आखिर कितने महत्तर हैं विश्वनाथ?

विवाद , नई दिल्ली, बृहस्पतिवार , 31-01-2019


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जनचौक ब्यूरो

साहित्य अकादमी के पुरस्कारों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। लेकिन अब उसकी महत्तर सदस्यता को लेकर भी प्रश्न चिन्ह खड़ा हो गया है। अकादमी ने मंगलवार को चार लेखकों को फेलो (महत्तर सदस्य) बनाये जाने की घोषणा की जिनमें अकादमी के अध्यक्ष रहे विश्वनाथ प्रसाद तिवारी भी शामिल  हैं। बाकी अन्य लेखकों में अंग्रेजी के प्रसिद्ध लेखक जयंत महापात्र भी हैं जो उड़िया के भी चर्चित लेखक हैं। इसके अलावा डोगरी की लेखिका पद्मा सचदेव और असमिया के संपादक लेखक नागेन सैकिया भी शामिल हैं लेकिन हिन्दी साहित्य की दुनिया में चर्चा श्री तिवारी को लेकर है। क्या श्री तिवारी इतने बड़े कवि और आलोचक हैं कि उन्हें अकादमी का फेलो बनाया दिया जाये। कुछ साल पहले डॉ. नामवर सिंह, केदार नाथ सिंह और कृष्णा सोबती जैसे यशस्वी लेखक को फेलो बनाया गया तो क्या श्री तिवारी का साहित्यिक कद उन लेखकों के बराबर ठहरता है। 

अकादमी से जुड़े रहे एक लेखक का कहना है कि जब मन्नू भंडारी जैसी लेखिका विश्वनाथ त्रिपाठी जैसे आलोचक और अशोक वाजपेयी जैसे कवि आलोचक  मौजूद हैं तब श्री तिवारी का चयन न्याय संगत नही हैं। यहां तक कि उनके प्रिय लेखक रामदरश मिश्र का भी योगदान श्री तिवारी से अधिक है। यही नहीं  काशी नाथ सिंह भी श्री तिवारी से बड़े लेखक हैं। श्री तिवारी का योगदान इतना है कि वह अकादमी के अध्यक्ष रहे हैं और उन्होंने अपने समर्थकों को जनरल कौंसिल तथा एग्जीक्यूटिव में घुसाया है।

गौरतलब है कि जनरल कौंसिल ही फेलो का चयन करता है। श्री तिवारी पर यह आरोप लगते रहे हैं कि वे दक्षिणपंथी रुझान के लेखकों को अधिक प्रश्रय देते रहे हैं। और उनके कार्यकाल में ज्यादतर उन लेखकों को पुरस्कार मिला जो गैर वामपंथी हैं और अवार्ड वापसी के मुद्दे पर लेखकों के साथ नहीं आये थे। वे सत्ता प्रतिष्ठान के समर्थक रहे हैं।

सूत्रों का यह भी कहना है कि श्री तिवारी को साहित्य अकादमी का पुरस्कार नहीं मिल पाने के कारण उन्हें फेलो बनाकर उपकृत किया गया। हिन्दी में महादेवी वर्मा, जैनेन्द्र, रामविलास शर्मा, अमृतलाल नागर, निर्मल वर्मा जैसे लेखकों को यह सम्मान मिलता रहा है। श्री तिवारी की गिनती हिन्दी के श्रेष्ठ कवियों में भी गिनती नहीं होती रही है। आलोचना में उनसे अधिक योगदान डॉ. मैनेजर पाण्डेय और डॉ विश्नाथ त्रिपाठी का रहा है।

श्री तिवारी ने हिन्दी का संयोजक भी अपने शिष्य को बनवा दिया है तथा वर्तमान उपाध्यक्ष भी उनके उपकृत रहे हैं क्योंकि श्री तिवारी ही उनके समर्थक रहे हैं और दोनों में अच्छी जुगलबन्दी रही है। उन्हें उपाध्यक्ष बनाने में उनका समर्थन रहा है।

श्री तिवारी के कार्यकाल में ही अवार्ड वापसी आन्दोलन चला था और भाजपा समर्थक लेखकों ने अवार्ड वापसी का खुलकर विरोध किया था और वे अकादमी के समर्थन में खुलकर आये थे जिनमें नरेन्द्र कोहली, कमल किशोर गोयनका, मालिनी अवस्थी जैसे लोग शामिल हैं। बताया जाता है कि श्री तिवारी की इन लेखकों से खूब छनती है उन्होंने पिछले दिनों अपनी पत्रिका दस्तावेज़ में अवार्ड वापसी आन्दोलन की खूब खिंचाई की थी। दस्तावेज़ में वह वाम विरोध का विष वमन करते रहे हैं।

उनके कार्यकाल में रामदरश मिश्र, चित्रा मुद्गल, नासिरा शर्मा, मृदुला गर्ग जैसे लोगों को हिन्दी में अकादमी पुरस्कार मिला लेकिन संजीव, असग़र वजाहत, शिव मूर्ति, मैत्रेयी पुष्पा, अखिलेश जैसे लेखकों को यह पुरस्कार नहीं मिला जो अपने वाम तेवर के लिए जाने जाते हैं और जबकि उनकी कृतियों ने साहित्य में  धूम मचाई।

 








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