“भारत माता को बिल्ली बना दो”

आड़ा-तिरछा , व्यंग्य, रविवार , 03-09-2017


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वीना

दिल्ली के थाने में पहुंच कर भारत माता ने एक सिपाही से कहा - ‘‘मैं भारत माता हूं।’’ तोंदू सिपाही ने जगह-जगह से फटी, गंदी लाल साड़ी में लिपटी बिखरे बाल, बेहाल औरत को घूरकर देखा। ‘‘थोड़ा पानी मिलेगा, मेरा गला सूख रहा है।’’ खुद को भारत माता बताने वाली औरत ने कहा।

हिंदू ब्रिगेड ने भारत माता को बहुमूल्य रेशमी साड़ियों से नवाज़ा है। आजकल तो तीन रंगों की तिरंगा स्टाइल साड़ी भी डिजाइन करवाई गई है। और ये पुराने ज़माने की फटी हुई साड़ी लपेटकर इधर-उधर फिर रही है।

सांकेतिक तस्वीर। साभार : गूगल

पानी की दरख्वास्त को दरकिनार कर सिपाही साहब ने शक्की निगाहों से ऊपर से नीचे तक मुआयना करते हुए पूछा- ‘‘मोहतरमा भारत माता, ये बताइये आपके गहने कहां हैं? और ये बेतरतीब फटी साड़ी का क्या मामला है? क्या आपको पता है हमारी भारत माता सिर्फ महाराष्ट्रीयन स्टाइल की साड़ी पहनती हैं?’’

साड़ी संभालते हुए माता बोली- ‘‘मैं बंगाल से गुज़र रही थी। वहां एक भीड़ दो नौजवानों को बेरहमी से पीट रही थी। मैं एक तरफ खड़े होकर देखने लगी कि ये क्या हो रहा है? भीड़ में लोग चिल्ला रहे थे गाय खाते हैं, मारो देशद्रोहियों को’’  बताते-बताते भारत माता की रुलाई फूट पड़ी। फिर कुछ संभल कर आंसू भरी आंखों से पुलिस वाले की तरफ देख कर बोली- ‘‘भारत माता की जय, भारत माता की जय बोले जा रहे थे और उन बच्चों को मारे जा रहे थे! अपने नाम पर दो मासूमों का कत्ल अपनी आंखों से होता देखा मैंने।

सांकेतिक तस्वीर। साभार : गूगल

जब मारने वालों को लगा कि पिटने वाले मर गए हैं तो वे वहां से चलने लगे। जाते हुए कुछ कि नज़र मुझ पर पड़ गई। मैं डर से थर-थर कांप रही थी। मैंने वहां से भागना चाहा पर उन्होंने मुझे पकड़ लिया। गहनों के लिए मेरे बाल, साड़ी, जिस्म सब नोच डाले। मैं कहती रही मैं भारत माता हूं, भारत माता हूंपर उन्होंने एक न सुनी। यहां तक कि मेरी साड़ी खींचने लगे। मैं जैसे-तैसे खुद को बचा कर भागी वहां से। इस भागा-भागी में साड़ी खुल गई तो मैंने ऐसे ही लपेट ली’’

बेतरतीब साड़ी की तरफ देखते हुए बोली - ‘‘जब मैं अलग-अलग राज्यों से गुज़री तो देखा कि और भी कई तरह से साड़ी पहनी जाती है। पता नहीं मुझे महाराष्ट्रीयन तरीके से ही क्यों पहनाते हैं। मुझे खुद पहननी आती नहीं इसलिए ऐसे ही लपेट कर घूम रही हूं।’’

सांकेतिक तस्वीर। साभार : गूगल

 ‘‘और आपकी सवारी शेर का क्या हुआ? वो नहीं था वहां, आपको बचाने-भगाने को!’’ मज़ाक उड़ाने के अंदाज़ में एक और टुंईया सा सिपाही बोल पड़ा।

भारत माता ने गहरी सांस लेते हुए कहा - ‘‘मैंने जब संपूर्ण भारत का मुआयना करने की बात कही तो शेर ने दो टूक कह दिया - मुझे अपनी जान प्यारी है। आपके नाम का जयकारा करने वाले जानवरों और इंसानों किसी को नहीं बख्शते। गाय खाने-बेचने, खाल उतारने के नाम पर अभी तक दर्जनों को ठिकाने लगा चुके हैं। इसके अलावा भी जो उन्हें पसंद नहीं उसे देशद्रोही, आतंकवादी, नक्सली बताकर दुनिया से उठा देते हैं। मैं तो अपनी भूख मिटाने के जुर्म में बेमौत मारा जाऊंगा। आपको भी इज्ज़त प्यारी है तो जहां हैं वहीं रहिये।

