बुलेट बाबू मोदी का बुलेटबाज़ आइडिया

आड़ा-तिरछा , व्यंग्य, शनिवार , 16-09-2017


satire-bullet-train-modi

वीना

रामअवतार... अरे ओ रामअवतार... तनी सुना हो...रामअवतार...

झल्लाया हुआ आंखें मलता रामअवतार खोली से बाहर आया।

का बात है भईया बिहारीकाहे हल्ला मचाय रहे होफैक्टरी से 12 घंटा का ड्यूटी बजा के अभी तनिक आंख लगी थी कि तुम ससुर रामअवतार...रामअवतार का बाजा बजा दिए।

तोहरी मिर्ची की जुबान में बुलट टरेन की मिठाई!

का बकत हो बिहारी भईया?

अरे बुड़बक! अभी टीबी में देख कर आ रहे हैंमोदिया बोलत रही जपनवा का अब्बा फ्री में बुलट टरेन देय रही। उहां गुजरात मां..

फाइल फोटो। साभार : गूगल

तो ई में हम का करेंऊ बुलटवा को तोहरी खोली में घुसावे का रही का?

भक्! हम का कह रहे रामअवतार के ई बार दसहरा-दिवाली में गांव जाई बखत ससुर हमरा भी बैठने का इंतजाम होई सकत है।

बुलटवा मा!

नहीं रे...ऊ हमार भाग में कहां!

फिरजरनल डिब्बा में रिजरवेसन करवाने की सूझी है का?

एक्कदम ऐही बात है! जानते हो न, हर साल घर जाए बखत का होत है इस्टेसन माडिब्बा में घुसे खातिर।

सांकेतिक तस्वीर। साभार : गूगल

मैं का पूरी दिल्ली के झुग्गी-बस्ती वाले जानत हैं। आदमी हजारों और डब्बा एक। सिर बैठाओ जनानीकंधा पै पूत। जो लग जाए बेटा तो सिर पैई मूत। ढोर-डंगर हमसे जादा आराम से लोट-बैठ के यात्रा करे हैं टरेन में।

ऊ बंगालन रुम्पा और ममता की कुस्ती याद है रामअवतार हा...हा...हा...दोनों का चुटिया एक-दूसरे के हाथदे थप्पड़ दे लात। हंसी भी आवत है और रोना भी। 

भोपाल के कल्लू की हमेसा कोसिस रहती है टरेन के पैखाने में पसरने की। समान-आदमी सब एक जगह सैट। 

 

एक दफा झारखंड के जीतू मुर्मू के बच्चे को हगास लगी। जीतू ने बच्चे का पिछवाड़ा खिड़की के सरियों के बीच चिपका दिया। जोई बच्चा ने भीतर को माल बाहर निकालोससुर हवा ने बाहर की जगह भीतर बैठे लोगन पे प्रसाद छितरा दिया।

सांकेतिक तस्वीर।

हर जगह जिन्दगी नरक है हमरी बिहारी भईया। हरि मंडल की पांच साल की बिटिया तो गरमी के मारे बेहोस हो गई थी। मद्रास, कलकत्तायूपीएमपीछत्तीसगढ़झारखंड कोई कहीं से आए-जाए सबके भाग में एक ही जनरल डिब्बा।

रात को नौ बजे चलने वाली टरेन के लिए तड़के 4 बजे लाइन लगानी पड़त है। फिर भी डब्बे मे घुसने की गारंटी नहीं। हम कहते हैं रामअवतार सबै मिलके मोदी के बंगले पे धमका जाय ससुर।

भईया बिहारी, हमें तो ई मोदिया पे अब तनिक्को बिस्वास नाही। जो 15-15 लाख तुमरे हमरे खाते में आ जाते तो हम भी रिजरवेसन करवाकर ना जाते सलीपर में? देखो!  बोट लेने के बाद कैसा ठेंगा दिखाया जालिम ने।

अरे रामअवतारजब 3 हजार किराया खरच करने वालों को इत्ती बढ़िया टरेन मुफत मिल रही है तो का हम गरीबन को न मिलेगी? हमें तो ससुर बस बैठने भर इंतजाम चाही। इत्ता तो हमरा हक़ बनता है कि नाहीदिन-पे-दिन मज़ूरी कम और हाड़ तुड़ाई जादा हो रई। पहले जो सलीपर का किराया था अब जरनल का होई गवा। आदमी ससुर अपने ही देस में कहीं आवे-जावे लायक नाही।

और फिर एक दिन... दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों के सभी मज़दूर इक्ट्ठा होकर प्रधानमंत्री मोदी के पास जनरल डिब्बों की संख्या बढ़ाने का पत्र लेकर निकल पड़े। पत्र के अंत में लिखा था - तोहार के बखत पूरी टरेन ही जरनल डब्बे की मिल जाए तो हमें धरती पर सुरग नसीब हो जाए हुजुर। 

उम्मीदों भरे कदम मोदी के बंगले से बहुत दूर रोक लिए गए, धमकाए गए। कहां दनादन भागे जाते होदेशद्रोहियोंप्रधानमंत्री की जान लेने आए हो?

