‘देशद्रोही’ पत्रकारों का वसीयतनामा

आड़ा-तिरछा , व्यंग्य, रविवार , 01-10-2017


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वीना

आजकल इंसान और इंसानियत की तरफदारी करने वालों के खिलाफ देशद्रोह की मुनादी पिटवाई जा रही है।

अपनी अक्ल चलाने के हर्जाने में दर्जनों पत्रकार, लेखक, बुद्धिजीवी, संस्कृति कर्मी उड़ाए जा चुके हैं। कुछ आस्तिक कहलाते थे कुछ नास्तिक। पता नहीं, हत्या के बाद उनका क्या स्टेटस है?

बहुत से अपनी अक्ल चलाने वाले अड़ियल अभी बचे हुए हैं। कब किसका नंबर आ जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसे अड़ियल, तथाकथित  घोषित देशद्रोहियों को अपनी वसीयत करके रख लेनी चाहिये। जीते-जी जहां तक न पहुंच सके, क्या पता, मरने के बाद वो मैदान मार लिया जाए?

स्वर्ग-नरक, आत्मा-परमात्मा, भूत-पिशाच के कथा-पुराण अनुसार जो अपनी आई मौत न मरें यानी समय से पहले जिनकी हत्या कर दी जाती है उनकी आत्मा को (अगर वो होती है तो) मुक्ति नहीं मिलती। वो इसी संसार में भूत-पिशाच बनकर भटकते रहते हैं।

 

पत्रकार गौरी लंकेश की पिछले दिनों हत्या कर दी गई। फोटो साभार

वसीयत का मसौदा

तो भई, देशद्रोह के जुर्म में बेमौत मारे जाने वालों की वसीयत का मसौदा कुछ इस प्रकार है -

हम अपने पूरे होशो-हवास में देशभक्तों और पीड़ित देशवासियों को हाज़िर-नाज़िर जानकर ये वसीयत करते हैं कि -

यदि हम तथाकथित देशद्रोही पत्रकारों की हत्या की जाती है तो इस दशा में आत्मा को परमात्मा से मिलाने वाले अथार्त स्वर्ग में एंट्री की कोशिश के संस्कार कतई न किए जाएं।

इसके विपरीत हर वो काम हमारे मृत शरीरों के साथ किया जाए जिससे कि हमारी आत्मा को (अगर वो होती है तो) मुक्ति मिलने के सारे रास्ते बंद हो जाए। ऐसे उपाय किए जाए जिससे कि हमारा भूत-भूतनी, पिशाच-पिशाचनी बनना पक्का हो जाए।

हम यकीन दिलाते हैं कि हम इस आस्था के साथ प्राण देंगे कि स्वर्ग-नरक, भूत-पिशाच, प्रेत का अस्त्तिव होता है। जिससे कि हमारी आत्मा के भटकने के लिए किए गए अनुष्ठान सफल हों।

अगर धर्म क्षेत्र की कोई ऐसी शर्त है कि नास्तिकों को स्वर्ग-नरक की चारदीवारी में घुसने नहीं दिया जाता, क्योंकि वो उनके (स्वर्ग-नरक और देवता-पिशाच) अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं। तो हम गुज़ारिश करते हैं कि मरते वक़्त हमारे मुंह-शरीर गंगा जल में डुबो दिया जाए। वो तमाम अनुष्ठान किए जाएं जिससे हमारी नास्तिकता को आस्तिकता कर प्रमाणपत्र प्राप्त हो सके। और हम पिशाच रूप प्राप्त करने योग्य हो जाएं।

हमें पिशाच योनि में पहुंचाने के लिए वो सारी सुविधाएं मुहैया करवाई जाएं जो किसी भी आस्तिक को करवाई जाती हैं। जैसे किसी की हज़ारों रूपये की मज़दूरी लूट कर सवा रुपये का प्रसाद बांट कर उस पाप से मुक्ति पाई जा सकती है। बड़े से बड़ा पाप गंगा में डुबकी लगाकर धोया जा सकता है। नर्मदा में डुबकी तो दाऊद को भी देशभक्त बनाने का दम-खम रखती है।

भ्रष्टाचार की चपेट में आए देश के हर जात-धर्म, वर्ग, लिंग के आस्तिक बहन-भाइयों से हमारी गुज़ारिश है कि वो ये उपाय कर हमें पिशाच रूप दिलवाने में हमारी मदद करें।

अगर वाकई देवताओं-पिशाचों की दुनिया है तो हमें उसमें एंट्री ज़रूर मिलनी चाहिये। हम आपको यकीन दिलाते हैं कि पिशाच योनि में प्रवेश करते ही हम उन सभी भ्रष्टाचारियों को आपके जीवन से मिटाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे जो 60 साल के कांग्रेस शासन में पकड़ में नहीं आए। केजरीवाल का लोकपाल आंदोलन जिनका कुछ नहीं बिगाड़ पाया। घर-परिवार त्यागने वाला शादी-शुदा ‘‘ब्रह्मचारी’’ मोदी जिनका बाल बांका न कर पाया।

