पर ध्यान न देने की अपील करनी पड़ी।

स्वयंसेवकों का पथ संचलन।

आरएसएस और बीजेपी के बीच के रिश्तों की सफाई भी बेहद खास रही। सुविधा की ये दोस्ती कोई आरएसएस से सीखे। जब चाहा एक बता दिया और जब चाहा एक दूसरे से अलग हो गए। यह सिलसिला बीजेपी के जन्म के साथ ही चल रहा है। लेकिन हाल के दिनों में दोनों ने ढोंग के इस चादर को भी फेंक दिया था। ये उस समय सामने आया जब संघ के पदाधिकारियों ने बाकायदा कैबिनेट मंत्रियों को सामने बैठाकर उनसे रिपोर्ट हासिल की। और उसमें पीएम तक को हाजिरी लगानी पड़ी थी। लेकिन राजदूतों के सामने भागवत ने फिर वही पुराना राग अलापा जिसमें उन्होंने कहा कि बीजेपी और संघ अलग-अलग हैं और दोनों अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेते हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी न तो संघ को चलाती है और न ही संघ बीजेपी को।

जिन लोगों ने इस सत्र में हिस्सा लिया था उनका कहना था कि इसमें ढेर सारे सवाल पूछे गए जिसमें ज्यादातर लोग ये जानना चाहते थे कि आरएसएस किस तरह का काम करता है। भागवत ने इसका उत्तर देते हुए कहा कि संघ ‘इंसान बनाने’ का काम करता है और स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उसके 1.7 लाख सेवा के प्रोजेक्ट चल रहे हैं। 










Leave your comment