‘‘उस समय मैंने अपने शेर की बातों पर यकीन नहीं किया था। गुजरात, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश देश के हर राज्य की दशा देख कर आ रही हूं। फैक्ट्रियों के जहरीले पानी और गैसों ने मेरी धरती को ज़हर से भर दिया है। मेरे प्यारे बच्चे या तो भूख, कुपोषण से मर रहे हैं या ज़हरीले खाने से। कहीं सूखे से तो कहीं बाढ़ से। छोटी-मोटी बीमारियां सैकड़ों बच्चों को निगल रही हैं। धर्म के नाम पर इंसान को कीड़ों-मकोड़ों की तरह मारा जा रहा है।’’

माता का सारा ब्योरा सुनने के बाद टुंईयां सिपाही ने सिर पीटते हुए कहा - ‘‘देवी जी लगता है आप अभी आसमान से उतरी हैं। आपको इतना भी पता नहीं कि जिस इलाके में वारदात होती है रिपोर्ट भी वहीं के थाने में लिखी जाती है। ये दिल्ली है। यहां आपका कोई मामला नहीं बनता।’’

माता तिलमिलाई - ‘‘मैं इस व्यवस्था के कर्ता-धर्ता से मिलने दिल्ली आई हूं। सुना है वो आजकल यहीं कहीं रहता है। यहां से गुज़र रही थी तो किसी ने कहां कि तुम लोग मुझे वहां छोड़ आओगे।’’

अब तक खामोश बैठा दरोगा उठा और दूसरे कमरे में जाकर भारत माता के पोस्टर को देखकर खुद से बोला - ‘‘शक्ल तो हू-ब-हू मिलती है। मामला क्या है?’’ दरोगा ने तुरंत किसी को फोन पर भारत माता आगमन की कथा सुनाई। उधर से जवाब मिला -‘‘हिंदू ब्रिगेड के रहते अगर भारत माता अपने आप डिसाइड करने लगी कि उसकी धरती पर क्या होना है और क्या नहीं तो ऐसे तो बन चुका हिंदू राष्ट्र।  आगे खुद समझदार हो।’’ दरोगा ने मुस्कुराकर मूंछों को मरोड़ते हुए कहा- ‘‘जी जनाब।’’

‘‘हमारी बिल्ली हमीं को म्याऊं,’’ दरोगा माता के चेहरे के नज़दीक जाकर बोला। ‘‘मैं बिल्ली नहीं भारत माता हूं,’’ भारत माता ने नाराज़ होते हुए कहा। दरोगा कुटिल मुस्कान बिखेरते हुए बोला - ‘‘अगर मैं साबित कर दूं कि आप बिल्ली हैं तो?’’ भारत माता हैरान परेशान! ‘‘तुम मुझे बिल्ली साबित कर दोगे?’’

पुलिस वाले ने अपने साथियों की तरफ देखकर आंख मारी - ‘‘क्यों द्विवेदी, ये जो फटीचर बला तुम्हारे सामने खड़ी है, ये औरत है कि बिल्ली?’’  द्विवेदी कुछ कहे इससे पहले भारत माता गरजी - ‘‘मूर्ख आदमी, मैं औरत नहीं भारत माता हूं।’’

दरोगा इत्मिनान से बोला - ‘‘आप क्या हैं क्या नहीं, ये हम बताएंगे। बता द्विवेदी?’’ दरोगा ने फिर टुंईयां सिपाही से पूछा। टुंईया ने खिसियाते हुए कहा - ‘‘आपने कहा बिल्ली तो कुछ और कैसे हो सकती है साब। अब दरोगा ने चर्तुवेदी से पूछा - ‘‘तू बता रे चतुर, क्या नज़र आता है तुझे?’’  टुंईयां चतुर ने एक नज़र माता को देखा और हंसी रोकते हुए बोला -‘‘साब बिल्लयां भी अब साड़ी पहनने लगी हैं, ही... ही... ही...।’’

हैरान-परेशान खड़ी भारत माता ठहाके लगाते पुलिसयों का मुंह ताक रही हैं। अचानक दरोगा गुर्राकर बोला - ‘‘लगता है इस नौटंकी को पाकिस्तानियों ने भेजा है। भारत माता बनने चली है। खीचों इसे हवालात में। बताते हैं क्या हश्र होता है इसके जैसी भारत माताओं का यहां।’’ 

माता के बाल खींचने को उतावले दरोगा ने बनावटी नर्म अंदाज़ में कहा - ‘‘माफ करना माता जी, हम तो हुक्म के गुलाम हैं। आदेश मिला है कि आपको इजाज़त लेना सिखाया जाए।’’ और फिर ज़ोर से चिल्लाया - ‘‘तोंदू,  टुंईयां, चलो भारत माता को बिल्ली बना दो!’’ 

(लेखक पत्रकार और फिल्मकार हैं। आप आजकल दिल्ली में रहती हैं।)










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