साभार

हम सभी लोग जो इस इल्ज़ाम में कत्ल किए जाएंगे कि हमने मोदी, बीजेपी, कांग्रेस आदि-आदि की भ्रष्टाचार मिटाने की पवित्र भावना पर शक़ किया, उन्हें बदनाम किया। तो पिशाच बनने के बाद हम अपने सभी इल्ज़ामों-रिपोर्टों की जांच करेंगे। तब हमें राना अय्यूब की तरह वेश बदलकर, जान दांव पर लगाकर स्टिंग करने की आवश्कता नहीं रहेगी। हम कभी भी, कहीं भी पिशाच रूप में बेधड़क घुस जाएंगे। कोई ताला,  दीवार,  तोप,  रॉकेट हमें रोक नहीं पाएगा।

हम सब मिलकर पता लगाएंगे कि इस देश के 90 प्रतिशत मेहनतकशों, किसानों,  औरतों-मर्दोंबच्चों-बूढ़ों की मेहनत का पसीना रुपये-पैसे,  हीरे-जवाहरात,  संपत्ति,  शेयरों,  कंपनियों के कागज़ात का रूप धारण कर किसके स्विस, पनामा आदि-आदि अकाउंटों में आराम फरमा रहा है।

कांग्रेस-बीजेपी सरकारों की मजबूरी हैं सरहदें। दूसरे देशों के कानूनों ने उनके हाथ बांध रखे हैं। पर हम पिशाचों के छापे से दुनिया का कोई चोर बैंक नहीं बच सकता। कोई सरकार-कानून हमें अपने देश का रूपया देश में लाने से नहीं रोक सकती। विदेशों में छुपाई एक-एक पाई हम देश लेकर आएंगे। विदेशों के बाद देश में छुपा काला धन, बेनामी संपत्ति को सरेआम करेंगे। माल्या जैसों को तो कान पकड़ कर बगैर हवाई जहाज के जनता के सामने पटक देंगे।

देश के किसान के गले से फांसी का फंदा निकालकर नोटों की माला पहनाएंगे। हर घर में असली शौचालय बनवाएंगे। सबके पास घर होगा, बिजली होगी। इंसानों और खेतों को भरपेट पानी की व्यवस्था होगी। हर हाथ को काम, हर बच्चा-बुर्जुग स्वस्थ खुशहाल। हर मां-बेटी सुरक्षित-शिक्षित, सम्मानित।  

ईधर हमारे पिशाच बनने की कार्यवाही पूरी की उधर आप सब अपने दुखों और उनसे निजात पाने के रास्तों की लिस्ट बनाना शुरू कर देना। हम बनेंगे गुड पिशाच, करेंगे आपके हर गम़ का इलाज।

अगर हमारे सभी पिशाच संस्कार पूरे करने के बाद भी आपके जीवन में कोई बदलाव नहीं आए, मोदी की काजू की रोटी, घास की रोटी खाने को मजबूर बालक अपनी थाली में न पाएभ्रष्टाचारियो,  आपके गुनाहगारों की ऐसी-तैसी करने वाली कोई अदृश्य पिशाच ताकत सामने न आए तो समझ लेना कि भगवान और पिशाच का कोई अस्तित्व है ही नहीं।

प्रतीकात्मक तस्वीर साभार : गूगल

हमने जो जीवन जिया था बस वही हमारा था। कत्ल किए गए और अपनी मौत मरे सभी इस मिट्टी में मिलकर खाद बन जाते हैं। नए पेड़-पौधों, जीवों का भोजन बन प्रकृति का हाथ बंटाते हैं। न कोई अगला-पिछला जनम होता है,  न पाप न पुण्य। 10 इसलिए भूखे मरते हैं क्योंकि एक सबका डकार जाता है और चुराकर अपना गोदाम भी भर लेता है।

ये सच जान लेना,  मान लेना कि तुम्हारे साथ जो गलत हो रहा है उसे करने वाले मोदी,  पंडे,  बीजेपी, संघ,  कांग्रेस,  सत्ता के भूखे और धन के भूखे अंबानी-अडानी, टाटा-बिड़ला आदि-आदि हैं। ये सब मठ-मंदिर इन लुटेरों के पनाह घर हैं। और ये स्वर्ग-नरक तुम्हारी खुशियों का ख़ून करने वाले औज़ार।

जो भी जीवन है बस यही है जो सामने है। इसे जीने-पाने के लिए लड़ो। आज़ाद करवा लो अपने हक़-अधिकार, खुशियां,  इज्जत,  स्वस्थ शरीर इनके बैंको, लॉकरों, तिजोरियों,  सट्टा-बाज़ारों,  मठ-मंदिरों, मस्जिदों, सत्ता की कुर्सियों के नीचे से। तोड़ दो अनदेखे, अज्ञान स्वर्ग-नर्क के डर का पहाड़। और दे मारों फिर इन ज्ञान के पत्थरों को उनके माथों पर जो तुम्हारे जिस्मों से खून-पसीना निचोड़ कर अपने ऐशो-आराम की तक़दीर लिखते हैं।

- वसीयतकर्ता

देशहित में बोलने वाले

तथाकथित देशद्रोही पत्रकार

 

(वीना एक पत्रकार और फिल्मकार हैं।) 










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