सांकेतिक तस्वीर। साभार : गूगल

डरते-डराते रामअवतार ने पर्चा आगे बढ़ा दिया। परचा लेने वाला सिपाही उनके दर्द का साझीदार था शायद। कुछ सोचकर पर्चा भीतर पहुंचा दिया।

दो-तीन घंटे कड़ी धूप में भूखे-प्यासे मज़दूरों को तपाकर पर्चा बड़े ठाठ से एक मूंछों वाले के हाथ में लहराता आया। मूंछों और पर्चे की जुगलबंदी देखकर आंखों में आशा लिए सब ऐसे गरम ज़मीन पर पसर गए जैसे जनरल डब्बे की कुर्सी तशरीफ को दावत दे रही हो। सबने एक स्वर में मोदी की जय-जयकार की। जब चुप हुए तो मूंछों वाले ने पर्चे को इस अदा से पकड़ा कि जैसे इन फटीचर मज़दूरों में हर एक को एक-एक बुलेट ट्रेन भेंट करने वाला है।

आवाज़ में तुच्छ लोगों से बात करने का रौब भरते हुए बोला -‘‘ऐसा हैप्रधानमंत्री जी ने आपकी डिमांड पर खूब गौर करने के बाद पाया कि आपकी डिमांड बहुत तुच्छ है। वैसे भी वो अपने ‘‘दोस्त अबे’’ को बता चुके हैं कि उनके यहां बस एक बुलेट ट्रेन की ही कमी थी। बाकी सब बहुत बढ़िया चल रहा है। मोदी जी को पता ही नहीं था कि पिछले 60 साल में कांग्रेस सरकार ने हज़ारो लोगों के लिए एक ही जनरल डब्बा दिया है। हमारे दयालु प्रधानमंत्री ने आपके लिए जनरल डब्बे से बेहतर सुविधा का इंतेजाम किया है।

जैसा कि आप जानते हैं मोदी सरकार गौ वंश की रक्षक है। भक्षकों के चंगुल से आज़ाद कराए हज़ारों बछडेबैलगायों को मोदी जी ने आपकी सवारी और भोजन की ज़रूरत को पूरा करने के लिए चुना है।

जो जितना चाहे गौ वंश को अपने साथ ले जाए। बैल-बछड़े सामान-आदमी ढोने के काम आएंगे। गाय माता पाव-दो पाव पौष्टिक दूध दे ही देंगी उससे पेट भर लेना। खुली हवा में खाते-पीते महीने-दो महीने में घर पहुंच जाओगे। अपनी बस्ती के हर-घर-परिवार की सूची हम तक पहुंचा दो। आपको गौ वंश साथ ले जाने का नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट ईशू कर दिया जाएगा। रास्ते में गौ रक्षक आपको बक्श देंगे। बोलो करुणामयीउदार हृदय श्री मोदी जी की जय।’’

अचानक जैसे सबके पिछवाड़े पर तपती सड़क ने थप्पड़ जड़ा हो। सब फफोले सहलाते हुए खड़े हुए। मूंछे मुस्कराई और बोली -‘‘कोई बात नहीं, होता है। गौमूत्र ओर गोबर का लेप कर लेना ठीक हो जाएगा। गौ वंश की सवारी नसीब वालों को मिलती है। या तो आप गांव-घर पहुंचेगे या सीधा स्वर्ग। देखोगौ वंश को कोई तकलीफ न होने पाए। गांव-घर में छोड़कर आने के लिए भी जितने चाहे गौ वंश परिवार ले जा सकते हो।’’ 

बेचारी जली तशरीफें अब तक समझ नहीं पाईं कि कौन किसकी सवारी कर रहा है?

पर मोदी जी खूब समझ रहे हैं। अब तक आर्डर दिया जा चुका है। किसानों से कह दो खुश हो जाएं। आवारा जानवरों का इंतेजाम कर दिया गया है। हमेशा की तरह मोदी जी को विदेशी बेवकूफ बना गया और मोदी जी ने देसियों को बना दिया।  हमेशा की तरह बुलेट बाबू मोदी ने मज़दूरों को चिपका ही दिया अपना बुलेटबाज़ आइडिया।

(वीना एक युवा पत्रकार और फिल्मकार हैं। आप आजकल दिल्ली में रहती हैं।)

 










Leave your comment











Shikha bhardwaj :: - 09-16-2017
क्या भिगो भिगो कर मारा है। बेहतरीन व्यंगात्मक कटाक्ष वीना जी।